35 की उम्र और ₹4 करोड़ का पोर्टफोलियो, न कोई EMI न लोन, कैसे ये टेक प्रोफेशनल हुआ मालामाल

35 की उम्र और ₹4 करोड़ का पोर्टफोलियो, न कोई EMI न लोन, कैसे ये टेक प्रोफेशनल हुआ मालामाल


नई दिल्‍ली. आज के दौर में जहां ज्‍यादातर युवा 30-35 की उम्र वाले युवा होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड की भारी-भरकम ईएमआई के जाल में उलझे हैं, वहीं पुणे के 35 वर्षीय टेक प्रोफेशनल शुभ पाटिल ने ₹4 करोड़ का मजबूत वेल्थ पोर्टफोलियो बना डाला है. खास बात है कि उनके सिर न कोई लोन है और न ही वे हर महीने कोई ईएमआई भर रहे हैं. शुभ सेल्सफोर्स (Salesforce) में काम करते हैं और उनका सालाना पैकेज करीब ₹40 लाख है. हर महीने ₹70,000 की एसआईपी (SIP) करने वाले शुभ का अगला लक्ष्य 40 की उम्र तक ₹10 करोड़ का फंड बनाकर कॉरपोरेट नौकरी को बाय-बाय बोलकर किसी शांत छोटे शहर में सुकून की जिंदगी गुजारने का है.

शुभ ने 4 करोड़ का पोर्टफोलियो सैलरी बढ़ने के साथ ही सही मौकों को भुनाने से बना है. शुभ ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में की. उन्‍होंने पुणे से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद ₹3.9 लाख के पैकेज पर नौकरी शुरू की. दो साल बाद यानी 2015 में उन्‍होंने गूगल (Google) जॉइन किया. यहां इनका पैकेज बढ़कर ₹12 लाख हुआ. इसके बाद 2019 में माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) में चल गए जहां उनका पैकेज ₹29 लाख हो गया. इसके बाद उन्‍होंने सेलफोर्स ज्‍वाइन किया.एक दशक में सैलरी 10 गुना बढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने बढ़ी हुई कमाई को तुरंत खर्च करने के बजाय सीधे बचत और निवेश में झोंक दिया.

शौक भी किए पूरे, बचत भी रखी जारी

फाइनेंशियल टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अक्सर सैलरी बढ़ते ही लोग आलीशान घर, लग्जरी गाड़ियां और महंगे गैजेट्स लेते हैं. लेकिन शुभ ने लाइफस्टाइल क्रीप को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. आज भी उनका सालाना खर्च लगभग ₹14.4 लाख है. इसमें से करीब ₹8.4 लाख किराए, राशन और बुनियादी जरूरतों पर खर्च होते हैं, जबकि ₹6 लाख वे अपने शौक और घूमने-फिरने पर लगाते हैं. उनकी रणनीति कंजूसी में जीने की नहीं, बल्कि खर्च और भविष्य की आजादी के बीच संतुलन साधने की रही है. एक दशक से कुछ अधिक समय में उनकी सैलरी दस गुने से भी ज्यादा बढ़ गई. वह अपनी इस प्रगति का बड़ा श्रेय बेहतर अवसरों और ज्यादा वेतन वाली नौकरियां चुनने के फैसले को देते हैं. लेकिन ज्यादा कमाना कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है. उस पैसे को बचाना और निवेश करना भी उतना ही जरूरी था.

शुभ का कहना है कि वे समझ गए थे कि बचत की जल्दी शुरुआत करना जरूरी है. छोटी-छोटी बचत भी समय के साथ उपयोगी साबित हो सकती है. बचत शुरू करने के लिए सैलरी ₹10 लाख या ₹20 लाख सालाना होने का इंतजार नहीं करना चाहिए. शुरुआत में बचाई गई रकम छोटी हो सकती है, लेकिन नियमित रूप से पैसे अलग रखने की आदत भविष्य में बहुत काम आ सकती है.

कैसा है ₹4 करोड़ का वेल्थ पोर्टफोलियो?

शुभ ने किसी एक मल्टीबैगर शेयर या सट्टेबाजी के बजाय अपने फंड को कई सुरक्षित और ग्रोथ वाले एसेट्स में बांटा है-

  • भारतीय म्यूचुअल फंड: शुभ ने लगभग ₹1.2 करोड़ रुपये भारतीय म्‍यूचुअल फंड में लगाए हैं. वे मासिक ₹70,000 की SIP करते हैं. उन्‍होंने अपना 50% पैसा इंडेक्स फंड में, 25% स्मॉल-कैप और 25% फ्लेक्सी/मल्टी-कैप फंड में लगाया है.
  • प्राइवेअ कंपनी : अमेरिकी टेक कंपनी RSUs के करीब ₹1 करोड़ मूल्य के शेयर्स उनके पास है.
  • शेयर : शुभ ने ₹25 लाख भारतीय शेयरों में और ₹20 लाख अमेरिकी शेयरों में लगाए हैं.
  • रिटायरमेंट फंड: प्रोविडेंट फंड (PF) और NPS में करीब ₹40 लाख की जमा पूंजी.
  • नकदी : शुभ के पास लगभग ₹10 लाख भारतीय रुपये और करीब ₹65 लाख मूल्‍य के यूएस डॉलर कैश में हैं.

क्‍या है आगे का प्‍लान?

शुभ का सालाना प्रस्तावित रिटायरमेंट खर्च करीब ₹12 लाख है. उनके मौजूदा ₹4 करोड़ के पोर्टफोलियो का 3% विड्रॉल रेट ही सालाना ₹12 लाख बनता है, जो बिना अतिरिक्त कमाई के भी तीन दशकों से ज्यादा के खर्च को कवर कर सकता है. हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, भविष्य की महंगाई और बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए वे ₹10 करोड़ का फंड बनाना चाहते हैं.

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जीरो देनदारी का मिला फायदा

शुभ की वित्तीय स्थिति को जो बात सबसे मजबूत बनाती है, वह है परिवार की आर्थिक स्वतंत्रता. महाराष्ट्र के सतारा में साधारण शिक्षक परिवार में पले-बढ़े शुभ के पिता को हर महीने करीब ₹70,000 की पेंशन मिलती है. माता-पिता आर्थिक रूप से उन पर निर्भर नहीं हैं और न ही परिवार पर किसी तरह का कर्ज है. इस वित्तीय सुरक्षा कवच ने उन्हें खुलकर रिस्क लेने, हर महीने भारी बचत करने और 40 की उम्र में रिटायरमेंट का खाका खींचने की पूरी आजादी दी है.



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