Success Story: खंडवा जिले के मलगांव गांव के रहने वाले राकेश पटेल ने एक गाय से दूध का कारोबार शुरू किया था. दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने खेती संभाली और धीरे-धीरे पशुपालन को भी अपने काम का हिस्सा बना लिया. आज उनके यहां 7 गाय और 3 बछड़े हैं, जबकि उनके डेयरी फार्म में जर्सी, एचएफ, गिर और साहीवाल जैसी अलग-अलग नस्लों की गायें हैं. राकेश खेती के साथ दूध उत्पादन भी कर रहे हैं. इस काम में उनके पिता और बेटे भी हाथ बंटाते हैं. परिवार मिलकर गायों की देखभाल करता है और इसी मेहनत से उन्होंने अपने डेयरी कारोबार को आगे बढ़ाया है.
एक गाय से शुरू किया था सफर
राकेश पटेल ने दसवीं पास करने के बाद खेती की जिम्मेदारी संभाली. खेती के साथ उन्होंने गाय पालना भी शुरू किया. शुरुआत एक गाय से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे पशुपालन के प्रति लगाव बढ़ा और उन्होंने गायों की संख्या बढ़ाई. पहले वे देसी गाय पालते थे, बाद में दूसरी नस्लों की गायें भी अपने फार्म में शामिल कीं. आज वे गायों से मिलने वाला दूध डेयरी में देते हैं. राकेश का मानना है कि खेती के साथ पशुपालन करने से एक अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार होता है. गायों से मिलने वाले गोबर का इस्तेमाल खेत में भी किया जाता है, जिससे खेती और पशुपालन दोनों एक-दूसरे के काम आते हैं.
पिता और बेटे के साथ मिलकर संभालते हैं काम
राकेश के लिए डेयरी चलाना सिर्फ दूध निकालकर बेचने तक सीमित नहीं है. गायों की देखभाल में दिनभर ध्यान देना पड़ता है. समय पर पानी देना, चारा खिलाना, साफ-सफाई रखना और पशुओं की सेहत का ध्यान रखना जरूरी होता है. राकेश बताते हैं कि इस काम में उनके पिता और बेटा भी सहयोग करते हैं. परिवार के सभी लोग मिलकर गायों की जिम्मेदारी संभालते हैं. उनका कहना है कि पशुपालन में मेहनत के साथ नियमित देखभाल भी जरूरी है. पशु को समय पर चारा-पानी मिले और उसके रहने की जगह साफ रहे, तो उसकी सेहत और दूध उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ सकता है.
खेत में उगाते हैं हरा चारा, खाने में देते हैं पौष्टिक आहार
गायों को अच्छा आहार देने के लिए राकेश अपने खेत में हरी मक्का भी उगाते हैं. इसके साथ भूसा, गुड़ और खोपरा मिलाकर गायों को खिलाते हैं. वे पशुओं की जरूरत के हिसाब से उनके खाने-पीने का ध्यान रखते हैं. डेयरी में दूध उत्पादन के लिए केवल गाय की नस्ल ही नहीं, बल्कि उसका संतुलित आहार, स्वास्थ्य और देखभाल भी अहम होती है. राकेश इसी बात को ध्यान में रखकर गायों को चारा-पानी देने की व्यवस्था करते हैं.
गायों का करवाया बीमा, सुरक्षा पर भी ध्यान
राकेश पटेल गायों की सेवा के साथ उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखते हैं. उन्होंने अपनी गायों का तीन साल के लिए बीमा करवाया है. उनके मुताबिक, प्रति गाय करीब 10 हजार रुपये का बीमा करवाया गया है. पशुपालन में बीमारी या किसी दूसरी अनहोनी से नुकसान होने की आशंका रहती है. ऐसे में पशुओं का बीमा किसान के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक तरीका हो सकता है. राकेश ने गायों की देखभाल के साथ उनकी सुरक्षा को भी अपनी जिम्मेदारी में शामिल किया है.
गायों की सेवा को मानते हैं अपना धर्म
राकेश पटेल गायों को केवल कमाई का जरिया नहीं मानते, बल्कि उन्हें परिवार का हिस्सा समझते हैं. उनका कहना है कि गाय में देवताओं का वास होता है और उनकी सेवा करने से जीवन भी सुधरता है. इसी भावना के साथ वे खेती और डेयरी दोनों का काम कर रहे हैं. उनके लिए सुबह से शाम तक गायों की देखभाल करना रोजमर्रा की जिम्मेदारी के साथ गोसेवा भी है.
गाय के दूध की अपनी अलग पहचान
राकेश बताते हैं कि कई लोग भैंस के दूध को ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि उसमें आमतौर पर फैट अधिक होता है और मलाई भी ज्यादा दिखाई देती है. गाय के दूध में फैट की मात्रा नस्ल, आहार और दूसरे कारणों के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. इसके बावजूद राकेश ने गाय पालन को अपना काम बनाया और अलग-अलग नस्लों की गायों के जरिए दूध उत्पादन जारी रखा है. उनका सफर बताता है कि खेती के साथ पशुपालन शुरू करने के लिए बड़े फार्म से शुरुआत करना जरूरी नहीं है. सही देखभाल, मेहनत और अनुभव के साथ छोटे स्तर से भी इस काम को आगे बढ़ाया जा सकता है.