Ground Report: 13 बच्चों की मौत, जर्जर नाव, रात में परिचालन… प्रशासन पर उठे सवालों पर DM वर्षा ने क्या कहा?


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Raghopur Boat Accident: वैशाली में बीती रात हुए हादसे के बाद से गांव भर में मातम पसरा हुआ है. हादसे पर नेताओं और प्रशासन का रिएक्शन सामने आ रहा है. 13 बच्चों की मौत से गांववालों में आक्रोश है. प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं. साथ ही कहा जा रहा है कि नाव जर्जर थी, जिसमें ज्यादा लोगों की सवार होने की वजह से हादसा हो गया. विस्तार से पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट…

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Ground Report: 13 मौतें, जर्जर नाव, रात में परिचालन... प्रशासन पर उठे सवालZoom

राघोपुर में नाव हादसा. (फोटो साभारः ANI)

वैशालीः बिहार के वैशाली के राघोपुर दियारा में नाव हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में कई बच्चे शामिल थे. सभी लोग दूसरे गांव में भोज खाने गए थे. वहां से लौटते समय नाव हादसे का शिकार हो गई. घटना के बाद इलाके में मातम पसरा है. चश्मदीदों ने कहा कि- नाव पर करीब 20 से 25 लोग सवार थे. हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बचाव की कोशिश की. घायलों को इलाज के लिए पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) भेजा गया. घटना के बाद नाव की हालत, रात में परिचालन और प्रशासन की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

भोज खाकर लौट रहे थे लोग
स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में एक परिवार के यहां ब्रह्मभोज का आयोजन था. इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोग नाव से दूसरी तरफ गए थे. भोज खाने के बाद वे वापस लौट रहे थे, तभी नाव हादसे का शिकार हो गई. ग्रामीणों के मुताबिक, नाव पर बड़ी संख्या में लोग सवार थे. हादसे में कई परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया. बताया जा रहा है कि हादसे रात करीब 8:30 बजे हुआ.

छोटी जलधारा में कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?
जहां हादसा हुआ वह नदी की मुख्य धारा में नहीं, बल्कि पानी के एक छोटे हिस्से में हुआ. इसके बावजूद नाव हादसे में 13 लोगों की जान चली गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे. ग्रामीणों ने नाव की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि नाव कमजोर थी और लोगों का भार सहन नहीं कर सकी. जबकि डीएम वर्षा सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन को इस खास नाव के जर्जर होने की कोई शिकायत नहीं मिली थी. उन्होंने बताया कि इस पहलू की भी जांच कराई जाएगी.

रात में नाव चलाने पर रोक, फिर कैसे हुआ परिचालन?
वैशाली की डीएम वर्षा सिंह ने बताया कि नियमों और जिला प्रशासन की एडवाइजरी के मुताबिक रात में नाव का परिचालन प्रतिबंधित है. इसके बावजूद हादसे वाली रात नाव चलाई गई. डीएम के मुताबिक, यह एक निजी नाव थी और उसके मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. डीएम ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे नावों के परिचालन की निगरानी करें. इस मामले में निगरानी में चूक सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है.

पुल के रास्ते जाने की भी थी सुविधा
घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासन की निगरानी पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि इलाके में बाढ़ के दौरान नावों से आवाजाही होती रही है, लेकिन नावों की स्थिति और सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पास में पुल और दूसरा रास्ता मौजूद था. इसके बावजूद लोगों ने नाव से आने-जाने का फैसला किया. क्योंकि कि पुल तक जाने वाला रास्ता खेतों से होकर गुजरता था और वहां कीचड़ था. स्थानीय लोगों ने उसी समय नाव से जाने का फैसला लिया. डीएम ने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

अस्पताल में नहीं थे डॉक्टर, क्या बोलीं डीएम
हादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए NMCH भेजा गया. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अस्पताल में भर्ती घायलों की स्थिति खतरे से बाहर है. बेहतर इलाज के लिए चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं. दूसरी ओर, कुछ ग्रामीणों ने स्थानीय अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता और इलाज में देरी का आरोप लगाया. डीएम वर्षा सिंह ने इन आरोपों से असहमति जताते हुए कहा कि प्रशासन ने एंबुलेंस तुरंत भेजी थीं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों की भी जांच कराई जाएगी.

निजी नाव के मालिक पर होगी कार्रवाई
डीएम वर्षा सिंह ने बताया कि- हादसे में निजी नाव के परिचालन और क्षमता से अधिक लोगों को बैठाने की भूमिका की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि रात में नाव चलाना नियमों के खिलाफ था. संबंधित नाव मालिक के साथ-साथ निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी. वैशाली नाव हादसे ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में नावों की सुरक्षा, रात में परिचालन पर रोक और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.



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