बिहार MLC चुनाव: 5.32 लाख वोटर करेंगे 8 सीटों पर फैसला, जानिए किस सीट पर कितने मतदाता

बिहार MLC चुनाव: 5.32 लाख वोटर करेंगे 8 सीटों पर फैसला, जानिए किस सीट पर कितने मतदाता


पटना. निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, बिहार विधान परिषद की आठों सीटों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा. मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है. इससे पहले एमएलसी की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज के उम्मीदवारों के बीच मुकाबले को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है. अब सभी राजनीतिक दलों की नजर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने और समर्थन जुटाने पर है. इस बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की संख्या की सूची जारी कर दी है.

बता दें कि यह चुनाव आम विधानसभा चुनाव से अलग है, क्योंकि इसमें पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं. निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, आठ सीटों पर कुल 5,32,847 मतदाता 23 अक्टूबर को वोट डालेंगे. इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के 4,92,594 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के 40,253 मतदाता शामिल हैं.

स्नातक सीट पर कितने वोटर, कहां सबसे ज्यादा

सीटवार आंकड़ा ऐसा है-

  • कोसी स्नातक: 1,34,072 वोटर
  • तिरहुत स्नातक: 1,43,988 वोटर
  • दरभंगा स्नातक: 1,26,951 वोटर
  • पटना स्नातक: 87,583 वोटर

इन आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक वोटर दरभंगा में हैं तो सबसे कम पटना स्नातक सीट पर. पटना सीट सबसे हॉट है क्योंकि यहां जदयू के नीरज कुमार के खिलाफ खुद जदयू विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के अनुज सिंह को समर्थन दे दिया है.

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 40 हजार वोटर

चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 40,253 मतदाता हैं, इनमें 30,677 पुरुष, 9,573 महिला और 3 थर्ड जेंडर शामिल हैं. पटना शिक्षक सीट पर बीजेपी के 5 बार के एमएलसी नवल किशोर यादव के सामने राजद के डॉ. संजीव कुमार मैदान में हैं.

सीटवार मतदाओं के आंकड़े-

  • तिरहुत शिक्षक: 8,760 वोटर
  • दरभंगा शिक्षक: 9,026 वोटर
  • पटना शिक्षक: 11,719 वोटर
  • सारण शिक्षक: 10,748 वोटर

क्यों खास है यह चुनाव?

स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव आम जनता नहीं, बल्कि ग्रेजुएट डिग्रीधारी और शिक्षक ही वोट देते हैं, इसलिए इसमें जातीय समीकरण से ज्यादा शिक्षकों की नाराजगी, वेतन, ट्रांसफर-पोस्टिंग और पुराने एमएलसी का काम देखा जाता है. आयोग ने सभी 8 सीटों पर पारदर्शी वोटिंग के लिए बैलेट पेपर से चुनाव कराने और फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का निर्देश दिया है. ऐसे में साफ है कि इन चुनावों में जीत-हार का आकलन केवल राजनीतिक दलों की ताकत से नहीं किया जा सकता. मतदाताओं की संख्या, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और मतदान में भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी.



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