PM मोदी किसे करते रहे 10 बार फोन, लेकिन उसने उठाया ही नहीं? फिर दिया बड़ा इनाम
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Sushant Sinha Desh Ki Pathshala: जरा सोचिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद किसी नेता से बात करना चाह रहे हों, उसे बार बार फोन कर रहे हों लेकिन वो नेता बार-बार फोन ही काट दे या फोन न उठाए. आज का किस्सा पीएम मोदी और ओडिशा के नए राज्यपाल ब्रजमोहन राम से जुड़ा है.
पीएम मोदी और ओडिशा के नए राज्यपाल ब्रजमोहन राम से जुड़ा है आज का किस्सा…
झारखंड बीजेपी के नेता ब्रजमोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है. राज्यपाल बनने से पहले पीएम मोदी खुद ब्रजमोहन राम को फोन कर रहे थे. ब्रजमोहन राम ने बताया कि उनके पास एक प्राइवेट नंबर से फोन आ रहा था. उनको लगा कि कोई अनजान व्यक्ति होगा, इसलिए उन्होंने फोन नहीं उठाया. बाद में पता चला कि पीएम ऑफिस से करीब 10 बार फोन किया गया, लेकिन बात नहीं हो पाई.
आखिरकार ब्रजमोहन राम के पास दूसरे नंबर से फोन आया, बताया गया कि पीएम मोदी बात करना चाहते हैं. इसके बाद फिर से प्राइवेट नंबर से कॉल आया और इस बार खुद प्रधानमंत्री मोदी लाइन पर थे. पीएम मोदी ने सबसे पहले उन्हें ‘जोहार’ कहा फिर हालचाल और संगठन के काम के बारे में बात की.
ब्रजमोहन राम ने जब अपनी जिम्मेदारियां बतानी शुरू कीं, तो पीएम मोदी ने कहा कि मुझे सब मालूम है. इसके बाद प्रधानमंत्री ने बताया कि आपको सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है. लेकिन फिलहाल इसकी जानकारी किसी को नहीं देनी है. फिर गृह मंत्री अमित शाह का भी फोन आया और उन्होंने राज्यपाल बनाए जाने की जानकारी दी.
ब्रजमोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले स्थित चंदवा में हुआ था. झारखंड के एक छोटे से कस्बे चंदवा से निकलकर बिहार विधानसभा, लोकसभा और अब ओडिशा के राज्यपाल पद तक पहुंचने वाले ब्रजमोहन राम का राजनीतिक सफर कई पड़ावों से होकर गुजरा है. ब्रजमोहन राम ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अविभाजित बिहार से की थी. वह लातेहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे और फिर उन्होंने पलामू लोकसभा सीट से सांसद बने.
लेकिन इस कहानी का एक और दिलचस्प पहलू है. ब्रजमोहन राम 1996, 1998 और 1999 में लगातार तीन बार पलामू से सांसद चुने गए थे. लेकिन 2004 के बाद उन्हें 22 साल तक लोकसभा चुनाव लड़ने का टिकट नहीं मिला. इसके बावजूद उन्होंने बीजेपी नहीं छोड़ी और पार्टी के लिए काम करते रहे. अब 22 साल बाद उन्हें ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया है. ब्रजमोहन राम कहते हैं कि टिकट नहीं मिलने पर कई नेता पार्टी छोड़ देते हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी के साथ बने रहना चुना.