Mau News : 54 गवाह, साढ़े 3 साल में सिर्फ 2 की गवाही, आखिर सचिन कहां है? 9 साल पुराने केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त


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Supreme Court News : एक 14 साल का बच्चा लापता हो जाता है और पुलिस 54 गवाहों में से सिर्फ 2 की गवाही ले पाया वो भी साढ़े तीन साल में. अब जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सख्त फरमान सुना दिया. अदालत ने साल 2023 से अबतक रहे एसपी पर कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए.

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54 गवाह 3 साल में सिर्फ 2 की गवाही, सचिन कहां है? 9 साल पुराने केस में SC सख्तZoom

सचिन केस में तीन एसपी पर गिरी गाज.

मऊ : उत्तर प्रदेश के मऊ से एक अजब गजब मामला सामने आया है. यहां करीब 9 साल से लापता 15 वर्षीय सचिन मौर्य का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. बच्चे के गायब होने के मामले में 6 लोगों के खिलाफ आरोप तय थे, तब भी केस में इतनी धीमी कार्रवाई की गई तो सवाल उठना तो लाजिमी था. इस धीमी कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को वर्ष 2023 से अब तक मऊ में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात रहे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है.

कानूनी रिकॉर्ड के मुताबिक, मऊ के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बूढ़ावे गांव निवासी विनोद कुमार मौर्य का 14 वर्षीय बेटा सचिन मौर्य कक्षा नौ में पढ़ता था. 27 सितंबर 2017 को सचिन ट्यूशन पढ़ने के लिए पहसा गया था, लेकिन देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई. परिजनों ने अपने स्तर से काफी तलाश की, लेकिन बेटे का कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद 28 सितंबर 2017 को सरायलखंसी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया. कई सालें बीत जाने के बाद भी छात्र का पता नहीं चल सका.

ट्रायल की धीमी रफ्तार पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

मामले की जांच और उसकी प्रगति से संतुष्ट नहीं होने पर सचिन के पिता विनोद कुमार मौर्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मई 2025 में हाईकोर्ट ने ये कहकर याचिका निपटा दी कि जांच पूरी हो गई है. इसके बाद पिता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. उन्होंने मामले की जांच सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की. मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई के दौरान छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए. बताया गया कि 27 मार्च 2023 को आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष के 54 गवाहों में से अब तक केवल दो की ही गवाही हो सकी है. मुकदमे की सुनवाई में हुई इस लंबी देरी को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया.

एसपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश

सुनवाई के दौरान ट्रायल की धीमी प्रगति पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को वर्ष 2023 से अब तक मऊ में एसपी पद पर रहे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है. इसमें 2015 बैच के IPS अविनाश पांडे (जो पीलीभीत और मऊ में SP रहे हैं और मुख्तार अंसारी की संपत्ति कुर्क करने के लिए चर्चित रहे), 2016 बैच के IPS इलामरन (इलामरन जी) और प्रमोटी IPS 2017 बैच के कमलेश बहादुर का नाम शामिल है. अदालत के इस रुख से लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिवार के मामले में पुलिस और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं. करीब नौ साल से बेटे की तलाश कर रहा परिवार अब भी उसके बारे में ठोस जानकारी मिलने और मामले में न्यायिक कार्यवाही आगे बढ़ने की उम्मीद लगाए हुए है.

सवाल यह है कि आखिर नौ साल बाद भी सचिन मौर्य का पता क्यों नहीं चल सका और 54 गवाहों वाले मुकदमे में अब तक सिर्फ दो गवाहों की गवाही ही क्यों हो पाई? सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब मामले की सुनवाई और जांच में तेजी आने की उम्मीद है.



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