12 किलो का एक गन्ना! सीतामढ़ी के किसान ने PB-95 किस्म से बनाया रिकॉर्ड, गन्ना विभाग ने किया सम्मानित

12 किलो का एक गन्ना! सीतामढ़ी के किसान ने PB-95 किस्म से बनाया रिकॉर्ड, गन्ना विभाग ने किया सम्मानित


सीतामढ़ी. कृषि क्षेत्र में नए प्रयोग और आधुनिक तकनीक का समावेश किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. ऐसी ही एक सफलता की कहानी सामने आई है, जहां पंजाब से लाई गई गन्ने की विशेष किस्म ‘PB-95’ ने उपज के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. आमतौर पर गन्ने का औसतन वजन 2 से 3 किलोग्राम तक होता है, लेकिन इस तकनीक और बेहतरीन देखभाल के कारण किसान के खेत में एक-एक गन्ने का वजन 8 से 10 किलोग्राम और अधिकतम 11 से 12 किलोग्राम तक दर्ज किया गया.

कृषि सलाहकार विनय कुमार सिंह द्वारा की गई इस उन्नत खेती को देखकर न केवल स्थानीय किसान हैरान हैं, बल्कि राज्य के कृषि विभाग ने भी इस उपलब्धि को सराहा है. गन्ने का भारी वजन और बेहतर सेहत इस किस्म को पारंपरिक फसलों की तुलना में आकर्षक और लाभदायक विकल्प बनाते हैं.

गन्ना विभाग से मिला राज्य स्तरीय सम्मान और पहचान
किसान विनय कुमार सिंह बताते हैं कि सामान्य तौर पर PB-95 प्रजाति के गन्ने का वजन 4 से 6 किलो तक ही होता है. हालांकि, उनके खेत में ट्रायल के रूप में ऐसे तीन गन्ने प्राप्त हुए, जिनका वजन इससे अधिक था. इससे पता चला कि PB-95 किस्म के गन्ने की सही देखभाल से उसका वजन 8 से 10 किलो तक किया जा सकता है. गन्ने के अत्यधिक वजन और असाधारण गुणवत्ता के कारण यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया.

दूसरे किसानों को मिली प्रेरणा
जब 11 से 12 किलोग्राम वजन वाले इस गन्ने को कृषि प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया, तो इसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर इसे पूरे बिहार राज्य में प्रथम स्थान मिला. इस उल्लेखनीय सफलता के लिए गन्ना विभाग द्वारा कृषि सलाहकार विनय कुमार सिंह को पिछले वर्ष विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. इस सम्मान ने क्षेत्र के अन्य किसानों के भीतर भी पारंपरिक कृषि विधियों को छोड़कर वैज्ञानिक और उन्नत किस्मों को अपनाने का नया उत्साह भर दिया है.

अक्टूबर बुआई और इंटर-क्रॉपिंग तकनीक का असर
गन्ने की इस रिकॉर्ड तोड़ पैदावार के पीछे वैज्ञानिक बुआई और सटीक प्रबंधन का बहुत बड़ा योगदान है. गन्ने की बुआई साल में दो बार (अक्टूबर और फरवरी) की जा सकती है, लेकिन अक्टूबर महीने की बुआई सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इससे फसल को विकसित होने के लिए अधिक समय मिलता है.

लगभग 3 एकड़ में फैले इस खेत में पौधों के बीच 5-5 फीट की दूरी रखी गई थी. इस प्लॉट में पहले पपीते की फसल लगी हुई थी और उसी के बीच में गन्ने के पौधे लगाए गए थे. इस प्रकार सह-फसली (इंटर-क्रॉपिंग) मॉडल और पर्याप्त दूरी के कारण पौधों को भरपूर सूर्य का प्रकाश और पोषण मिला, जिससे गन्ने का विकास तेजी से हुआ.

बीमारी मुक्त फसल से प्रति एकड़ 500 क्विंटल का बंपर उत्पादन
PB-95 किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी फसल पूरी तरह स्वस्थ रहती है और इसमें किसी भी प्रकार की बीमारी लगने का खतरा बहुत कम होता है. बीमारियों से सुरक्षित रहने के कारण पौधे का पूर्ण विकास होता है और गन्ना अंदर से बेहद ठोस तथा वजनदार बनता है.

सही दूरी, वैज्ञानिक खाद-प्रबंधन और समय पर सिंचाई के बल पर इस तकनीक से प्रति एकड़ लगभग 500 क्विंटल तक का रिकॉर्ड उत्पादन प्राप्त हुआ है. गन्ने के साथ-साथ केला और पपीता जैसी फसलों का प्रबंधन करने वाले किसानों के लिए यह मॉडल एक मिसाल बन चुका है, जो यह साबित करता है कि सही किस्म के चुनाव और आधुनिक सोच से खेती को बेहद मुनाफेदार व्यवसाय बनाया जा सकता है.



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