पेरिस: आज के जमाने में जंग कहां पहुंच गई वो फ्रांस से आई खबर ने दुनिया को दिखा दिया है. फ्रांस पर जो हमला हुआ उसकी खबर से पूरी दुनिया हिल चुकी है. हालांकि ये आतंकी हमला था या क्या था ये तो अभी तक साफ नहीं है लेकिन सायबर हमला तो था. किसने किया अभी ये नहीं पता. सायबर हमला तो अब पब्लिक समझने लग गई है. कि इंटरनेट के जरिये जो कंप्यूटर सिस्टम चलते हैं उनको अटैक कर अपराधी अपने कब्जे में ले लेते हैं. इन अपराधियों को हैकर कहते हैं. जैसे किसी बैंक के सिस्टम पर हैकर क़ब्ज़ा करने की कोशिश कर सकते हैं. इसलिए ये इतने सारे पासवर्ड वगैरह लगाये जाते हैं. सायबर सिक्योरिटी एक बड़ी चुनौती बन चुका है. लेकिन फ्रांस में हैकरों ने किस पर हमला कर दिया?
दुनिया में पहली बार हैकरों ने फ्रीजर पर किया अटैक
बैंकों के कंप्यूटरों पर नहीं. बिजली कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम पर हमला कर के शहर में अंधेरा कर दिया क्या? नहीं. रेलवे के कंप्यूटर सिस्टम को हैक कर के ट्रेनों के ऐक्सिडेंट करवा दिए? नहीं. इन सब जगहों पर तो सायबर सुरक्षा के कई इंतजाम आजकल हर देश में होने लग गए हैं. फ्रांस में हैकरों ने अटैक किया सुपरमार्केटों के फ्रिज पर. जी, बड़े-बड़े फ्रिज होते हैं ना दुकानों में मॉल में जिनमें आइस क्रीम, मीट, सब्ज़ियां, फल, तरह-तरह की चीजें रखी रहती हैं. बड़े-बड़े फ्रिज और फ्रीजर. उनपर अटैक कर दिया.
किस तकनीक से हैक किया फ्रिज?
आजकल नई तकनीक का जमाना है. कई देशों में ये ये फ्रिज और फ्रीजर आजकल सीधे इंटरनेट से कंट्रोल होते हैं. सुपरमार्केटों में जो बड़े-बड़े रेफ्रिजरेशन सिस्टम लगे होते हैं, उनमें एक कंट्रोलर यूनिट होती है. ये यूनिट इंटरनेट से जुड़ी रहती है ताकि दुकान के बाहर से भी कोई कर्मचारी या टेक्नीशियन दूर से ही तापमान चेक कर सके, सेटिंग बदल सके, अलार्म देख सके या कोई समस्या होने पर रिमोट से ठीक कर सके. तो फ्रिज में क्या होता है कि उसको साफ करने के लिए डीफ़्रॉस्ट किया जाता है आपको पता होगा. घर वाले फ्रिज में भी ऐसा होता है. कूलिंग बंद कर के तापमान को बढ़ा कर साफ करने का एक ऑप्शन होता है. बड़े मॉल वगैरह में ये भी ऐप के जरिये इंटरनेट से कंट्रोल करने का सिस्टम है कई देशों में.
- हैकरों ने सैकड़ों दुकानों के उन फ्रिज और फ्रीजर के कंट्रोल सिस्टम पर कब्जा कर लिया जो खाने को ठंडा रखने के लिए बने होते हैं. और अपने कंट्रोल में ले लिया.
- उन्होंने दूर से ही फ्रीजरों का तापमान बढ़ाकर 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया, और कुछ जगहों पर तो और भी ज्यादा गर्म कर दिया.
- आमतौर पर ये डीफ्रॉस्ट करने का सिस्टम थोड़ी देर के लिए ही बर्फ पिघलाने के लिए होता है. ताकि बर्फ पिघला कर सफाई कर सकें. लेकिन यहां हैकरों ने घंटों तक फ्रिज को गर्म कर दिया.
- रात में जब सुपरमार्केट बंद थे. सारी रात करीब 6 घंटे तक 50 डिग्री कर दिया टेंपरेचर.
- सुबह जब स्टाफ पहुंचा तो फ्रिज खोलते ही अंदर से गर्म हवा की लहरें आ रही थीं. आइसक्रीम पिघलकर बह रही थी, मीट-मछली सब सड़ गए, खराब हो गए, सब्जियां, दूध वगैरह सब खराब हो गया. कुछ दुकानों में तो छोटी-मोटी आग भी लग गई.
