राहुल गांधी की मुलाकात की मांग पर ठुकराने का तर्कसंगत जवाब भेज द‍िया है: CJI सूर्यकांत

राहुल गांधी की मुलाकात की मांग पर ठुकराने का तर्कसंगत जवाब भेज द‍िया है: CJI सूर्यकांत


र‍िपोर्ट: अनन्‍या भटनागर. 

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर मुलाकात की मांग ठुकराने का फैसला बताते हुए तर्कसंगत जवाब भेजा है. साथ ही उन्होंने जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट सभी के लिए खुला है और आम लोगों की सेवा करता है.

सीएनएन-न्यूज18 से खास बातचीत में सीजेआई ने कहा कि उन्होंने मुलाकात की मांग अस्वीकार करने के कारण बता दिए हैं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के लिए सुलभ है और यह आम लोगों की संस्था है. उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट आम लोगों के लिए है और यह सबके लिए खुला है,”

ये टिप्पणियां मतदाता सूची में अनियमितताओं और विशेष गहन संशोधन (SIR) के आरोपों को लेकर राजनीतिक टकराव के बीच आई हैं. राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने अपनी चिंताओं का ज्ञापन सौंपने के लिए सीजेआई से मुलाकात मांगी थी.

सीजेआई ने यह मांग ठुकरा दी. जवाब में कथित तौर पर कहा गया कि उठाए गए मुद्दे पहले से कोर्ट के सामने हैं और इन्हें न्यायिक प्रक्रिया के जरिए उठाया जाना चाहिए. नेताओं को सलाह दी गई कि प्रशासनिक मुलाकात की बजाय याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट जाएं.

विपक्ष ने कथित “वोट चोरी” खत्म करने, SIR प्रक्रिया रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. इंडिया ब्लॉक सोमवार को अपनी मांगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च भी करने वाला है.

यह मार्च कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनों के बीच घोषित किया गया. यह युवा-नेतृत्व वाला राजनीतिक आंदोलन मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन चला रहा है.

प्रदर्शनों के कारण दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई. गांधी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल का इस्तेमाल किया और भाजपा व आरएसएस के कार्यकर्ता हिंसा में शामिल हुए.

चुनाव आयोग ने हालांकि किसी भी राजनीतिक दल का पक्ष लेने से इनकार किया है और कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, वे फिर से नामांकन करवा सकते हैं. भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि विपक्ष वैध चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रहा है.

विपक्ष के सीजेआई से मुलाकात मांगने और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के फैसले पर पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरिश साल्वे ने भी तीखी आलोचना की है.

आईएएनएस से बातचीत में साल्वे ने इस कदम को “पूरी तरह मूर्खता” बताया. उन्होंने सवाल किया कि वरिष्ठ राजनीतिक नेता और वकील स्थापित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बजाय सीजेआई से अपॉइंटमेंट क्यों मांग रहे हैं.

साल्वे ने पूछा, “क्या किसी ने उन्हें नहीं बताया कि मुख्य न्यायाधीश हर मामले की व्यक्तिगत सुनवाई नहीं करते?”. उन्होंने बताया कि मामले उन बेंचों के सामने आते हैं जिन्हें वे सौंपे जाते हैं और फैसले न्यायिक प्रक्रिया के जरिए दिए जाते हैं.

उन्होंने तर्क दिया कि न्यायपालिका से राहत मांगने वाले राजनीतिक नेताओं को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, न कि मुख्य न्यायाधीश के सामने सीधे राजनीतिक मांगें रखनी चाहिए.



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