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Russia wants India-Pakistan Relation: जब भी पाकिस्तान के साथ कोई देश अपने रिश्ते गहरे करता है, तो स्वाभाविक तौर पर भारत को इस पर नजर रखनी पड़ती है. जब रूस और पाकिस्तान के समीकरण बदले हुए दिखें, तो भारत का चौकन्ना होना बनता है. हालांकि सवाल ये भी है कि क्या रूस, भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की सोच रहा है?
रूसी गृहमंत्री का पाकिस्तान दौरा.
रूस भारत का सदाबहार यार है. ऐसे में उसकी पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियां दक्षिण एशिया की कूटनीति में नए सवाल खड़े कर रही है. रूस के गृहमंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव चार दिवसीय दौरे पाकिस्तान पर हैं और ये कूटनीतिक हलचल पैदा करने वाला दौरा है. हो भी क्यों न, किसी रूसी गृहमंत्री की ये पाकिस्तान की पहली यात्रा है. ऐसे समय में जब भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बना हुआ है, मॉस्को और इस्लामाबाद के बीच बढ़ता संपर्क क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
इन सबके बीच बड़ा सवाल यही है कि क्या रूस पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद की कोई नई राह खोल सकता है? फिलहाल, इस दौरे को सीधे तौर पर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पहल कहना जल्दबाजी होगी लेकिन संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है. पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की जानकारी दी है, लेकिन भारत-पाकिस्तान वार्ता को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
क्यों पाकिस्तान पहुंचे रूसी गृहमंत्री?
रूस और पाकिस्तान की नजदीकी के पीछे आर्थिक और रणनीतिक हित भी हैं. यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस ने अपने ऊर्जा कारोबार के लिए नए बाजार तलाशे, जबकि पाकिस्तान ने आयात खर्च कम करने के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद शुरू की. वर्ष 2023 में पाकिस्तान ने रूसी कच्चे तेल को अपने ऊर्जा क्षेत्र में शामिल किया और दोनों देश 2030 तक आर्थिक सहयोग बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रहे हैं. रूस और पाकिस्तान के बीच अफगानिस्तान में आतंकवाद, क्षेत्रीय स्थिरता और संपर्क व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बातचीत होती रही है, लेकिन यहां पर पेंच फंस जाता है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान पर आतंक फैलाने का आरोप लगाता रहता है, वहीं दूसरी ओर रूस ने 2025 में तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता दी थी. ऐसे मतभेद दिखाते हैं कि दोनों देशों की बढ़ती नजदीकी के बावजूद चुनौतियां बनी हुई हैं.
क्या भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ बनेगा रूस?
ये सवाल इसलिए उठता है क्योंकि रूस पहले ऐसा कर चुका है. जब चीन और भारत के बीच रिश्ते तल्ख हो गए थे, तो खुद रूसी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच वार्ता बहाली कराने का काम किया था. हालांकि, भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने के लिए रूस कोई नई पहल करेगा या नहीं, इस यात्रा के दौरान ऐसा कोई संकेत आधिकारिक तौर पर नहीं दिया गया है. भारत और रूस के संबंध लंबे समय से रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर आधारित रहे हैं. ऐसे में मॉस्को के लिए पाकिस्तान से रिश्ते बढ़ाना अपने आप में भारत से दूरी बनाने का संकेत नहीं है. रूस दोनों देशों के साथ अपने हितों के अनुसार संबंध विकसित करना चाहता है. गृहमंत्री का दौरा मुख्य रूप से द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग पर केंद्रित है, किसी तरह के समझौते की भी घोषणा नहीं की गई है.