भारत की सरजमीं पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज यानी चेनाब ब्रिज को दुनिया फटी आंखों से देख रही है. नदी के तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर बना ये 1,315 मीटर लंबा लोहे का अजूबा पेरिस के एफिल टॉवर को भी बौना साबित करता है. चेनाब से जुड़ा भारत का एक दूसरा प्रोजेक्ट भी है, जिसके नाम से ही पाकिस्तान की रूह कांप उठती है. चेनाब नदी के पानी को मोड़ने के लिए तैयार हो रहे भारत के इस ‘मास्टर ब्लूप्रिंट’ से पाकिस्तान का रोना निकल गया है, इसे ‘चेनाब-ब्यास लिंक टनल’ कहा जा रहा है. भारत अब पानी की सप्लाई पर शिकंजा कसने के लिए सिंधु जल समझौते का पूरा गणित ही बदलने जा रहा है.
चेनाब ब्रिज पर पर्यटकों का मेला और पाकिस्तान के दिल में खलबली
कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से हर मौसम में जोड़े रखने के लिए उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक प्रोजेक्ट तैयार किया गया है. इसी प्रोजेक्ट की रीढ़ है चेनाब रेलवे ब्रिज.
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, पर्यटकों और इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए ब्रिज के ठीक बगल में एक व्यूइंग डेक और एक अत्याधुनिक म्यूजियम बनाया जा रहा है, जो बहुत जल्द खुलने वाला है.
- इंजीनियरिंग का अजूबा: इस म्यूजियम में तस्वीरों, डिजिटल प्रेजेंटेशन और स्केल मॉडल्स के जरिए ये दिखाया जाएगा कि कैसे भारतीय इंजीनियरों ने बेहद तेज हवाओं और खतरनाक चट्टानों के बीच 467 मीटर के सेंट्रल स्टील आर्च को तैयार किया.
- अर्थव्यवस्था को बूस्टर डोज: इस लोकेशन के टूरिज्म हब के बनने से जम्मू-कश्मीर के स्थानीय टैक्सी ड्राइवरों, छोटे दुकानदारों, गाइडों और होटल मालिकों की कमाई में जबरदस्त इजाफा होगा.
एक तरफ भारत चेनाब के ऊपर पर्यटन और विकास का नया अध्याय लिख रहा है, तो दूसरी तरफ चेनाब के पानी का सही इस्तेमाल करके पाकिस्तान के होश उड़ाने की तैयारी पूरी हो चुकी है.
क्या है चेनाब-ब्यास टनल प्रोजेक्ट?
पाकिस्तान जिस परियोजना के नाम से ही बौखला गया है, उसे ये ‘लिंक-3 प्रोजेक्ट’ ये यानी येचेनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्टये कहा जाता है. ये प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश की लाहुल घाटी में 2,532 करोड़ रुपए की लागत से बनने जा रहा है.
- 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग: ये हिमाचल प्रदेश के कोकसर गांव के पास चंद्रा नदी जो आगे जाकर चेनाब बनती है पर 19 मीटर ऊंचा एक बैराज बनाया जाएगा. यहां से 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए चेनाब बेसिन के अतिरिक्त पानी को मोड़कर ब्यास नदी में डाला जाएगा.
- पीर पंजाल को चीरती हुई टनल: ये सुरंग पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के नीचे से गुजरेगी, जो मशहूर अटल टनल के पास ही स्थित होगी.
- 4,000 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली : ये इसे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) द्वारा तैयार किया जा रहा है. इस टनल के बनने से हिमाचल प्रदेश को 4,000 मेगावॉट अतिरिक्त हाइड्रोपावर मिलेगी.
- डेडलाइन तय: इस प्रोजेक्ट पर काम 1 अगस्त 2026 से शुरू होने वाला है और केंद्र सरकार ने इसे 31 जुलाई 2029 तक पूरा करने का टारगेट रखा है.
इसके अलावा, भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में स्थित सलाल डैम पर 268 करोड़ रुपए की लागत से एक नया येसेडीमेंट मैनेजमेंट टनल बनाने की भी मंजूरी दे दी है. ये टनल सलाल डैम के जलाशय में सालों से जमा हो रही सिल्ट यानी गाद को बाहर निकालेगी और जरूरत पड़ने पर पानी के बहाव को भी डायवर्ट कर सकेगी.
‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’: सिंधु जल समझौते का नया मोड़
पाकिस्तान का रोना इस बात को लेकर है कि भारत अब सिंधु जल समझौते की परवाह किए बिना अपने पानी का पूरा इस्तेमाल करने जा रहा है.
