Birth Date Astrology Navratri: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्रि के नौ दिन में मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. मां के हर स्वरूप का अपना विशेष महत्व है और उनसे जुड़ी मान्यताएं भक्तों को शक्ति, साहस, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति का मार्ग दिखाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंक ज्योतिष के अनुसार, आपकी जन्मतिथि का संबंध मां दुर्गा के किसी विशेष स्वरूप से भी माना जाता है? अंक ज्योतिष में प्रत्येक जन्मांक का संबंध एक ग्रह से भी बताया गया है और मां के हर स्वरूप का संबंध किसी ना किसी ग्रह से भी जुड़ा हुआ है. इन्हीं मान्यताओं के आधार पर आप जन्मतिथि के माध्यम से जान सकते हैं कि इस नवरात्रि किस देवी की आराधना आपके लिए कल्याणकारी रहने वाली है…
कैसे निकालें अपना जन्मांक?
अपना जन्मांक जानने के लिए आपको केवल अपनी जन्मतिथि की जरूरत होगी. अगर आपका जन्म किसी महीने की 27 तारीख को हुआ है, तो 2+7 = 9 होगा यानी आपका जन्मांक 9 है. इसी तरह, अगर आपका जन्म किसी महीने की 5 तारीख को हुआ है, तो आपका जन्मांक 5 ही रहेगा. आइए जानते हैं कि जन्मांक 1 से 9 तक के लोगों के लिए मां दुर्गा के कौन-से स्वरूप की पूजा शुभ मानी जाती है और किस दिन किस भोग से मां को प्रसन्न करने की मान्यता है.
जन्मांक 1: मां कूष्मांडा
अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 और 28 तारीख को हुआ है तो आपका जन्मांक 1 है और इस अंक का संबंध ग्रहों के राजा सर्य देव से है. इस अंक के जातकों को मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना करनी चाहिए. मां कूष्मांडा को सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी. कुछ परंपराओं में उनका निवास सूर्यलोक में बताया गया है. जन्मांक 1 वाले लोगों को नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, कभी-कभी उनमें अपनी बात मनवाने की प्रवृत्ति भी अधिक हो सकती है.
पूजा और भोग: मां कूष्मांडा की पूजा नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है. उन्हें मालपुए का भोग अर्पित करने की परंपरा है. मां के इस स्वरूप की पूजा करने से कुंडली में सूर्यदेव की स्थिति भी मजबूत होती है.
जन्मांक 2: मां शैलपुत्री
किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को जन्मे लोगों का जन्मांक 2 होता है और इस अंक के स्वामी मन व माता के कारक ग्रह चंद्रमा हैं. इस अंक के जातकों को मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा अर्चना करनी चाहिए. मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा की जाती है. उनका स्वरूप स्थिरता, शांति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है. जन्मांक 2 वाले लोग संवेदनशील, भावुक और दूसरों की भावनाओं को समझने वाले माने जाते हैं. वे अपने आसपास के माहौल से जल्दी प्रभावित भी हो सकते हैं.
पूजा और भोग: मां शैलपुत्री को शुद्ध घी अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि उनकी पूजा से स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की कामना की जाती है. मां के इस स्वरूप की पूजा करने से कुंडली में चंद्रदेव की स्थिति भी मजबूत होती है.
जन्मांक 3: मां कात्यायनी
किसी भी महीने की 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे लोगों का जन्मांक 3 होता है और इस अंक के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं. इन अंक के जातकों को मां कात्यायनी की पूजा अर्चना करनी चाहिए. मां कात्यायनी दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूपों में से एक हैं. धार्मिक परंपरा में विवाह योग्य कन्याओं द्वारा मनोवांछित जीवनसाथी की कामना से उनकी पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है. जन्मांक 3 वाले लोग ज्ञान, शिक्षा, मार्गदर्शन और नेतृत्व से जुड़े गुणों वाले माने जाते हैं. इन्हें दूसरों की सहायता करना और अपने अनुभव शेयर करना पसंद हो सकता है.
पूजा और भोग: मां कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन की जाती है. उन्हें शहद का भोग अर्पित करने की परंपरा है. मां के इस स्वरूप की पूजा करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति भी मजबूत होती है.
जन्मांक 4: मां महागौरी
किसी भी महीने की 4, 13, 22 या 31 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 4 होता है और इस अंक के स्वामी छाया ग्रह राहु हैं. इस अंक के जातकों को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना करनी चाहिए. ज्योतिषीय मान्यताओं में मां महागौरी की आराधना को राहु से जुड़ी बेचैनी और मानसिक अस्थिरता शांत होती है. मां महागौरी का स्वरूप पवित्रता, शांति और कठिनाइयों के बाद नई शुरुआत का प्रतीक है. जन्मांक 4 वाले लोगों को परंपरागत रास्तों से हटकर सोचने और अलग ढंग से काम करने वाला माना जाता है. जीवन में बदलाव और चुनौतियों के बीच ये अपने लिए नई राह तलाश सकते हैं.
