ऊपर पर्थला चौक तो नीचे बनेगा 6 लेन अंडरपास, घंटों नहीं मिनटों में पहुंचोगे ग्रेटर नोएडा वेस्ट


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Greater Noida Infrastructure News: ग्रेटर नोएडा के पर्थला चौक के नीचे छह लेन का अंडरपास बनाने की योजना तैयार की गई है. करीब 710 मीटर लंबे इस अंडरपास पर लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इसके बनने से एफएनजी कॉरिडोर पर गाड़ियों की आवाजाही आसान हो सकती है.

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ऊपर पर्थला चौक तो नीचे बनेगा 6 लेन अंडरपास, मिनटों में पूरा होगा सफर Zoom

80 करोड़ की लागत से बनेगा अंडरपास (AI Image)

ग्रेटर नोएडा: यूपी के ग्रेटर नोएडा में पर्थला चौक ऐसा रास्ता है, जहां से हर दिन बड़ी संख्या में गाड़ियां गुजरती हैं. यहां से लोग गाजियाबाद, एनएच-9, मेरठ एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की तरफ जाते हैं. इसके अलावा आसपास के सेक्टरों में रहने वाले लोगों की आवाजाही भी इसी रास्ते से होती है. सुबह दफ्तर जाने और शाम को घर लौटने के समय गाड़ियों की संख्या बढ़ जाती है.

ऐसे में चौराहे पर वाहनों का दबाव बढ़ता है और लोगों को जाम में फंसना पड़ता है. इस परेशानी को कम करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने सिग्नेचर ब्रिज के नीचे अंडरपास बनाने की योजना तैयार की है. इसका मकसद वाहनों को चौराहे पर बार-बार रुकने से बचाना और एफएनजी कॉरिडोर पर यातायात को बेहतर बनाना है.

प्रस्तावित अंडरपास करीब 710 मीटर लंबा होगा. इसमें कुल छह लेन होंगी, यानी आने-जाने वाले वाहनों के लिए तीन-तीन लेन का इंतजाम किया जाएगा. योजना के मुताबिक, इसमें करीब 110 मीटर लंबा आरसीसी बॉक्स बनाया जाएगा. इसके अलावा 20 मीटर का खुला हिस्सा और दोनों तरफ 280-280 मीटर लंबे रास्ते होंगे, जो अंडरपास को मौजूदा सड़क से जोड़ेंगे. इस तरह वाहन चौराहे के नीचे से निकल सकेंगे और ऊपर की सड़क पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी. हालांकि, जाम से कितनी राहत मिलेगी, यह आसपास की सड़कों और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी निर्भर करेगा.

बारिश में पानी भरने से बचाने की भी तैयारी
नोएडा में बारिश के दौरान अंडरपास में पानी भरना बड़ी परेशानी बन सकता है. इसे ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में पानी निकालने के लिए संप और पंपिंग सिस्टम की व्यवस्था प्रस्तावित है. इससे बारिश का पानी जमा होने पर उसे बाहर निकालने में मदद मिलेगी. निर्माण के दौरान आसपास की जमीन और मौजूदा ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए डायफ्राम वॉल तकनीक अपनाने की भी योजना है. इस तकनीक से खुदाई के समय मिट्टी को सहारा देने में मदद मिलती है. अंडरपास का डिजाइन तैयार हो चुका है और इसकी तकनीकी जांच आईआईटी दिल्ली से कराई जा रही है.

डीपीआर के बाद आगे बढ़ेगा काम
परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जा रही है. रिपोर्ट मिलने के बाद इसे नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी. निर्माण पूरा करने के लिए करीब 18 महीने का समय तय किया गया है. अंडरपास बनने से सेक्टर- 66, 71, 121 और 122 के साथ छिजारसी और किसान चौक के आसपास रहने वाले लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है. एफएनजी कॉरिडोर के जरिए आने-जाने वाले वाहन चालकों के लिए भी रास्ता आसान हो सकता है. भविष्य में फरीदाबाद की ओर कनेक्टिविटी बढ़ने पर इस मार्ग की अहमियत और बढ़ सकती है.



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