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US Court Warning to Donald trump: अमेरिकी कोर्ट ने एक बार फिर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका दिया है. कोर्ट के जज ने साफ तौर पर कहा है कि जनता के पैसों का इस्तेमाल सरकार अपने प्रचार में नहीं कर सकती है. कोर्ट ने तत्काल ऐसे प्रसारणों पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं.
डोनाल्ड ट्रंप को फिर मिला कोर्ट से झटका. (रॉयटर्स)
वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को एक बार फिर से कोर्ट ने झटका दिया है. दरअसल कोर्ट ने सरकारी पैसे से चलाए जा रहे विवादित विज्ञापनों के मामले में ट्रंप प्रशासन को आदेश दिया है कि तत्काल ही इस तरह से विज्ञापनों का प्रसारण रोक दिया जाए. अदालत का कहना है कि मामले में कानूनी चुनौती पर सुनवाई जारी रहने के दौरान सरकार जनता के पैसे से इस अभियान को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता.
संघीय जज जेनिफर रोचोन ने सरकारी निगरानी करने वाले नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन कॉमन कॉज के नेतृत्व वाले समूह की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया. संगठन ने आरोप लगाया था कि विज्ञापनों के जरिये राष्ट्रपति की नीतियों और राजनीतिक एजेंडे का प्रचार किया जा रहा है, जबकि इसके लिए सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया. अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में दलील दी थी कि मुकदमा खारिज कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि विज्ञापनों का प्रसारण 11 अक्तूबर की रात तक समाप्त होने वाला था लेकिन अदालत ने इस तर्क को नहीं माना. जज ने 11 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 45 मिनट से विज्ञापनों का आगे प्रसारण रोकने का आदेश दिया.
कब तक लगी रहेगी रोक?
यह रोक शुरुआती तौर पर दो सप्ताह के लिए लगाई गई है. इस दौरान प्रशासन नए विज्ञापन स्लॉट नहीं खरीद सकेगा, अगर सरकार दोबारा करदाताओं के पैसे से अभियान चलाना चाहती है तो उसे प्रतिबंध हटाने के लिए अदालत की अनुमति लेनी होगी. अदालत में प्रशासन की ओर से दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, इस अभियान पर अब तक करीब 1.9 करोड़ डॉलर खर्च किए जा चुके हैं. इसके लिए निर्धारित कुल बजट 2 करोड़ डॉलर था. यह राशि अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा एजेंसी के फंड से आई थी. गृह सुरक्षा विभाग की वरिष्ठ अधिकारी हॉली मेरिंगर ने अपने शपथपत्र में बताया कि विज्ञापन एजेंसी ने 11 अक्टूबर तक प्रसारण के लिए स्लॉट खरीदे थे. विभाग ने कंपनी को इसके बाद नई खरीदारी नहीं करने का निर्देश दिया था. प्रशासन का कहना है कि धन का इस्तेमाल पहले से तैयार वीडियो प्रसारित करने में हुआ, न कि उन्हें बनाने में.
क्यों उठे प्रचार अभियान पर सवाल?
प्रशासन ने कम से कम 13 विज्ञापन तैयार कराए थे. इनमें से कुछ सीबीएस, सीएनएन, फॉक्स न्यूज और एमएस नाउ जैसे प्रमुख अमेरिकी टीवी नेटवर्क पर प्रसारित हुए. सरकार ने इन्हें सीमा सुरक्षा और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के प्रयासों की जानकारी देने वाले जनहित विज्ञापन बताया. वहीं कॉमन कॉज और अन्य आलोचकों का आरोप है कि ये विज्ञापन जनहित की जानकारी देने के बजाय राष्ट्रपति और उनके राजनीतिक एजेंडे का प्रचार कर रहे थे. अब अदालत में इस बात पर आगे विचार होगा कि सरकारी धन से चलाया गया यह अभियान कानूनी सीमाओं के अंदर था या नहीं.