वैशाली नाव हादसे में एक ही परिवार के 7 बच्चों की मौत, अब तक निकाले गए 13 शव


Last Updated:

बिहार के वैशाली में नाव पलटने से कई बच्चों की मौत हो गई है. हादसे में 13 बच्चों के शव अभी तक निकाले गए हैं, जिनमें एक ही परिवार के 7 बच्चे शामिल हैं. जिस परिवार के 7 बच्चों की मौत हुई है उन पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतक बच्चों के परिजनों को आर्थिक मदद का ऐलान भी कर दिया है.

Top Deals Inside

वैशाली नाव हादसे में एक ही परिवार के 7 बच्चों की मौत, अब तक निकाले गए 13 शवZoom

वैशाली: बिहार के वैशाली में हुए नाव हादसे में कई बच्चों की मौत हो गई है. जानकारी के मुताबिक, नाव पलटने से 20 से ज्यादा बच्चे डूब गए हैं. इनमें से 13 बच्चों का शव अभी तक निकाला गया है. इस झकझोर देने वाली घटना में एक ही परिवार के 7 बच्चों की मौत हो गई है. रामप्रवेश राय उर्फ राजा राय के परिवार के 7 बच्चे इस हादसे का शिकार हो गए. इस घटना से परिवार सदमे में हैं. घटना से पूरे गांव में चीख-पुकार मची हुई है.

शादियों और भोज का वो माहौल, अचानक उजड़कर चीख-पुकार में बदल गया. बिहार के वैशाली में मंगलवार की शाम एक ऐसी तबाही आई, जिसने हर किसी की रूह कंपा दी. जरा सोचिए, हंसते-खेलते 15-20 बच्चे एक छोटी सी नाव पर सवार होकर दावत खाने जा रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि मौत उनका इंतजार कर रही है.

आखिर इतनी बड़ी त्रासदी हुई क्यों?
इसकी वजह बनी ‘ओवरलोडिंग और जानलेवा लापरवाही’. क्षमता से तीन गुना ज्यादा वजन, बिना किसी सेफ्टी जैकेट के उफनती पानी की धार और एक पल का असंतुलन. नाव पलटी और मासूमों की चीखें सन्नाटे में तब्दील हो गईं. देखते ही देखते 14 जिंदगियां पानी में समा गईं.

वैशाली बोट पलटने के हादसे की वजह क्‍या?
शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयानों से सामने आया है कि यह दर्दनाक हादसा गंभीर लापरवाही और ओवरलोडिंग के कारण हुआ. एक स्थानीय दावत में शामिल होने के लिए करीब 15 से 20 बच्चे एक छोटी सी नाव पर सवार होकर ढाब (जलभराव वाले क्षेत्र) के दूसरी ओर जा रहे थे.

क्षमता से अधिक भार: एक छोटी नाव पर क्षमता से अधिक बच्चों के सवार होने के कारण नाव बीच मझधार में जाकर असंतुलित हो गई और पलट गई.

तैरने की क्षमता का अभाव: नाव पलटने के बाद पानी की गहराई अधिक होने और बच्चों के नासमझ होने के कारण वे खुद को संभाल नहीं सके और डूब गए.

सुरक्षा मानकों की अनदेखी:
इस रूट पर लगातार सुरक्षा उपायों और लाइफ जैकेट की कमी पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के इस तरह की जोखिम भरी नावें चलाई जा रही हैं.



Source link