विराट कोहली का रिकॉर्ड चकनाचूर…8वें से 11वें नंबर के बल्लेबाज के साथ 174 रन जोड़कर रेनशॉ ने बनाया महारिकॉर्ड

विराट कोहली का रिकॉर्ड चकनाचूर…8वें से 11वें नंबर के बल्लेबाज के साथ 174 रन जोड़कर रेनशॉ ने बनाया महारिकॉर्ड


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Matt Renshaw overtook Virat Kohli: ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मैथ्यू रेनशॉ ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन टेस्ट में 190 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. रेनशॉ साल 2002 के बाद से टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने इस मामले में भारतीय दिग्गज विराट कोहली के 2016 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. इस शानदार पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 390 रनों पर सिमट गई.

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डरबन के किंग्समीड मैदान पर दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे रोमांचक टेस्ट मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज मैथ्यू रेनशॉ ने अपनी शानदार बल्लेबाजी से इतिहास रच दिया है. रेनशॉ ने दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों का डटकर मुकाबला करते हुए अपने टेस्ट करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली और एक ऐसा बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया, जो अब तक भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के नाम दर्ज था. कोहली ने 10 साल पहले इस रिकॉर्ड को अपने नाम किया था.रेनशॉ ने इस ऐतिहासिक पारी से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

मैच के दूसरे दिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 390 रनों के कुल स्कोर पर सिमट गई. इस मैराथन पारी के दौरान मैथ्यू रेनशॉ (Matthew Renshaw) आखिरी विकेट के रूप में आउट होने वाले बल्लेबाज बने. उन्होंने अपनी इस पारी में अद्भुत संयम और तकनीक का परिचय देते हुए 397 गेंदों का सामना किया और 190 रनों की बेहतरीन पारी खेली, जिसमें 21 चौके और एक छक्का शामिल रहा.

जब मैथ्यू रेनशॉ बल्लेबाजी करने क्रीज पर उतरे थे, तब ऑस्ट्रेलियाई टीम शुरुआती झटकों के चलते मात्र 84 रनों पर अपने तीन महत्वपूर्ण विकेट गंवाकर गहरे संकट में फंसी हुई थी. टीम की स्थिति बेहद नाजुक थी, लेकिन रेनशॉ ने एक छोर को मजबूती से संभाले रखा और बिना किसी जल्दबाजी के सूझबूझ के साथ अपनी पारी को आगे बढ़ाया.

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इस 190 रनों की मैराथन पारी में से मैथ्यू रेनशॉ ने अकेले 174 रन निचले क्रम के बल्लेबाजों (टेलेंडर्स) के साथ साझेदारी करते हुए जोड़े. इसी के साथ उन्होंने विराट कोहली (Virat Kohli) के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो उन्होंने साल 2016 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ बनाया था, जहां कोहली ने 235 रनों की पारी के दौरान निचले क्रम के साथ 171 रन जोड़े थे.

रेनशॉ अब साल 2002 के बाद से टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज बन गए हैं. इस रिकॉर्ड को अपने नाम करने के साथ ही उन्होंने आधुनिक टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है, जिसे पार करना आने वाले समय में अन्य बल्लेबाजों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा.

अपनी इस रिकॉर्ड तोड़ पारी के दौरान मैथ्यू रेनशॉ को ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस का अच्छा साथ मिला. दोनों ने मिलकर आठवें विकेट के लिए 86 रनों की बहुमूल्य साझेदारी की, जिसमें रेनशॉ के बल्ले से 41 रनों का महत्वपूर्ण योगदान निकला, जिसने टीम को संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई.अपनी इस रिकॉर्ड तोड़ पारी के दौरान मैथ्यू रेनशॉ को ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस का अच्छा साथ मिला. दोनों ने मिलकर आठवें विकेट के लिए 86 रनों की बहुमूल्य साझेदारी की, जिसमें रेनशॉ के बल्ले से 41 रनों का महत्वपूर्ण योगदान निकला, जिसने टीम को संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई.

इसके बाद रेनशॉ ने तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क के साथ मिलकर 20 रनों की उपयोगी साझेदारी की, जिसमें उन्होंने 12 रन बनाए. भले ही यह साझेदारी छोटी थी, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखने के लिहाज से यह बेहद अहम साबित हुई.

पारी का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ तब आया जब रेनशॉ ने स्पिनर नाथन लियोन के साथ मिलकर 134 रनों की एक विशाल और ऐतिहासिक साझेदारी को अंजाम दिया. इस लंबी साझेदारी के दौरान रेनशॉ ने अकेले 100 रन जोड़े और स्कोरबोर्ड को तेजी से आगे बढ़ाया.

पारी के अंतिम चरण में रेनशॉ ने जोश हेजलवुड के साथ मिलकर भी 26 रनों की साझेदारी की, जिसमें उन्होंने 21 रन बटोरे. इन सभी छोटी-बड़ी साझेदारियों की बदौलत निचले क्रम के साथ उनके कुल रन 174 तक पहुंच गए और ऑस्ट्रेलिया सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने में सफल रहा.

पारी के अंतिम क्षणों में मैथ्यू रेनशॉ अपने पहले टेस्ट दोहरे शतक के बेहद करीब पहुंच चुके थे, लेकिन वह साइमन हार्मर का शिकार बन गए और अपने सपने से महज 10 रन दूर रह गए. हालांकि, आउट होने से पहले उन्होंने टीम के स्कोर को 390 तक पहुंचाया और उनका यह जुझारू शतक लंबे समय तक याद रखा जाएगा.



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