घड़साना किसान आंदोलन : हनुमान बेनीवाल के ऐलान से बढ़ सकती है भजनलाल सरकार की मुश्किलें


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Gharsana Kisan Aandolan : श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़-घड़साना इलाके में चल रहा किसान आंदोलन अब चरम की और बढ़ने लग गया है. इससे यह आंदोलन भजनलाल सरकार के लिए गले की फांस बन सकता है. आंदोलन के तहत दो दिन तक राष्ट्रीय राजमार्ग जाम रखने के बाद भी समझौता वार्ता सफल नहीं होने पर अब किसान आरपार की लड़ाई की और बढ़ने लग गए हैं. रविवार रात को आंदोलनकारी किसानों को संबोधित करते हुए आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने सरकार के साफ चेतावनी दी है कि वह किसानों की मांगों को स्वीकार कर लें. अन्यथा दो दिन बाद फिर से चक्का जाम किया जाएगा. जानें क्या कहा बेनीवाल ने.

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हनुमान बेनीवाल के ऐलान से बढ़ सकती है भजनलाल सरकार की मुश्किलेंZoom

हजारों किसानों के बीच हनुमान बेनीवाल ने सरकार को दी चेतावनी.(फोटो साभार- https://x.com/hanumanbeniwal)

श्रीगंगानगर. पंचायती राज चुनाव के बीच पश्चिमी राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में अनूपगढ़ इलाके के घड़साना में चल रहा किसान आंदोलन सूबे की भजनलाल सरकार के लिए गले की फांस बन गया है. चक्का जाम के बाद भी किसानों और सरकार के बीच हुई समझौता वार्ता विफल हो जाने के बाद किसान अब भी अपनी मांगों को लेकर अड़े हैं. लिहाजा अभी तक गतिरोध टूट नहीं पाया है. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में आए आरएलपी सुप्रीमो एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने रविवार रात को सूबे की भजनलाल सरकार को चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि वे सरकार घड़साना में आंदोलनरत किसानों की सभी मांगों को स्वीकार कर उनका सम्मानजनक समाधान करे, लेकिन सरकार की हठधर्मिता पर अड़ी हुई है.

बेनीवाल ने कहा कि चूंकि पंचायती राज चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन में अब केवल दो दिन शेष है. इसलिए फिलहाल चुनावी जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं. लेकिन दो दिन बाद संघर्ष समिति आंदोलन को जिस भी दिशा में आगे ले जाने का निर्णय करेगी मैं किसानों के साथ पुनः मजबूती से खड़ा मिलूंगा. किसानों के हक, अधिकार और सम्मान की लड़ाई में मैं हमेशा किसानों के साथ खड़ा रहूंगा. दो दिन बाद हम फिर से मजबूती से जुटेंगे और सरकार को झुका कर रहेंगे. बेनीवाल के इस ऐलान के बाद सरकार की मुसीबत बढ़ सकती है. दो दिन बाद आंदोलन नया रुख अख्तियार कर सकता है. अब सरकार के सामने इस आंदोलन से शांतिपूर्वक निपटने की बड़ी चुनौती है. राजस्थान में पूर्व में भी किसान आंदोलन सरकार के लिए मुसीबत बन चुके हैं. साल 2004 में हुआ रावला घड़साना किसान आंदोलन भी चर्चा में बना हुआ है.

32 दिनों से चल रहा किसानों का यह आंदोलन
करीब 32 दिनों से चल रहा किसानों का यह आंदोलन समय के साथ उग्र होता जा रहा है. आंदोलन के तहत अपनी मांगों को लेकर किसान रविवार को दूसरे दिन भी भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग 911 पर 12 एमडी टोल नाके के पास जमे रहे. इससे अनूपगढ़-घड़साना-बीकानेर राजमार्ग बाधित रहा. जाम के कारण रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित हुआ. अनूपगढ़ डिपो प्रबंधक के मुताबिक जाम के कारण इस रुट पर करीब 60 प्रतिशत रोडवेज बसें प्रभावित हुई. वहीं अन्य वाहनों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा. हाईवे पर डटे किसानों की निगरानी के लिए वहां काफी पुलिस जाब्ता भी तैनात रहा.

बेनीवाल ने आगामी फैसला संघर्ष समिति पर छोड़ा
उसके बाद रविवार देर रात को वहां माहौल में उस समय माहौल गरमाने गया जब वहां राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सर्वेसर्वा हनुमान बेनीवाल पहुंचे. उन्होंने वहां संघर्ष समीति के साथ राज्य सरकार से वार्ता की लेकिन वह बेनतीजा रही. किसानों की साफ मांग है कि उन्हें पानी की 6+2 की बारी चाहिए. वहीं सरकार 5+2 सिंचाई बारी पर अड़ी रही. अंतत: बातचीत जब किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई तो हनुमान बेनीवाल ने किसानों की हालत देखकर हाइवे जाम खोलने की बात कहीं. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने आगामी फैसला संघर्ष समिति के स्तर पर छोड़ दिया और कहा वे उनके साथ खड़े हैं.

किसान कह चुके हैं कि रावला-घड़साना किसान आंदोलन को दोहराने से नहीं चूकेंगे
बेनीवाल के इस रुख ने साफ कर दिया कि पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन को देखते हुए आंदोलन धीमा जरुर पड़ा है लेकिन किसानों ने हार नहीं मानी है. वहां किसानों की सरकार से नाराजगी साफ दिखाई दी. माना जा रहा है कि सरकार के इस रुख से किसान खासा खफा है और इसका नुकसान उसे पंचायत चुनाव में उठाना पड़ सकता है. वहीं बेनीवाल ने भी 13-14 अक्टूबर के बाद फिर से आंदोलन को धारदार बनाने की अपील की सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है. उल्लेखनीय है कि किसान पहले भी सरकार को चेता चुके हैं कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो करीब दो दशक पहले हुए रावला-घड़साना किसान आंदोलन को दोहराने से नहीं चूकेंगे.



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