मथुराः छोटे खां का परिवार चार पीढ़ियों से बना रहा रावण, अहिरावण, मेघनाथ का पुतला, डेढ़ महीने में होता है तैयार

मथुराः छोटे खां का परिवार चार पीढ़ियों से बना रहा रावण, अहिरावण, मेघनाथ का पुतला, डेढ़ महीने में होता है तैयार


Last Updated:

Mathura News: मथुरा के छोटे खां का मुस्लिम परिवार चार पीढ़ियों से रामलीला के लिए रावण, मेघनाथ और अहिरावण के पुतले बना रहा है. कृष्ण की नगरी मथुरा में एक मुस्लिम परिवार ऐसा है, जो हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल कायम किए हुए है. यह परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी रावण और उसके परिवार के सदस्यों के पुतले बनाने का कार्य बखूबी से निभा रहा है. इस मुस्लिम परिवार की रोजी रोटी रावण के परिवार से चलती है. रामलीला में रावण वध के लिए तैयार किए जा रहे. पुतलों को बनाने का खर्च करीब डेढ़ लाख रुपए आता है. रावण के परिवार के पुतलों को बनाने में 9 सदस्य लगे हुए हैं.

Top Deals Inside

मथुराः कृष्ण की नगरी मथुरा में एक मुस्लिम परिवार ऐसा है, जो हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल कायम किए हुए है. यह परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी रावण और उसके परिवार के सदस्यों के पुतले बनाने का कार्य बखूबी से निभा रहा है. इस मुस्लिम परिवार की रोजी रोटी रावण के परिवार से चलती है. रामलीला में रावण वध के लिए तैयार किए जा रहे. पुतलों को बनाने का खर्च करीब डेढ़ लाख रुपए आता है. रावण के परिवार के पुतलों को बनाने में 9 सदस्य लगे हुए हैं.

चार पीढ़ियों की परंपरा हो आगे बढ़ा रहे छोटे खां

जहां कुछ लोग हिंदू मुस्लिम की बात कर लोगों को भड़काने का काम करते हैं. वहीं एक मुस्लिम परिवार ऐसा है. जिसकी रोजी-रोटी रावण और उसके परिवार से चलती है. या मुस्लिम परिवार एक नहीं दो नहीं बल्कि चार चार पीढ़ियों से रावण के परिवार के पुतले बनाता चला आ रहा है. इन पुतलों को बनाने में मुस्लिम परिवार के लोगों को एक आनंद की प्राप्ति होती है. मुस्लिम परिवार के मुखिया छोटे खां बताते हैं कि यह काम उनका पुश्तैनी है. उन्होंने बताया कि पीढ़ी दर पीढ़ी हम रावण के पुतले के साथ-साथ अहिरावण और मेघनाथ के पुतले भी रामलीला के लिए बनाते हैं. कहें के रावण के परिवार की वजह से हमारा परिवार चलता है. छोटे खां आगे बताते हुए कहते हैं कि सबसे पहले परदादा अमीर बक्श उसके बाद बाबा अली बक्श फिर पिता मुगल बक्श और अब हम यानी छोटे खां इन पुतलों को बनाने का काम कर रहे हैं.

डेढ़ महीने पहले से शुरू होता है पुतले बनाने का काम

छोटे खांन के बेटे जाहिद ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा कि पुतले बनाने का जो कार्य है, वह कब से शुरू होता है, तो उन्होंने कहा कि रामलीला से डेढ़ महीने पहले हम लोग काम शुरू कर देते हैं. महाविद्या के रामलीला मैदान में पूरा परिवार पुतले बनाने के दरमियान रहता है. पुतले बनाने का कार्य पूरा होने पर परिवार के सभी सदस्य मथुरा के भरतपुर गेट स्थित अपने आवास पर पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि पुतले बनाने के लिए 9 लोग अलग-अलग काम करते हैं. सभी लोगों को अलग-अलग काम बांट दिया गया है। सुबह 7:00 बजे से लेकर रात 9:00 बजे तक हम लोग पुतले तैयार करने में जुटे रहते हैं.

डेढ़ लाख रुपये आता है पुतले बनाने का खर्च

रामलीला के लिए तैयार किए जा रहे रावण, अहिरावण, मेघनाथ, सुलोचना और तारिका के पुतले बनाने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए की धनराशि खर्च होती है. उन्होंने कहा कि हमारी मजदूरी सब काट पीट कर 40 से 50 हजार निकल आती है. डेढ़ महीने के काम में जो आनंद बनाने में आता है उसका हम बखान नहीं कर सकते. हम सौभाग्यशाली हैं कि प्रकांड विद्वान रावण और उसके परिवार के पुतलों को बना रहे हैं.

इतनी होगी पुतलों की ऊंचाई

पुतला कारीगरों ने बताया की इस बार 70 फ़ीट रावण, 60 अहिरावण, 15 फ़ीट मेघनाथ के सीस की ऊंचाई होगी. सुलोचना और तारिका के पुतलों की भी ऊंचाई अलग-अलग रखी जाएगी. पुतला बना रहे छोटे खां टीम से बात करते हुए भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि डेढ़ महीने की कड़ी मेहनत के बाद हम इन पुतलों को तैयार करते हैं. सजाते संवारते हैं. रामलीला के मंचन के दिन जब इन पुतलों को जलाया जाता है, तो मन में पीड़ा होती है. अपने हाथों से बनाए हुए रावण, अहिरावण, मेघनाथ के पुतलों को हम लोग अपनी आंखों के सामने ही जलते हुए देखते हैं.



Source link