फांसी-चिता आंदोलन: जेल में बंद बेटी के लिए छलका मां का दर्द, रोते हुए कहा-दो महीने से शक्ल नहीं देखी


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Pyre and Gallows Movement: पन्ना जिले के मझगांय डैम में ग्रामीण चिता-फांसी आंदोलन कर रहे हैं. इससे पहले प्रशासन की तरफ से कार्रवाई की गई थी और आंदोलन कर रही दिव्या अहिरवार को जेल में बंद कर दिया गया था. अब उनकी मां का वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को झूठे मामलों में फंसाया गया है और दो महीने से उन्होंने अपनी बेटी से शक्ल नहीं देखी है.

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फांसी-चिता आंदोलन: '2 महीने से शक्ल नहीं', जेल में बंद बेटी के लिए मां का दर्दZoom

जेल में बंद बेटी के लिए छलका मां का दर्द

पन्ना जिले के मझगांय डैम में चिता और फांसी आंदोलन 33वें दिन भी जारी है. वहीं आंदोलन को लीड करने वाले अमित भटनागर का आमरण अनशन 18वें दिन में पहुंच गया है. मुआवजे और पुनर्वास की मांग के बीच जेल में बंद आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार की मां का दर्द छलका है. उन्होंने बेटी को झूठे मामलों में फंसाने का आरोप लगाते हुए नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं.

जेल में बंद हैं दिव्या अहिरवार
दिव्या अहिरवार चिता और फांसी आंदोलन से जुड़ी हुई थीं. बाद में पुलिस ने उन्हें जेल में डाल दिया था. पुलिस की तरफ से बताया गया था कि आंदोलन में मारपीट हुई थी और उसके आरोप दिव्या अहिरवार पर लगे थे. अब दिव्या की मां गौरी बाई सामने आई हैं. उन्होंने वीडियो में अपना दर्द बयां किया है. उन्होंने कहा कि गरीब आदिवासियों की आवाज उठाने वाली उनकी बेटी को छतरपुर और पन्ना जिले में हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में फंसाया गया है.

दिव्या की मां ने रोते हुए बताई व्यथा
गौरी बाई ने कहा कि जब उनसे पन्ना मिलने गए थे, तो पुलिस वालों ने कहा कि वह बिजावर गई हैं. उनकी पेशी है, जबकि बिजावर वह मिली नहीं है. उन्होंने रोते हुए कहा कि दो महीने से बिटिया की शक्ल नहीं देखी है. हम ही जानते हैं कि हमने कैसे अपने बच्चे पाले हैं. हमने बहुत ही मेहनत की है. पुलिस वाले, सरकार और नेता कोई लोग गरीब की नहीं सुन रहे हैं. प्रभावित परिवार अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं. उनकी समस्याओं का समाधान कौन करेगा?

18 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे अमित भटनागर
दूसरी तरफ अमित भटनागर पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन पर हैं. वह मझगांय और रूंझ बांध परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, न्याय और सम्मानजनक पुनर्वास देने की मांग कर रहे हैं. इस दौरान ध्यान आकर्षित करने के लिए वह अलग-अलग हथकंडे अपना चुके है. उनका कहना है कि अभी तक प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी है.

उन्होंने मांग की है कि आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार, हिसाबी राजपूत, इंद्रपाल आदिवासी और कमलेश प्रजापति की रिहाई की जाए. इसके अलावा प्रभावित परिवारों की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाए.

(रिपोर्ट-गनेश प्रसाद विश्वकर्मा)



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