दुनिया भर में जंग के मैदान जिस तेजी से बदल रहे हैं, उसने आधुनिक सुरक्षा के सामने एक भयानक चुनौती खड़ी कर दी है. दुश्मन अब लाखों के सस्ते ड्रोन्स का पूरा झुंड एक साथ दागकर करोड़ों के एयर डिफेंस सिस्टम को यूजलेस साबित करने में लगे हैं. लेकिन अब सस्ते ड्रोन युद्ध की दादागीरी पर ‘द एंड’ लगने वाला है. अमेरिकी डिफेंस टेक कंपनी एंडुरिल ने अपना नया ‘स्टीलफिन’ इंटरसेप्टर दुनिया के सामने रखा है. ये मिसाइल 4,900 KMPH की खौफनाक सुपरसोनिक-हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ेगी और आसमान में ही ड्रोन्स और मिसाइलों के झुंड पर बाज की तरह झपटकर उन्हें नेस्तनाबूद कर देगी.
क्या है अमेरिका की नई ‘स्टीलफिन’ इंटरसेप्टर?
बढ़ते ड्रोन वॉरफेयर के इस नए और जानलेवा खतरे से निपटने के लिए अमेरिकी डिफेंस टेक कंपनी एंडुरिल इंडस्ट्रीज ने बेहद पावरफुल मिसाइल पेश की है, जिसका नाम है, स्टीलफिन. ये एक ऐसी इंटरसेप्टर मिसाइल फैमिली है, जो अमेरिका के सबसे मॉडर्न ‘पैट्रियट PAC-3 MSE’ मिसाइल की तुलना में करीब 3 गुना सस्ता होने का दावा करती है. अगर ये दावा सच साबित होता है, तो जंग के मैदान में मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपटने का पूरा मिलिट्री गणित ही बदल जाएगा.
जंग का नया गणित: लाखों के ड्रोन पर करोड़ों की मिसाइल का घाटा
मॉडर्न वॉरफेयरर में एयर डिफेंस सिस्टम चलाने वाले देशों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि उन्हें बेहद सस्ते खतरों को गिराने के लिए अपनी सबसे महंगी और सीमित मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है. यूक्रेन से लेकर मिडिल ईस्ट तक हर जगह यही नजारा देखने को मिल रहा है.
- लागत का खतरनाक अंतर: ईरान या रूस के ‘शहाद’ जैसे सुसाइड ड्रोन या मामूली क्रूज मिसाइलों की कीमत महज कुछ हजार या लाख डॉलर होती है. लेकिन इन्हें आसमान में ही तबाह करने के लिए जिन पैट्रियट मिसाइलों को दागा जाता है, उनमें से एक मिसाइल की कीमत करीब 30 से 35 करोड़ रुपए तक होती है.
- स्टॉक खत्म होने का डर: जब दुश्मन एक साथ सैकड़ों ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला बोलता है तो बचाव करने वाले देश के पास महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक बहुत तेजी से खत्म होने लगता है.
- सप्लाई चैन का बड़ा संकट: नई मिसाइलें बनने में सालों का वक्त लगता है. ऐसे में कई देश एक साथ मिसाइल सप्लाई के लिए लाइन में खड़े रहते हैं, जिससे जंग के बीच में हथियारों की भारी कमी हो जाती है. दुश्मन इसी आर्थिक और लॉजिस्टिक कमजोरी का फायदा उठाता है.
क्या है ‘स्टीलफिन’ और ये इतनी खास क्यों है?
एंडुरिल कंपनी की ये नई स्टीलफिन मिसाइल सी-टू-एयर यानी जमीन से हवा में मार करने वाली इंटरसेप्टर है. इसे ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हर तरह के हवाई खतरों को नेस्तनाबूद करने के लिए डिजाइन किया गया है.
मॉड्यूलर डिजाइन का असली कमाल- स्टीलफिन की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘मॉड्यूलर डिजाइन’ है. इसमें टू-स्टेज (दो चरणों वाली) तकनीक का इस्तेमाल हुआ है. इसका पहला स्टेज यानी सॉलिड रॉकेट बूस्टर बदला जा सकता है, जबकि दूसरा स्टेज यानी टर्मिनल इंटरसेप्टर एक जैसा ही रहता है. इसमें अलग-अलग मिशन के हिसाब से नए सीकर या कलपुर्जे बिना पूरी मिसाइल का डिजाइन बदले आसानी से जोड़े जा सकते हैं.