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया था कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’ और सिंधु जल समझौते को स्थगित रखने का फैसला किया था.
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल समझौते के तहत नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया थाय
- पूर्वी नदियां (पूर्वी हिस्सा): रावी, ब्यास और सतलुज का पूरा पानी भारत को मिला.
- पश्चिमी नदियां (पश्चिमी हिस्सा): सिंधु, झेलम और चेनाब का 80% पानी पाकिस्तान को दे दिया गया था, जबकि भारत को केवल 20% पानी और बिजली बनाने या सिंचाई जैसे गैर-उपभोग्य इस्तेमाल का हक मिला था.
पाकिस्तान का आरोप है कि चेनाब-ब्यास टनल के जरिए भारत चेनाब नदी से 1.9 मिलियन एकड़-फिट पानी मोड़ने की तैयारी कर रहा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है ‘भारत ने इन प्रोजेक्ट्स को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है. भारत पानी को हथियार बना रहा है, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी. ये 1960 की सिंधु जल संधि का सीधा और गंभीर उल्लंघन है’.
लेकिन भारत का रुख साफ है, आतंकवाद को पनाह देने वाले मुल्क को भारत के हिस्से का पानी अब खैरात में नहीं मिलेगा.
पाकिस्तान के लिए ये ‘वॉटर बम’ क्यों है?
पाकिस्तान मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान देश है और उसकी खेती का 80% से ज्यादा हिस्सा सिंधु और उसकी सहायक नदियों यानी चेनाब और झेलम के पानी पर टिका है.
- सूखे का खतरा: अगर भारत चेनाब का पानी टनल के जरिए ब्यास नदी में मोड़ देता है तो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जाने वाले पानी के बहाव में भारी कमी आ जाएगी.
- बिजली और खेती ठप: चेनाब का पानी कम होते ही पाकिस्तान के कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और नहरें सूखने की कगार पर पहुंच जाएंगी, जिससे उसकी पहले से बदहाल अर्थव्यवस्था पूरी तरह घुटनों पर आ जाएगी.
- सलाल डैम का डर: सलाल डैम पर बनने वाले नए टनल से भारत जब चाहे जलाशय की सफाई के लिए पानी का रुख बदल सकता है, जिससे पाकिस्तान में पानी का संकट गहरा जाएगा.
सिंधु नदी से कनेक्शन: कैसे काम करेगा चेनाब-ब्यास टनल का पूरा गणित?
सिंधु जल समझौते का गणित: 1960 के सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु, झेलम और चेनाब (पश्चिम की नदियां) का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान के लिए तय किया गया है, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज (पूर्वी नदियां) पर भारत का अधिकार है.
- पानी को डायवर्ट करने का प्लान: इस नए प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश की लाहुल घाटी में कोकसर गांव के पास चेनाब की सहायक चंद्रा नदी पर बैराज बनाया जा रहा है, जहां से 8.7 किलोमीटर लंबी विशाल सुरंग के जरिए चेनाब का अतिरिक्त पानी ब्यास नदी में गिराया जाएगा.
- बेसिन कनेक्शन और पाकिस्तान की बौखलाहट: चूंकि ब्यास नदी भी सिंधु नदी तंत्र का हिस्सा है, इसलिए ये दो बेसिनों के बीच पानी को आपस में जोड़ने वाला प्रोजेक्ट है. इसी वजह से पाकिस्तान बुरी तरह घबराया हुआ है क्योंकि चेनाब का पानी सीधे ब्यास में पहुंचने को वो सिंधु जल समझौते का उल्लंघन मानता है.
बदलता भारत और बेबस पाकिस्तान
चेनाब नदी पर बना 359 मीटर ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज जहां भारत की आधुनिक इंजीनियरिंग, पर्यटन और कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रतीक बन चुका है, वहीं येचेनाब-ब्यास लिंक टनलये भारत की नई जल-रणनीति का सबसे बड़ा हथियार है.
पाकिस्तान दशकों से भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर चलाता रहा है, लेकिन अब भारत ने ईंट का जवाब पत्थर से देने का मन बना लिया है. चेनाब के पानी को ब्यास में मोड़ने का ये मास्टर ब्लूप्रिंट दिखाता है कि भारत अब अपने पानी की एक-एक बूंद का इस्तेमाल अपने देश के विकास और अपनी जनता के लिए करेगा. पाकिस्तान भले ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोता रहे, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी संप्रभुता और सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है.