खंडवा में परिवार के साथ घूमने-फिरने और बच्चों को लेकर जाने के लिए जगहें पहले ही कम हैं. ऐसे में शहर के नागचुन तालाब के पास बना बड़ा पार्क लोगों के लिए एक अच्छा पिकनिक स्पॉट बन सकता है.यहां चारों तरफ हरियाली, दूर तक फैला तालाब, शांत वातावरण और बच्चों के मनोरंजन के लिए ट्रेन जैसी सुविधाएं हैं. लेकिन आज इस पार्क की हालत देखकर सवाल उठता है कि आखिर इसकी देखरेख कौन कर रहा है? कहीं कुर्सियां टूटी पड़ी हैं, तो कहीं तालाब में कचरा नजर आता है. फव्वारे बंद हैं, बच्चों वाली ट्रेन नहीं चल रही और घास भी बड़ी-बड़ी हो गई है. पार्क में लगी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा की हालत भी ठीक नहीं है. शहर के इस बड़े पिकनिक स्पॉट की बदहाली बता रही है कि सुविधाएं होने के बावजूद उनका सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है.
कई एकड़ में फैला तालाब, लेकिन बोटिंग की सुविधा नहीं
नागचुन तालाब के आसपास का इलाका प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. यहां दूर तक फैला पानी, हरियाली और शांत माहौल लोगों को आकर्षित कर सकता है. तालाब में जगह-जगह गंदगी नजर आती है. इतने बड़े तालाब के बावजूद बोटिंग जैसी सुविधा का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. अगर नगर निगम तालाब की स्थिति का आकलन कर सुरक्षित तरीके से बोटिंग शुरू करने की संभावना तलाशे, तो यह जगह परिवारों और पर्यटकों के लिए और आकर्षक बन सकती है. इससे लोगों को मनोरंजन का विकल्प मिलने के साथ निगम को भी आय का एक जरिया मिल सकता है. हालांकि, इसके लिए पहले पानी की गुणवत्ता, सुरक्षा और जरूरी व्यवस्थाओं पर ध्यान देना होगा.
पटरियां बिछीं, ट्रेन खड़ी, बच्चों का मनोरंजन बंद
पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए ट्रेन की व्यवस्था की गई थी. इसके लिए पटरी भी बिछी हुई है, लेकिन फिलहाल बच्चों वाली ट्रेन बंद पड़ी है. ऐसे में यहां आने वाले बच्चों को वह मनोरंजन नहीं मिल पा रहा, जिसके लिए परिवार पार्क पहुंचते हैं. अगर ट्रेन की स्थिति की जांच कर उसे सुरक्षित तरीके से दोबारा शुरू किया जाए, तो पार्क में बच्चों और परिवारों की आवाजाही बढ़ सकती है. सवाल यह है कि जब यहां पहले से व्यवस्था मौजूद है, तो उसका रखरखाव करके लोगों के लिए दोबारा उपयोगी क्यों नहीं बनाया जा रहा.
टूटी कुर्सियां, बड़ी-बड़ी घास और बंद पड़े फव्वारे
पार्क में घूमने आने वाले लोगों के बैठने के लिए लगाई गई टेबल और कुर्सियां भी कई जगह टूटी और जर्जर हालत में दिखाई देती हैं.वहीं, घास की नियमित कटाई नहीं होने से जगह-जगह बड़ी-बड़ी घास उग आई है. इससे पार्क की सुंदरता प्रभावित हो रही है और लोगों के घूमने के लिए साफ-सुथरी जगह भी कम पड़ती है. फव्वारे बंद पड़े हैं, जिससे पार्क का आकर्षण और कम हो गया है। अगर नियमित सफाई, घास की कटाई, कुर्सियों की मरम्मत और फव्वारों का रखरखाव किया जाए, तो पार्क की स्थिति में काफी सुधार हो सकता है.
अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा की हालत भी ठीक नहीं
पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा भी लगी हुई है, लेकिन उसकी साफ-सफाई और रखरखाव पर ध्यान दिए जाने की जरूरत नजर आती है। प्रतिमा पर गंदगी और कबूतरों की बीट दिखाई देती है. यह स्थिति पार्क की समग्र देखरेख पर सवाल खड़े करती है. प्रतिमा की नियमित सफाई और आसपास के परिसर को व्यवस्थित रखने की जरूरत है, ताकि यहां आने वाले लोगों को बेहतर माहौल मिल सके.
करोड़ों खर्च होने के बाद भी सुविधाओं का बुरा हाल
नागचुन का यह पार्क खंडवा के बड़े पार्कों में गिना जाता है। यहां तालाब, हरियाली और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाओं की संभावनाएं मौजूद हैं। पहले भी इस पार्क पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आती रही है, लेकिन मौजूदा हालत में कई सुविधाएं बंद या खराब नजर आती हैं। ऐसे में सवाल उठता है. पार्क के रखरखाव के लिए क्या व्यवस्था है और उसकी नियमित निगरानी कौन करता है? शहर में स्मार्ट सुविधाओं और विकास की बात के बीच इस पार्क की बदहाली पर ध्यान देना जरूरी है.
*खंडवा के लोग परिवार के साथ आखिर जाएं तो कहां जाएं?*
शहर में परिवार के साथ कुछ समय बिताने, बच्चों को खेलने देने और पिकनिक मनाने के लिए अच्छी जगहों की जरूरत है. नागचुन पार्क में यह सब करने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए सफाई, सुरक्षा और मनोरंजन की सुविधाओं को दुरुस्त करना होगा. तालाब की सफाई, बच्चों की ट्रेन शुरू करने की संभावना, फव्वारों की मरम्मत, कुर्सियों को ठीक करने और घास की नियमित कटाई जैसे काम प्राथमिकता से किए जाने चाहिए.अब देखना होगा कि नगर निगम इस पार्क की बदहाली पर कब ध्यान देता है. क्योंकि जगह की कमी से जूझ रहे खंडवा शहर के लोगों के पास नागचुन जैसा प्राकृतिक स्थल मौजूद है, जिसे बेहतर रखरखाव के जरिए एक शानदार पिकनिक स्पॉट बनाया जा सकता है। फिलहाल सवाल यही है कि जब पार्क में सुविधाएं मौजूद हैं, तो शहरवासियों को उनका लाभ कब मिलेगा?