शेयर बाजार में फिर गिरावट का खतरा, ₹45,000 करोड़ की बिकवाली, अनुज सिंघल ने बताया अब क्या करें निवेशक

शेयर बाजार में फिर गिरावट का खतरा, ₹45,000 करोड़ की बिकवाली, अनुज सिंघल ने बताया अब क्या करें निवेशक


शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से दबाव बना हुआ है. पिछले छह कारोबारी दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने करीब 45,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं. सोमवार को बाजार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ हुई, लेकिन सुबह करीब 10 बजे के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दिखने लगी. BSE सेंसेक्स 169.87 अंक यानी 0.23% गिरकर 72,302.46 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 18.25 अंक यानी 0.08% टूटकर 22,551.50 पर कारोबार करने लगा.

अब निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि क्या बाजार ने अपना निचला स्तर बना लिया है या तेजी की उम्मीद में खरीदारी करने वाले निवेशक फंस सकते हैं? CNBC आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल के मुताबिक, मौजूदा तेजी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. उनका मानना है कि यह तेजी कुछ समय के लिए राहत देने वाली रैली हो सकती है. बाजार की दिशा तय करने में विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कंपनियों की कमाई, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों की अहम भूमिका रहेगी.

क्या बाजार में फिर आएगी गिरावट?

अनुज सिंघल के मुताबिक, निफ्टी इस हफ्ते अपने 10 और 20 दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (DEMA) को फिर से परख सकता है. निफ्टी का 10 DEMA करीब 22,650 और 20 DEMA करीब 22,950 के लेवल पर है. उनके अनुसार, अगर बाजार में मौजूदा तेजी कमजोर पड़ती है, तो 22,600 से 22,700 का लेवल अहम होगा.

वहीं, अगर निफ्टी 22,950 के ऊपर टिकता है, तो बाजार में शॉर्ट कवरिंग के कारण तेज उछाल आ सकता है. दूसरी ओर, 22,180 का पिछला निचला स्तर टूटने पर गिरावट बढ़ने की आशंका है. हालांकि, ये बाजार के विश्लेषण पर आधारित अनुमान हैं, पक्की भविष्यवाणी नहीं.

रुपये को संभालने के लिए RBI के बड़े कदम

रुपये पर दबाव कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतें पूरी करने के लिए विशेष व्यवस्था की है. इसके तहत HPCL, BPCL और IOC जैसी तेल कंपनियों को तय बैंकों के जरिए डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे इन कंपनियों को खुले बाजार से डॉलर खरीदने की जरूरत कम होगी और रुपये पर दबाव घटाने में मदद मिल सकती है.

इसके अलावा, RBI ने बैंकों के लिए कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) की रोजाना मिनिमम लीमिट 90% से बढ़ाकर 99% करने का फैसला किया है. यह बदलाव 16 अक्टूबर 2026 से लागू होना है. सेंट्रल बैंक ने 13 अक्टूबर के लिए 25,000 करोड़ रुपये के ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) की भी घोषणा की है. इन कदमों का मकसद बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को संभालना है.

कच्चे तेल और ग्लोबल तनाव का असर

रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को लेकर बातचीत की खबरों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है. सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाज पर ड्रोन हमले की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर और WTI करीब 92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

महंगा कच्चा तेल भारत के आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है. दूसरी ओर, डॉलर में नरमी और वैश्विक तनाव के कारण सोने-चांदी की कीमतों को सहारा मिल सकता है. ऐसे में निवेशक वैश्विक घटनाओं पर भी नजर रख रहे हैं.

बाजार की असली चुनौती और निफ्टी के अहम लेवल

अनुज सिंघल के मुताबिक, बाजार की बड़ी चिंता कंपनियों की कमाई में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होना है. भारत की GDP बढ़ने के बावजूद बड़ी कंपनियों की कमाई में वैसी तेजी नहीं दिख रही. जब तक प्रमुख कंपनियों के नतीजों में सुधार नहीं आता, तब तक प्रमुख शेयर मार्केट इंडेक्स में मजबूत तेजी आना मुश्किल हो सकता है.

निफ्टी के लिए 22,400 से 22,450 का स्तर पहला सपोर्ट है, जबकि 22,300 से 22,350 अगला अहम सपोर्ट माना जा रहा है. ऊपर की ओर 22,650 से 22,700 पहला रेजिस्टेंस और 22,800 से 22,850 अगला रेजिस्टेंस है. बैंक निफ्टी में 55,050 और 55,500 के स्तरों पर नजर रहेगी. निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की चाल, कंपनियों के नतीजों और अपने रिस्क उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए.



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