- आग लग गई और मॉल बंद था, सुपरमार्केट बंद था तो पानी छिड़कने का ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम चल पड़ा. दुकानों में पानी के फव्वारे चल पड़े तो बाकी सामान भीग कर खराब हो गया. हर तरफ नुकसान हो गया. और एक जगह नहीं, कई मॉल में ये हो गया.
- कुल मिलाकर करीब 350 से 400 सुपरमार्केट पर ये सायबर हमला हो गया. सारा सामान फेंकना पड़ गया. लाखों-करोड़ों यूरो का चूना लग गया सुपरमार्केट चलाने वालों को.
कंपनी ने दी थी वॉर्निंग?
सब फ्रीजरों में डेनमार्क की कंपनी डैनफॉस के पुराने कंट्रोलर लगे थे, जो लंबे समय से अपडेट भी नहीं हुए थे इंटरनेट से सीधे जुड़े हुए थे ताकि रिमोट से मैनेज किये जा सके. लेकिन इंटरनेट के ऐप से इनको कहीं से भी ऑपरेट करने की सुविधा ने ही इनका बेड़ा ही गर्क कर दिया.
हालांकि कंपनी ने पहले ही सलाह दी थी कि पुराने सिस्टम को अपडेट कर लो या बदल लो, लेकिन कई सुपरमार्केट ने ये किया ही नहीं था. किसी ने ये सोचा ही नहीं था कि इन पर भी सायबर अटैक हो सकता है. सायबर सुरक्षा की इस चूक का फायदा उठाकर हैकरों ने इनको रात को अपने कंट्रोल में ले लिया और डीफ्रॉस्ट साइकिल को बढ़ाकर घंटों तक चला दिया.
क्यों नहीं बजी खतरे की घंटी?
वैसे तो अलार्म बजने का भी सिस्टम होता है इनमें लेकिन हैकरों ने अलार्म को भी ऑफ कर दिया अपने कंट्रोल में ले कर. पूरे फ्रांस में क्या, पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया. इंटरनेट से किसी ऐप के जरिये जो इतनी सारी चीजें अब कंट्रोल की जाने लगी हैं उनसे सुविधा तो हो जाती है, लेकिन इसमें खतरा भी तो है. ऐप को किसी ने हैक कर लिया तो आप जिसको कंट्रोल करना चाह रहे हैं वो कंट्रोल किसी और के हाथ में भी जा सकता है.
पहले क्या होता था कि ये करने के लिए किसीको दुकान का ताला तोड़ना पड़ता और अंदर जा कर फ्रिज का तापमान बढ़ाना पड़ता. लेकिन अब नए जमाने के सिस्टम में सुविधा तो मिल गई कि आप दूर से ही रिमोट से उसको ऑपरेट कर लो और एक साथ कई जगह के फ़्रिज को ऑपरेट कर लो और कंपनियों को भी लगा कि ये बढ़िया है, इतने सारे कर्मचारी और गार्ड नहीं रखने पड़ेंगे. लेकिन किसीने ये सोचा ही नहीं कि चल तो सब कुछ इंटरनेट से रहा है.
सब कनेक्टेड है इसीलिए उसका फायदा भी है और इसीलिये उसमें खतरा भी है. आप पासवर्ड वगैरह लगाते रहिये लेकिन अगर किसीने सिस्टम हैक कर लिया किसी और के हाथ में कंट्रोल ला गया तो ये एक साथ दूर से इतने सारे फ़्रिज कंट्रोल करने की सुविधा ही हमले को भी न्योता दे रही है और वही हो गया.
फ्रांस की सरकार ने क्या किया?
फ्रांस के प्रधानमंत्री ने जांच के आदेश दे दिए हैं. लेकिन किसीने अटैक की जिम्मेदारी तो ली नहीं है. हो सकता है किसी ग्रुप की खुराफात ही हो. या हो सकता है कि कोई चेतावनी देना चाह रहा हो कि आज ये फ्रिज हैक किये हैं कल को कुछ और हैक किया जा सकता है. पूरे यूरोप में तो हड़कंप ही मच गया है. दुकानें अब अपने सिस्टम को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट कर रही हैं कि ये सब रिमोट से आपरेट करने वाली सुविधा का चक्कर ही मत पालो.
यूरोप के फूड कमिश्नर ने इसे खाने को हथियार बनाने की कोशिश बताया है. दुनिया में कई जंगें चल रही रही हैं. इसलिए खतरा तो बड़ा है ये. दुनिया के लिए ये साफ संदेश है कि अब सिर्फ बैंक या रेलवे या बिजली कंपनियों के नेटवर्क ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के उपकरण जो सब लोग इंटरनेट से या ऐप से चलाने लग गए हैं, ये सब निशाने पर आ सकते हैं. ये नई तकनीक सिर्फ वरदान ही नहीं है, ये फंदा भी बन सकती है.