इस मॉड्यूलर डिजाइन का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे न सिर्फ प्रोडक्शन लागत बहुत कम हो जाती है, बल्कि फैक्ट्रियों में इन्हें बहुत तेजी से और भारी तादाद में बनाया जा सकता है.
पैट्रियट से 3 गुना सस्ती, लेकिन ताकत में कितनी आगे?
एंडुरिल का दावा है कि उनकी स्टीलफिन मिसाइल की कीमत पैट्रियट PAC-3 MSE के मुकाबले लगभग एक तिहाई होगी. कीमत में इतनी भारी छूट के बावजूद इसकी मारक क्षमता और रफ्तार में कोई समझौता नहीं किया गया है.
- रफ्तार- सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक (1,235 KMPH से 4,900 KMPH+)
- डिजाइन टू-स्टेज मॉड्यूलर आर्किटेक्चर
- लॉन्चर सपोर्ट- M903A2, Mk 41 VLS और टाइफॉन (Typhon)
- टारगेट- सुसाइड ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल
स्टीलफिन इंटरसेप्टर की सुपरपावर्स
- सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक रफ्तार: स्टीलफिन किस बूस्टर के साथ लगाई गई है, उस आधार पर इसकी रफ्तार सुपरसोनिक से लेकर हाइपरसोनिक यानी ध्वनि की गति से 5 गुना तेज तक हो सकती है.
- 4,900 KMPH की घातक स्पीड: जब कोई चीज हवा में आवाज की रफ्तार (1,235 KMPH) से तेज भागती है, तो उसे सुपरसोनिक कहते हैं. स्टीलफिन जैसी मिसाइल की शुरुआती रफ्तार 1,235 KMPH से लेकर लगभग 4,900 KMPH तक पहुंचेगी, जिससे ये दुश्मन के ड्रोन्स के झुंड पर बाज की तरह झपटेगी.
- मौजूदा लॉन्चरों में आसानी से फिट: इस मिसाइल को दागने के लिए किसी नए और महंगे सिस्टम की जरूरत नहीं है. ये अमेरिकी सेना के मौजूदा M903A2, Mk 41 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम और टाइफॉन (Typhon) जैसे स्थापित लॉन्चरों से सीधे दागी जा सकती है.
- दूरी और क्षमता: अलग-अलग कॉन्फ़िगरेशन के हिसाब से इसकी मारक क्षमता और दूरी को जरूरत के मुताबिक घटाया या बढ़ाया जा सकता है.
कब तक जंग के मैदान में उतरेगी ये नई मिसाइल?
डिफेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, एंडुरिल कंपनी ने इसके शुरुआती बैलिस्टिक टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं.
- 2027 में फ्लाइट टेस्टिंग: कंपनी साल 2027 में इसके अलग-अलग वेरिएंट्स का लाइव फ्लाइट टेस्ट शुरू करने वाली है.
- 2028-2029 तक मास प्रोडक्शन: अगर सारे टेस्ट उम्मीद के मुताबिक रहे, तो 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक इसका बड़े पैमाने पर फुल-रेट प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा.
दुनिया के लिए इसके क्या मायने हैं?
हालांकि अभी तक स्टीलफिन मिसाइल की क्षमता और इसकी कम कीमत का स्वतंत्र रूप से मैदान पर परीक्षण किया जाना बाकी है, लेकिन जिस तरह से दुनिया भर में हवाई और ड्रोन हमले बढ़ रहे हैं, ये तकनीक एक बहुत बड़ी गेमचेंजर साबित हो सकती है.
अगर एंडुरिल जैसी प्राइवेट कंपनियां कम बजट में तेजी से बनने वाले एयर डिफेंस मिसाइल तैयार करने में सफल होती हैं, तो ये अमेरिका के साथ-साथ उसके सहयोगी देशों के लिए भी एक बहुत बड़ी राहत होगी. इससे न सिर्फ दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों के चक्रव्यूह को तोड़ा जा सकेगा, बल्कि किसी भी देश का रक्षा बजट भी खाली होने से बच जाएगा. सस्ते ड्रोन्स से तबाही मचाने वाले आतंकी गुटों और मुल्कों के लिए ये मिसाइल एक तगड़ा झटका साबित होने वाली है.