नवरात्रि में अखंड ज्योति बुझ जाए तो घबराएं नहीं, आचार्य ने बताया आसान उपाय
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Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है. मान्यता है कि 9 दिनों तक अखंड ज्योति जलाने से लोगों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं लेकिन इन 9 दिनों के दौरान किसी कारणवश ज्योति बुझ जाए, तो क्या करें?
उज्जैन. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. इन 9 दिनों में भक्त माता के 9 स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. माता को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु उपवास रखते हैं और मंत्र जाप, तपस्या और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. कई घरों और मंदिरों में 9 दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है. मान्यता है कि अखंड ज्योति का विशेष महत्व होता है. ऐसे में अगर किसी वजह से ज्योति बुझ जाए, तो क्या करना चाहिए. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने इस स्थिति में अपनाए जाने वाले उपाय बताए हैं.
अखंड दीपक का महत्व
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. मान्यता है कि 9 दिनों तक लगातार जलने वाला दीपक मां दुर्गा के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है. इसकी पवित्र लौ सकारात्मक ऊर्जा, सुख और खुशहाली का संदेश देती है. धार्मिक विश्वास के अनुसार, अखंड दीप प्रज्वलित करने से घर में नकारात्मकता दूर होती है और सुख-शांति का वातावरण बनता है. दीपक की रोशनी भक्तों के मन में विश्वास जगाती है और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने के लिए साहस, धैर्य और आत्मबल प्रदान करने का प्रतीक मानी जाती है.
पूजा के दौरान ज्योति बुझ जाए तो क्या करें?
आचार्य के अनुसार, आप लंबी बाती वाली ज्योति जलाते हैं और बीच में वह बुझ जाती है, तो अधजली बाती को हटाकर नई बाती लगाकर ही दीप जलाएं, वरना अशुभ प्रभाव पड़ेगा. हालांकि इसके पहले एक छोटा दीपक उसी स्थान पर जला लें. इसके अलावा यदि अखंड दीपक की बाती बदलनी हो, तो भी पास में एक छोटा दीया जला लें, फिर अखंड दीपक में नई बाती और घी भरकर उसे दोबारा जला सकते हैं. छोटे दीये को जलने दें. उसके बुझने के बाद हटा लें.
जरूर करें मंत्र का जाप
दीये की बाती बदलने के बाद जिस मंत्र का जाप करना चाहिए, वह है-
ऊं जयंती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति जनार्दन:, दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते।।