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UP Election 2027: मुस्लिम मंच का कहना है कि यूपी का मुसलमान अब समझ और जाग चुका है. अब वह किसी बहकावे में नहीं आएगा. 2027 में किसकी सरकार बनानी है यह हमें पता है. आइए जानते हैं आखिर मुस्लिम किसका साथ देने जा रहे हैं.
डॉक्टर मुमताज आलम रिजवी.
प्रयागराज : यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जहां राजनीतिक दलों की जोड़-तोड़ शुरू हो गई है. वहीं सभी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से वोटों का ध्रुवीकरण करने में जुट गए हैं. चुनाव से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने जहां 80-20 की बात कही है. तो वहीं एआईएमआइईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने 99 और एक का भी दावा किया है. जबकि समाजवादी पार्टी पहले से ही मुस्लिम वोट बैंक को अपने पाले में मानकर चल रही है. मगर, इस बीच भारतीय मुस्लिम मंच ने बता दिया है कि वह किसका साथ देने वाले हैं.
दीदी को मिला साथ
दरअसल, मुस्लिम मंच पूरी तरह से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के समर्थन में उतर आया है. मुसलमान से अपील की है कि बसपा को वोट देकर पांचवीं बार मायावती को सूबे का मुख्यमंत्री बनाएं. भारतीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर मुमताज आलम रिजवी ने कहा है कि प्रदेश की जनता ने समाजवादी पार्टी और बीजेपी की सरकारों को देख लिया है. बीजेपी सरकार में केवल बुलेट और बुलडोजर का शोर और जोर है. दलितों और मुसलमानों के घरों पर गैर कानूनी तरीके से बुलडोजर चलाए जा रहे हैं. संविधान और अदालत को ताक पर रखकर फर्जी मुठभेड़ की जा रही है.
भाजपा-सपा पर लगाया आरोप
उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार में लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह से पटरी से उतर गया है. बीजेपी ने घर बसाने का वादा किया था लेकिन घर उजाड़ने का काम हो रहा है. उन्होंने कहा है कि सपा की अखिलेश यादव सरकार में केवल दंगे हुए. मुसलमानों ने बहुत ही अरमान से मुल्ला मुलायम सिंह यादव की सरकार बनाने का काम किया था. हालांकि, 2012 में मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बना दिया, जिनके पास सरकार चलाने का कोई तजुर्बा नहीं था. इससे समाजवादी पार्टी की सरकार में साढ़े चार मुख्यमंत्री प्रदेश को चला रहे थे, जिसका नतीजा यह हुआ कि हर तरफ दंगे हो रहे थे और मुसलमानों का उत्पीड़न हुआ. मुजफ्फरनगर का दंगा इसका जीता जागता उदाहरण है.
उन्होंने कहा कि सपा के नेता सैफई में नाच गाना देखने में मस्त थे. एखलाक अहमद से लेकर जिया उल हक तक का कत्ल होता था. लेकिन सरकारें कुछ नहीं करती थीं. उन्होंने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा है कि मुसलमानों को अपना वोट बैंक समझने वाले नेता मुसलमानों के हित में किए गए पांच काम भी नहीं गिना सकते हैं. आलम रिजवी ने कहा है कि इन दोनों सरकारों से पहले 2007 से 2012 तक यूपी में बसपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार रही है. बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार में बहन मायावती मुख्यमंत्री थी. बसपा सरकार में न बुलेट न बुलडोजर न दंगा न फसाद. जितने माफिया और गुंडे थे बिना भेदभाव के सब अंदर हो गए थे. प्रशासन भी इमानदारी से काम करता था और लोगों में सरकार का खौफ था. ऐसा लॉ एंड ऑर्डर उत्तर प्रदेश की जनता आज भी याद करती है.
मायावती की तारीफ
उन्होंने आगे कहा कि बसपा सरकार में मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने मुसलमानों के हित में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं. उन्होंने बसपा शासन काल के मुसलमानों के हित में किए गए 100 कार्यों को गिनाते हुए कहा है कि बसपा सरकार में ही मदरसों को अनुदानित कर उन्हें सुदृढ़ किया गया. मायावती की सरकार में 350 मदरसों को ऐडेड किया गया. उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ. हज हाउस का निर्माण किया गया. इसके अलावा भी बसपा शासन में मुसलमानों का उत्पीड़न नहीं हुआ.
भारतीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय संयोजक ने यह भी कहा कि यूपी का मुसलमान अब समझ और जाग चुका है. अब वह किसी बहकावे में नहीं आएगा 2027 में यूपी में बहन जी की सरकार बनाने जा रहा है. उन्होंने मुसलमानों से अपील की है कि 2027 में एक बार फिर से बहुजन समाजवादी पार्टी को वोट देकर बहन मायावती को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाए. ताकि सूबे में मुसलमानों का उत्पीड़न बंद हो सके.