सरकारी अस्पताल से कैंसर की महंगी दवाएं गायब, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR
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Delhi Cancer Hospital: दिल्ली सरकार के प्रमुख कैंसर अस्पताल डीएससीआई से जीवनरक्षक और बेहद महंगी दवाओं का स्टॉक अचानक गायब हो गया है. कीमोथेरेपी डेकेयर के रेफ्रिजरेटर में सुरक्षित रखे निमोटुजुमैब इंजेक्शन की चार शीशियां रहस्यमय तरीके से साफ हो गईं, जिनकी कीमत बाजार में लाखों रुपये बताई जा रही है.
सरकारी अस्पताल से कैंसर के इंजेक्शन की चार शीशीयां गायब हो गईं. (फोटो – कैनवा)
Delhi Government Cancer Hospital: दिल्ली के सरकारी कैंसर अस्पताल दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) से महंगी दवाओं के गायब होने का मामला सामने आया है. अस्पताल से कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एक इंजेक्शन की कम से कम चार शीशियां गायब होने का आरोप है. इसके अलावा, एंटीवायरल दवा Sofosbuvir की कई यूनिट भी गायब होने की जानकारी सामने आई है. हालांकि, पुलिस में दर्ज शिकायत में इस दवा का जिक्र नहीं किया गया है. अस्पताल प्रशासन की शिकायत पर 12 अक्टूबर को जीटीबी एनक्लेव पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई. मामले की जांच के दौरान गायब दवाओं की संख्या और उनकी कीमत को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं.
टीओआई ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि गायब इंजेक्शन की एक शीशी की कीमत करीब 4 लाख रुपये होने का अनुमान है. वहीं, स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी कीमत 35 हजार से 50 हजार रुपये प्रति शीशी बताई है. अधिकारी के मुताबिक, कीमत कम होने का दावा किए जाने के बावजूद यह दवा काफी महंगी है. फिलहाल, अस्पताल से दवाएं गायब होने के मामले में पुलिस जांच कर रही है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दवाएं कब और किन परिस्थितियों में गायब हुईं तथा इसके पीछे किसकी भूमिका है.
DSCI में एसोसिएट प्रोफेसर और फार्मेसी इंचार्ज डॉ. पंकज त्यागी की शिकायत के अनुसार, कीमो डेकेयर डिपार्टमेंट के रेफ्रिजरेटर से निमोटुज़ुमैब इंजेक्शन की चार शीशियां (vials) गायब हो गई थीं; हर शीशी में 50mg दवा थी. शिकायत के मुताबिक, कीमोथेरेपी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 3 अक्टूबर को ये शीशियां रेफ्रिजरेटर में रखी गई थीं. 5 अक्टूबर को वे गायब मिलीं. शिकायत 9 अक्टूबर को दर्ज कराई गई थी.
निमोटुज़ुमैब एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जिसका इस्तेमाल कैंसर के टारगेटेड इलाज में किया जाता है, जिसमें सिर और गर्दन के कुछ खास तरह के कैंसर भी शामिल हैं. दवा की बाजार कीमत को देखते हुए, इस कथित चोरी ने अस्पताल में दवा रखने और इन्वेंट्री की निगरानी करने वाले सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच करने वाले अभी तक गायब शीशियों की खरीद कीमत का पता नहीं लगा पाए हैं और न ही यह जान पाए हैं कि वे कैसे गायब हुईं.
यह भी साफ नहीं है कि क्या यह कथित गायब होने की घटना किसी संगठित डायवर्जन नेटवर्क से जुड़ी है. सूत्रों ने बताया कि अस्पताल के अंदर हेपेटाइटिस सी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा सोफोसबुविर के भी कथित तौर पर गायब होने की बात सामने आई है. बाजार में 400mg वाली दवा की 28 गोलियों की एक स्ट्रिप की कीमत 10,000 रुपये से 13,000 रुपये के बीच हो सकती है.
यह मामला कैंसर की दवाओं के कथित अवैध व्यापार की दिल्ली पुलिस की व्यापक जांच के बीच सामने आया है. अगस्त में, क्राइम ब्रांच ने चोरी की और नकली कैंसर दवाओं के कारोबार में शामिल एक अंतर-राज्यीय रैकेट में कथित तौर पर शामिल 17 लोगों को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने तब बताया था कि लगभग 9 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की गई थीं, जिनमें गंभीर कैंसर इंजेक्शन की 588 शीशियां और अन्य दवाओं की 3,021 यूनिट्स के साथ-साथ 50 लाख रुपये नकद शामिल थे. यह नेटवर्क कथित तौर पर दिल्ली-NCR, मुंबई, राजस्थान, हैदराबाद, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में काम करता था.