रियाद: ईरान में 3 नवंबर तक शांति रहेगी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडटर्म चुनावों में बिजी रहेंगे और अभी वो अपनी पावर्स बचाने पर फोकस कर रहे हैं. भले ही ईरान-अमेरिका अभी नहीं लड़ रहे हों लेकिन गल्फ देशों कि किस्मत में शांति नहीं लिखी है. अब सऊदी अरब में बवाल मचा हुआ है, यहां हूतियों के साथ पुरानी दुश्मनी एक बार फिर से जाग गई है. सऊदी के तेल इंफ्रास्ट्रक्टर से लेकर एयरपोर्ट तक ताबड़तोड़ अटैक्स हो रहे हैं. इस बीच खबर आ रही है कि सऊदी अरब के कर्ता-धर्ता और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) छुपते फिर रहे हैं. उन्हें ऐसी जगह शिफ्ट कर दिया गया है, जहां हूती लड़ाके 7 जन्मों में भी नहीं पहुंच सकते हैं.
हूतियों के आगे हांफने लगे सऊदी अरब के हथियार
अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के सामने सऊदी अरब का एयर डिफेंस सिस्टम हांफने लगा है. हालात ये हैं कि सऊदी अरब के पास दुश्मनों की मिसाइलों को हवा में ही तबाह करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक अब तेजी से खत्म हो रहा है.
इस उठापटक के बीच सबसे ज्यादा चर्चा सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा को लेकर हो रही है. खबर है कि क्राउन प्रिंस अब आम महलों में नहीं, बल्कि बेहद सीक्रेट और अभेद्य सुरक्षा वाले ठिकानों पर शिफ्ट हो चुके हैं.
सात जन्मों में भी नहीं पहुंच सकते लड़ाके! आखिर कहां छुपे हैं क्राउन प्रिंस MBS?
हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों और मिसाइल स्ट्राइक के खतरे को देखते हुए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा को बेहद कड़ा कर दिया गया है. रिपोर्ट बताती है कि MBS इस समय किसी एक जगह पर रुकने के बजाय लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं.
वो केवल ऐसे हैवी गार्डेड ‘महल’ में समय बिता रहे हैं जो आधुनिक अंडरग्राउंड बंकरों से पूरी तरह लैस है. इन बंकरों की सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत है कि वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता.
- मिसाइल और बम-रोधी बंकर: ये बंकर जमीन से कई फीट नीचे बनाए गए हैं, जो किसी भी बड़े मिसाइल हमले या बंकर-बस्टर बम के असर को पूरी तरह बेअसर कर सकते हैं.
- चुनिंदा सुरक्षा गार्ड: क्राउन प्रिंस के साथ हर समय एक बेहद खास और हैंडपिक्ड सिक्योरिटी टीम मौजूद रहती है, जिन्हें केवल उनकी सुरक्षा के लिए ही तैनात किया गया है.
- स्वतंत्र लाइफ-सपोर्ट सिस्टम: इन बंकरों के भीतर ऑक्सीजन, एयर-फिल्ट्रेशन और स्वतंत्र पावर बैकअप की पूरी व्यवस्था है, जिससे बिना बाहर निकले हफ्तों तक सुरक्षित रहा जा सकता है.
आसमान की सुरक्षा घटी, अब सिर्फ ‘शाही महल और तेल के कुएं’ बेचेंगे
जब देश में डिफेंस मिसाइलें ही कम पड़ने लगें, तो हर कोने को सुरक्षित रखना नामुमकिन हो जाता है. सऊदी अरब के साथ भी इस वक्त बिल्कुल ऐसा ही हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, रियाद प्रशासन ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए पूरे देश में तैनात एयर डिफेंस बैटरियों को री-डिप्लॉय यानी दूसरी जगहों पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है.
सऊदी अरब अब पूरे देश के आसमान को एक साथ कवर करने के बजाय सिर्फ दो अहम जगहों को बचाने पर पूरा जोर दे रहा है.
- क्रिटिकल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर: यानी देश के बड़े तेल के कुएं, रिफाइनरी और गैस प्लांट, जिन पर देश की पूरी अर्थव्यवस्था टिकी है.
- शाही निवास: यानी क्राउन प्रिंस और शाही परिवार के बड़े सदस्यों के महल.
सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि एयर डिफेंस की ये नई तैनाती इस बात का सबूत है कि सऊदी अरब के पास अब इतने हथियार नहीं बचे हैं कि वो अपने पूरे देश को एक साथ सुरक्षित रख सके.
800 किलोमीटर अंदर तक घुसीं दो क्रूज मिसाइलें, दहल उठा रियाद
सऊदी अरब का ये डर पूरी तरह से वाजिब है, क्योंकि हाल ही में हूती विद्रोहियों ने सऊदी सीमा के अंदर बहुत अंदर तक हमला करके सबको चौंका दिया था.
दावा किया गया है कि हूती लड़ाकों की 2 क्रूज मिसाइलों ने सऊदी अरब के एयरस्पेस में 800 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी दूरी तय की.
- पहली क्रूज मिसाइल- किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, रियाद- एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही मार गिराया.
- दूसरी क्रूज मिसाइल- सऊदी अरब के भीतर तय किया गया अन्य निशाना- एयर डिफेंस को चकमा देकर सीधे अपने लक्ष्य पर जा टकराई.
राजधानी रियाद के इतने पास और 800 किलोमीटर अंदर तक मिसाइलों का पहुंच जाना इस बात का सबूत है कि सऊदी अरब का एयर डिफेंस नेटवर्क अब काम का नहीं रह गया है.
क्यों खत्म हो रहा है सऊदी अरब का डिफेंस स्टॉक?
सऊदी अरब मुख्य रूप से अमेरिका में बने ‘पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम’ पर निर्भर है. इस युद्ध में सऊदी अरब के सामने एक बहुत बड़ी आर्थिक चुनौती भी खड़ी हो गई है.
हूती विद्रोही जिन सस्ते ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला करते हैं, उनकी कीमत कुछ हजार डॉलर होती है लेकिन उन्हें हवा में नष्ट करने के लिए सऊदी अरब को जो ‘पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल’ दागनी पड़ती है, उसकी एक कीमत लगभग 25 से 30 करोड़ रुपए होती है.
लगातार हो रहे हमलों के कारण सऊदी अरब का ये कीमती स्टॉक तेजी से खाली हो रहा है और अमेरिका से नई मिसाइलों की सप्लाई में हो रही देरी ने रियाद की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. यही वजह है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान कोई भी जोखिम लेने के बजाय पूरी सुरक्षा के साथ बंकरों से देश की कमान संभाल रहे हैं.