Public Opinion: नीरज कुमार vs अनंत सिंह: JDU में किसका चलेगा दांव? निशांत की सियासत पर पटना में छिड़ी बहस

Public Opinion: नीरज कुमार vs अनंत सिंह: JDU में किसका चलेगा दांव? निशांत की सियासत पर पटना में छिड़ी बहस


पटना: पटना में चाय की दुकानों से लेकर बिहार विधानसभा के आसपास तक इन दिनों बिहार पॉलिटिक्स की चर्चा तेज है. विधान परिषद चुनाव में नीरज कुमार की जीत को लेकर किसी को पूरा भरोसा है, तो कोई पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों पर सवाल उठा रहा है. कोई उन्हें पढ़ा-लिखा और सुलझा हुआ नेता बताते हुए अच्छे वोटों से जीतने का दावा कर रहा है, तो किसी का मानना है कि उम्मीदवार के चयन में जेडीयू से चूक हुई है. सवाल सिर्फ चुनाव में जीत-हार का नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर आपसी मतभेद और नेतृत्व को लेकर भी है.

इसी सिलसिले में लोकल 18 ने लोगों से बातचीत की. नीतीश कुमार के बाद निशांत कुमार की भूमिका को लेकर लोगों ने अपनी राय रखी है. कुछ लोगों को भरोसा है कि निशांत कुमार जेडीयू की विरासत को संभालेंगे और पार्टी को मजबूत बनाए रखेंगे, जबकि कुछ लोगों को पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई और नेताओं की चुप्पी से टूट की आशंका नजर आ रही है.

नीरज कुमार जीत जाएंगे MLC चुनाव
बिहार विधानसभा के पास अपने दोस्तों के साथ चाय की चुस्की ले रहे ललन सिंह ने बताया कि फिलहाल विधान परिषद चुनाव में नीरज कुमार जीत रहे हैं. वह अच्छे वोटों से जीतेंगे. वह पढ़े-लिखे हैं और समाजसेवी भी हैं. ऐसे में पढ़े-लिखे व्यक्ति को ही वोट देना चाहिए. अब कोई सड़क पर बयानबाजी करता है, तो इसे आपसी फूट नहीं माना जाना चाहिए.

बगल में बैठे अशोक कुमार ने बताया कि एनडीए की सरकार है और भाजपा का अपना कैडर वोट है. स्नातक का चुनाव बुद्धिजीवियों का चुनाव होता है, अनपढ़ों का नहीं. जहां तक उम्मीदवार की बात है, तो नीरज कुमार एक सुलझे हुए व्यक्ति हैं और लंबे समय से सरकार का अभिन्न अंग रहे हैं. उन्हें नहीं लगता कि नीरज कुमार के पक्ष में कहीं कोई कमी है. वह अच्छे वोटों से चुनाव जीतेंगे. जहां तक आपसी मतभेद का सवाल है, तो पार्टी में आपसी सामंजस्य के दौरान इस तरह की प्रतिक्रियाएं आती रहती हैं. इसमें कोई खास बात नहीं है.

निशांत संभालेंगे जेडीयू, नहीं होगी कोई टूट
अविनाश चंद्रा ने बताया कि नीतीश कुमार के बाद निशांत कुमार आ गए हैं और वह एक सुलझे हुए व्यक्ति हैं. जिस तरह लालू यादव की राजनीतिक विरासत तेजस्वी यादव ने संभाली है, उसी तरह नीतीश कुमार की विरासत निशांत कुमार संभाल लेंगे. निशांत जेडीयू को अच्छी तरह चला लेंगे और पार्टी में कोई फूट नहीं होगी. जो लोग पार्टी छोड़कर जाएंगे, उनके लिए रास्ता साफ हो जाएगा. निशांत जेडीयू को मजबूत बनाए रखेंगे और पार्टी को अच्छी तरह आगे बढ़ाएंगे. ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि जेडीयू टूट जाएगा.

जेडीयू से हो गई ये गलती
भोला जी ने बताया कि यह चुनाव बुद्धिजीवियों का चुनाव है. फिलहाल जो स्थिति बनी हुई है, उससे जेडीयू में टूट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. वे लोग जबरन किसी खास व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना चाहते हैं. जब आपकी सरकार है, तो आप किसी नए चेहरे को मौका दे सकते थे. एक ही व्यक्ति को बार-बार मौका देने की क्या जरूरत है? क्या जेडीयू में दूसरे योग्य और बुद्धिजीवी लोग नहीं हैं? पार्टी में एक से बढ़कर एक योग्य लोग हैं. उनमें से किसी नए चेहरे को मौका दिया जाता, तो पूरी पार्टी खुश होती. एक ही व्यक्ति को बार-बार दोहराना ठीक नहीं है. जब आपस में विरोध हो गया है, तो पार्टी को नया चेहरा देना चाहिए था.

वर्चस्व की लड़ाई और पार्टी की चुप्पी खड़ी कर रही है संदेह
अरविंद सिन्हा ने बताया कि भले ही इसे आपसी लड़ाई कहा जा रहा है और लोग इसे मुद्दा बना रहे हैं, लेकिन यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है. नीरज कुमार और आनंद सिंह के बीच व्यक्तिगत विवाद को लोग पार्टी से जोड़कर देख रहे हैं. इससे कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं है. हालांकि, पार्टी की चुप्पी से जनता के मन में संदेह जरूर पैदा होता है. इससे यह आशंका हो सकती है कि जेडीयू में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. हम लोग तो जनता हैं और केवल घटनाक्रम को देख सकते हैं.

क्षेत्रीय पार्टियों का विलय होना रहा है ट्रेंड
उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश में क्षेत्रीय पार्टियों की स्थिति पर नजर डालें, तो तमिलनाडु समेत कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों को लंबे समय तक अस्तित्व बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. उनका मानना है कि क्षेत्रीय पार्टियां आमतौर पर 20 से 25 साल के बाद कमजोर पड़ने लगती हैं और कई दलों का दूसरे दलों में विलय हो जाता है. उन्हें लगता है कि जेडीयू भी इसी दौर से गुजर रहा है.



Source link