बिहार कृषि यूनिवर्सिटी कर रहा है ऐसा शोध, मखाना किसानों को होगा फायदा

बिहार कृषि यूनिवर्सिटी कर रहा है ऐसा शोध, मखाना किसानों को होगा फायदा


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बिहार कृषि यूनिवर्सिटी कर रहा है ऐसा शोध, मखाना किसानों को होगा फायदा

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मखाना किसानों को अभी सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब मखाने के दाने छोटे साइज के रह जाते हैं. इससे उन्हें आधी कीमत मिलती है. यानी उनकी पूरी मेहनत बर्बाद चली जाती है. कई बार किसानों की मेहनत और लागत भी नहीं निकलती है. अगर सभी दाने बढ़िया क्वालिटी के होंगे तो मखाना 600 रुपये की जगह दोगुने दाम में 1200 रुपये किलो में बिकेगा. इससे किसानों को फायदा होगा.

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भागलपुर: बिहार में मखाना की पैदावार और मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन किसानों को अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह जो मानी जा रही है वह इसके दानों का छोटा-बड़ा होना है. छोटे दाने वाला मखाना 600 रुपये प्रति किलो से भी कम दाम में बिकता है वहीं उच्च क्वालिटी वाला मखाना दाना 1200 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है. अब दाना चाहे छोटा तैयार हो या बड़ा किसान को मेहनत और लागत तो बराबर ही लगनी है. अगर दाना छोटा हो गया तो किसान की मेहनत बर्बाद और सही दाने निकले तो फिर किसान को उसकी मेहनत का फल भी मिल जाएगा. तो ये छोटे दानों की समस्या से निजात दिलाने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने कमर कस ली है. मखाना की खेती में छोटे दानों की अधिकता के कारण किसानों होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बीज नियंत्रण का उपाय अपनाया जाएगा.

एक समान होंगे मखाने के दाने
बीएयू के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने बताया कि मखाना को जीआई टैग दिलाने के बाद इसकी मांग बढ़ी, लेकिन उत्पादन गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है. वर्तमान में छोटे दानों का बाजार मूल्य 600 रुपये प्रति किलो से कम है वहीं उच्च गुणवत्ता वाले दाने 1200 रुपये में बिकते हैं. छोटे-बड़े दाने की कीमत में इतना भारी अंतर है जबकि किसान को इन्हें तैयार करने में मेहनत उतनी ही लगती है. ऐसे में अगर दाने छोटे रह गए तो किसान को अपनी मेहनत का आधा पैसा मिलता है. बीएयू मखाना के बीजों पर शोध कर रहा है ताकि सभी दाने एक समान आकार और उच्च गुणवत्ता के हों. यह कदम किसानों के मुनाफे को दोगुना करने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा. इसके साथ ही विश्वविद्यालय मैपिंग के जरिए उन क्षेत्रों की पहचान कर रहा है जहां पानी जमा होने की समस्या है, ताकि मखाना की खेती को वहां बढ़ावा दिया जा सके. इससे बिहार में उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है.

कुछ महीने पहले मखाना की कीमत 800 रुपये थी जो अब 1200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. धीरे धोरे इसका दाम और बढ़ता जा रहा है. खासकर त्योहार आते ही इसके दाम आसमान छूने लगते हैं इससे किसानों को लाभ भी होता है.

अधिकतम जगहों पर होगी मखाने की खेती
बता दें कि वर्तमान में किसान जो बीज लगाते हैं उसमें छोटे दाने निकलते हैं जिनकी कीमत मार्केट में 600 रुपये भी नहीं मिल पाती है, लेकिन जो मखाना उच्चतम किस्म का है उसकी कीमत 1200 रुपये से अधिक ही मिलती है. खास बात यह है कि दोनों में मेहनत एक ही है. कुलपति ने कहा कि यह शोध सफल हुआ तो किसानों की आय में क्रांतिकारी बदलाव आएगा. बीएयू की यह पहल न सिर्फ मखाना उत्पादन को बढ़ाएगी, बल्कि बिहार के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी. किसान समुदाय में इस पहल को लेकर उत्साह है और वे बेहतर भविष्य की उम्मीद लगाए हैं. उन्होंने बताया कि जब एक तरह के मखाने होंगे तो उसमें लेबर लागत भी कम होगी. दाम अत्यधिक मिलेगा. ऐसे में किसानों को काफी फायदा मिलेगा.



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