Navratri 2026 : हाथी पर आईं देवी, मुर्गे पर होगी विदाई…देश में बनेंगे गृह युद्ध जैसे हालात, काशी के ज्योतिषी ने बताई वजह

Navratri 2026 : हाथी पर आईं देवी, मुर्गे पर होगी विदाई…देश में बनेंगे गृह युद्ध जैसे हालात, काशी के ज्योतिषी ने बताई वजह


Last Updated:

Shardiya Navratri 2026 : इस बार नवरात्रि 10 दिनों की है. नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान जिस पर होता है, उसके भी अपने मायने होते हैं. इस बार देवी का आगमन हाथी पर हो रहा है. देवी का प्रस्थान मुर्गे (कुक्कुट) पर होगा. लोकल 18 ने इस बारे में BHU के ज्योतिष डिपार्टमेंट में प्रोफेसर पंडित विनय पांडेय से बात की. वे बताते हैं कि जब भी देवी का आगमन गज (हाथी) पर होता है, उस वक्त अत्यधिक बारिश होती है. देवी का आगमन तो शुभ है, लेकिन मुर्गे पर उनका जाना शुभकारी नहीं है. जब भी देवी मुर्गे पर प्रस्थान करती हैं, देश में उथल पुथल की स्थिति बनी रहती है.

Top Deals Inside

वाराणसी. शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है. इस बार नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 10 दिनों की है. नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है. नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान जिस पर होता है, वो भविष्य का संकेत भी करते हैं. इस बार देवी का आगमन गज यानी हाथी पर हो रहा है. देवी का प्रस्थान मुर्गे (कुक्कुट) पर होगा. देवी की इन दोनों सवारियों के अपने-अपने मायने हैं. काशी के ज्योतिषी ने इसे लेकर बड़ी भविष्यवाणी की है. बनारस हिंदू यूनिवार्सिटी के ज्योतिष डिपार्टमेंट में प्रोफेसर पंडित विनय पांडेय लोकल 18 से बताते हैं कि जब भी देवी का आगमन गज (हाथी) पर होता है, उस वक्त अत्यधिक बारिश होती है, जिसके संकेत अभी से दिख भी रहें है. इस बार शारदीय नवरात्रि में देवी का आगमन तो शुभ है, लेकिन मुर्गे पर उनका जाना शुभकारी नहीं है.

गृह युद्ध जैसे हालात

पंडित विनय पांडेय कहते हैं कि जब भी देवी मुर्गे पर प्रस्थान करती हैं तो ऐसे में देश में उथल पुथल की स्थिति बनी रहती है. ऐसे समय में प्रायः विद्रोह की आशंका बनी रहती है. सरकार और शासन पक्ष से जनता असंतुष्ट रहती है. गृह युद्ध जैसे हालात भी बन सकते हैं. देश में अशांति रहती है और मौजूदा समय में सत्ता पर जो भी काबिज होता है, वो खुद को असहज महसूस करता है.

तिथियों में हेरफेर

शारदीय नवरात्रि में इस बार तिथियों में हेरफेर के कारण नवरात्रि नौ नहीं बल्कि 10 दिनों की है. नवमी तिथि नौवे नहीं बल्कि 10 वें दिन यानि 20 अक्टूबर को मान्य होगी क्योंकि 20 अक्टूबर को ही उदया तिथि में नवमी तिथि प्राप्त हो रही है. ऐसे में उसका मान्य भी उसी दिन होगा. इस दिन ही नवमी का हवन पूजन किया जाएगा. कन्या पूजन के लिए भी यही दिन सबसे उपयुक्त है. जो लोग नौ दिनों का व्रत रखते हैं, वे भी 21 तारीख को अपने व्रत का पारण करेंगे. नवरात्रि में कन्या पूजन के बिना देवी की पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए जो भी श्रद्धालु नौ दिनों तक देवी की पूजा आरधना और व्रत रखते है, उन्हें हवन के बाद पूरे विधि विधान से कन्या पूजन भी करना चाहिए. कन्या पूजन के दौरान नौ कन्याओं को देवी स्वरूप में उनकी पूजा आराधना करनी चाहिए. इससे ही नौ दिनों की पूजा संपूर्ण मानी जाती है.



Source link