कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF से पैसा निकालने की सोच रहे हैं, तो टैक्स से जुड़ा एक जरूरी बदलाव जान लीजिए. अब पीएफ निकासी पर TDS यानी सोर्स पर टैक्स कटौती से छूट पाने के लिए पहले की तरह फॉर्म 15G और 15H के बीच सेलेक्शन नहीं करना होगा. 2026-27 से इन दोनों की जगह फॉर्म 121 का इस्तेमाल किया जाएगा. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने भी अपने सदस्यों को इस बदलाव की जानकारी दी है. नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए हैं.
इस बदलाव का मकसद टैक्स से जुड़े प्रोसेस को आसान बनाना है. पहले 60 साल से कम उम्र के पात्र लोगों को फॉर्म 15G और सीनियर सिटीजन्स को फॉर्म 15H भरना पड़ता था. अब उम्र के आधार पर अलग-अलग फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पीएफ से निकाली गई हर रकम टैक्स फ्री हो जाएगी. फॉर्म 121 का फायदा केवल तय शर्तें पूरी करने वाले लोगों को मिलेगा. इसलिए पैसा निकालने से पहले यह समझना जरूरी है कि यह फॉर्म किसके लिए है और TDS कब कट सकता है.
क्या है फॉर्म 121 और किसे मिलेगा फायदा?
नए आयकर कानून के तहत फॉर्म 121 को पुराने फॉर्म 15G और 15H की जगह लाया गया है. यह एक घोषणा पत्र है, जिसके जरिए पात्र व्यक्ति बता सकता है कि संबंधित वित्त वर्ष में उसकी अनुमानित कुल आय पर टैक्स की देनदारी शून्य है. अगर आप इस शर्त को पूरा करते हैं, तो फॉर्म 121 जमा करके पीएफ विड्राल पर TDS कटने से बच सकते हैं. यह फॉर्म केवल एक टैक्स वर्ष के लिए मान्य होगा. यानी अगले साल भी इसका फायदा लेना है, तो नई घोषणा देनी होगी.
ध्यान रखें कि फॉर्म जमा करने से पीएफ निकासी अपने आप टैक्स फ्री नहीं होती. अंतिम टैक्स देनदारी आपकी आय और लागू नियमों पर निर्भर करेगी.
पीपीएफ खाते पर मेच्योरिटी की अवधि 15 साल की होती है.
पैन कार्ड में गलती हुई तो कट सकता है ज्यादा TDS
फॉर्म 121 जमा करने के लिए वैध पैन कार्ड होना जरूरी है. अगर पैन उपलब्ध नहीं है या गलत दर्ज किया गया है, तो आपकी घोषणा मान्य नहीं हो सकती. ऐसी स्थिति में नियमों के मुताबिक ज्यादा दर से TDS काटा जा सकता है.
इसलिए पीएफ निकालने से पहले अपने पैन कार्ड की जानकारी चेक कर लें. EPFO रिकॉर्ड में दर्ज नाम और पैन की जानकारी भी सही होनी चाहिए. इससे आवेदन के समय परेशानी होने और जरूरत से ज्यादा टैक्स कटने का रिस्क कम हो सकता है.
पीएफ निकालने पर कब कटता है TDS?
पीएफ से पैसा निकालने पर हर बार TDS नहीं कटता. आम तौर पर अगर कर्मचारी ने लगातार पांच साल की सर्विस पूरी होने से पहले पीएफ निकाला है, तो टैक्स के नियम लागू हो सकते हैं. तय शर्तों के तहत 50,000 रुपये से अधिक की निकासी पर 10% TDS काटा जा सकता है.
हालांकि, कुछ स्थितियों में नियम अलग होते हैं. जैसे- नौकरी छूटने या दूसरी नौकरी में पीएफ खाता ट्रांसफर करने जैसी परिस्थितियों में अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं. इसलिए निकासी से पहले अपनी स्थिति के अनुसार नियम समझना जरूरी है.
पीएफ का पैसा जरूरत के समय बड़ी आर्थिक मदद देता है.
अगर आपकी अनुमानित कुल आय पर संबंधित वर्ष में टैक्स देनदारी शून्य है और आप बाकी शर्तें पूरी करते हैं, तो फॉर्म 121 TDS कटने से बचने में मदद कर सकता है.
पुराने फॉर्म 15G और 15H में क्या बदलाव हुआ?
पहले पात्र लोग बैंक ब्याज, किराये, बीमा कमीशन और कुछ अन्य आय पर TDS से राहत पाने के लिए फॉर्म 15G या 15H जमा कर सकते थे. अब नए नियमों के तहत इनकी जगह फॉर्म 121 लाया गया है. इस बदलाव से पात्र लोगों को उम्र के हिसाब से अलग फॉर्म चुनने की जरूरत नहीं रहेगी. लेकिन फॉर्म भरने से पहले यह जांचना जरूरी है कि आप इसकी शर्तें पूरी करते हैं या नहीं.
ध्यान रखें कि पीएफ निकासी पर TDS से छूट पाने की प्रक्रिया अब आसान हुई है, लेकिन हर कर्मचारी को इसका फायदा नहीं मिलेगा. निकासी से पहले पैन की जानकारी सही रखें, अपनी अनुमानित सालाना आय जांचें और फॉर्म 121 की पात्रता समझें. इससे टैक्स कटौती को लेकर सही फैसला लेने में मदद मिलेगी.