पूजा और भोग: मां महागौरी की पूजा नवरात्रि के आठवें दिन यानी महाष्टमी पर की जाती है. उन्हें नारियल अर्पित करने की परंपरा है. मां के इस स्वरूप की पूजा करने से राहु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है.
जन्मांक 5: मां स्कंदमाता
किसी भी महीने की 5, 14, 23 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 5 होता है और इस अंक के स्वामी ग्रहों के राजकुमार बुध देव हैं. इस अंक के जातकों को मां स्कंदमाता की पूजा अराधना करनी चाहिए. मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं. उनके स्वरूप में वे अपने पुत्र को गोद में धारण किए दिखाई देती हैं. उनका आशीर्वाद मातृत्व, स्नेह और संतान के कल्याण से जोड़कर देखा जाता है. जन्मांक 5 वाले लोग तेज बुद्धि, अच्छी संवाद क्षमता और नई चीजें सीखने की रुचि के लिए जाने जाते हैं. वे शिक्षा, व्यापार और संचार से जुड़े कार्यों में रुचि रख सकते हैं.
पूजा और भोग: मां स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि के पांचवें दिन की जाती है. उन्हें केले का भोग अर्पित करने की परंपरा है. मां के इस स्वरूप की पूजा करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.
जन्मांक 6: मां चंद्रघंटा
किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 6 होता है और इस अंक के स्वामी भौतिक सुख-सुविधा के स्वामी शुक्र ग्रह हैं. इस अंक के जातकों को मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना करनी चाहिए. मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. उनका स्वरूप साहस, शौर्य और दुष्ट शक्तियों के विनाश का प्रतीक है. जन्मांक 6 वाले लोगों को सुंदरता, प्रेम, कला और पारिवारिक सामंजस्य पसंद करने वाला माना जाता है. वे अपने रिश्तों में प्रेम और संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं.
पूजा और भोग: मां चंद्रघंटा की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है. उन्हें दूध से बनी खीर का भोग अर्पित किया जा सकता है. मां के इस स्वरूप की पूजा करने से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होते हैं.
जन्मांक 7: मां सिद्धिदात्री
किसी भी महीने की 7, 16 और 25 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 7 होता है और इस अंक के स्वामी छाया ग्रह केतु हैं. इस अंक के जातकों को मां के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा अराधना करनी चाहिए. मां सिद्धिदात्री को सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. नवरात्रि के नौवें दिन उनकी आराधना का विशेष महत्व है. जन्मांक 7 वाले लोगों को आध्यात्मिक चिंतन, आत्मविश्लेषण और गूढ़ विषयों में रुचि रखने वाला माना जाता है. वे जीवन के गहरे अर्थ को समझने और अपने भीतर झांकने का प्रयास कर सकते हैं.
पूजा और भोग: मां सिद्धिदात्री की पूजा महानवमी के दिन की जाती है. उन्हें तिल या तिल से बने लड्डू अर्पित करने की परंपरा का पालन किया जा सकता है. मां के इस स्वरूप की आराधना करने से केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है.
जन्मांक 8: मां कालरात्रि
किसी भी महीने की 8, 17 और 26 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 8 होता है और इस अंक के स्वामी न्याय व कर्म के कारक ग्रह शनिदेव हैं. इस अंक के जातकों को मां कालरात्रि की पूजा अर्चना करनी चाहिए. मां कालरात्रि दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली स्वरूपों में से एक हैं. उनका स्वरूप देखने में भले ही भयंकर हो, लेकिन उन्हें अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी माना जाता है. इसी कारण उनका एक नाम शुभंकरी भी है. जन्मांक 8 वाले लोगों को मेहनती, धैर्यवान और संघर्ष के बाद सफलता प्राप्त करने वाला माना जाता है. इनके जीवन में प्रगति धीरे-धीरे होने की मान्यता भी अंक ज्योतिष में मिलती है.
पूजा और भोग: मां कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है. उन्हें गुड़ का भोग अर्पित करने की परंपरा है. मां के इस स्वरूप की आराधना करने से कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत होती है और भय पर विजय पाने, कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है.
जन्मांक 9: मां ब्रह्मचारिणी
किसी भी महीने की 9, 18 और 27 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 9 होता है और इस अंक के स्वामी ग्रहों के सेनापति मंगल देव हैं. इस अंक के जातकों को मां के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना करनी चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, संयम, त्याग और अटूट संकल्प की प्रतीक हैं. उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि कठिन से कठिन लक्ष्य को भी धैर्य और साधना से प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है. जन्मांक 9 वाले लोगों को साहसी, ऊर्जावान और संघर्ष करने वाला माना जाता है. वे अपने लक्ष्य के लिए लगातार प्रयास करने की प्रवृत्ति रख सकते हैं.
पूजा और भोग: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है. उन्हें शक्कर और फल अर्पित करने की परंपरा है. मां के इस स्वरूप की आराधना करने से कुंडली में मंगल दोष दूर होता है और धैर्य, आत्मसंयम और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है.