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Sugarcane Price : गन्ने का मूल्य बढ़ाने और चीनी मिलों में गन्ने की तुलाई में हो रही गड़बड़ी को रोकने के लिए किसानों से सरकार से गुहार लगाई है. किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए सरकार ने अब एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है. यह समिति सभी हितधारकों से चर्चा करके गन्ने के मूल्य, चीनी की एमएसपी और चीनी रिकवरी नापने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सुझाव देगी.
किसानों को फसल का पूरा पैसा दिलाने के लिए समिति तुलाई से जुड़ी खामियों की भी जांच करेगी.
नई दिल्ली. गन्ना किसानों को उनकी उपज का बढिया रेट मिलने की आस जगी है. किसानों को गन्ने का अधिक लाभकारी मूल्य दिलाने और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान के लिए सरकार ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. यह फैसला कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया है. यह समिति केवल गन्ने के भाव ही नहीं, बल्कि चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) पर भी राय देगी. एक्स-मिल कीमत वह न्यूनतम दर होती है जिस पर मिलें थोक बाजार में चीनी बेचती हैं.
यदि समिति चीनी की एमएसपी में बढ़ोतरी की सिफारिश करती है और सरकार इसे मान लेती है, तो इससे चीनी मिलों की आर्थिक सेहत सुधरेगी और उनकी किसानों को समय पर व बेहतर दर पर भुगतान करने की क्षमता भी मजबूत होगी.
चीनी रिकवरी फॉर्मूले में पारदर्शिता पर जोर
गन्ने के भाव निर्धारण में चीनी रिकवरी दर की सबसे अहम भूमिका होती है. रिकवरी का मतलब है कि एक क्विंटल गन्ने की पेराई से वास्तव में कितनी मात्रा में चीनी निकलती है. मौजूदा समय में रिकवरी जांचने और उसकी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया किसानों को रास नहीं आ रही है. समिति इस व्यवस्था की समीक्षा करेगी और रिकवरी आकलन में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के उपाय सुझाएगी.
मिलों में तुलाई और मनमानी पर रोक
किसानों को फसल का पूरा पैसा दिलाने के लिए समिति तुलाई से जुड़ी खामियों की भी जांच करेगी. अक्सर किसानों की शिकायत रहती है कि चीनी मिलों के धर्मकांटों या तौल मशीनों में गड़बड़ी कर किसानों को चूना लगाया जाता है. यही नहीं वजन से बिना वजह कटौती करने की शिकायतें भी सामने आती रहत हैं. समिति इन सभी शिकायतों को समझकर वजन प्रक्रिया को पारदर्शी और फूलप्रूफ बनाने के लिए भी उपाय सुझाएगी.