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Lemon Farming Success Story: मुजफ्फरपुर के श्रीकांत कुशवाहा ने दो नींबू के पौधों से खेती शुरू कर 4 कट्ठा जमीन में 17 किस्में उगाई हैं. वह नींबू और पौधों की नर्सरी से सालाना एक लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं.
मुजफ्फरपुर: मेहनत और खेती के प्रति लगन हो तो कम जमीन में भी अच्छी कमाई की जा सकती है. इसका उदाहरण मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड स्थित गोविंदपुर गांव के रहने वाले श्रीकांत कुशवाहा हैं. उन्होंने महज दो नींबू के पौधों से खेती की शुरुआत की थी. आज उनके बगीचे में 4 कट्ठा जमीन पर नींबू की करीब 17 अलग-अलग किस्में लगी हैं. श्रीकांत बताते हैं कि नींबू के फलों की बिक्री और पौधों की नर्सरी से उन्हें सालाना एक लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा होता है.
श्रीकांत कुशवाहा के मुताबिक उन्होंने साल 2002 में महज 50 रुपये में दो नींबू के पौधे खरीदे थे. शुरुआत में उन्होंने इन्हीं पौधों से नर्सरी तैयार की और धीरे-धीरे खेती का विस्तार किया. वर्तमान में उनके बगीचे में करीब 80 नींबू के पेड़ हैं. वह अलग-अलग जगहों से नींबू की नई किस्में लाकर उन्हें कलमबद्ध भी करते हैं. इसके बाद तैयार पौधों को बेचकर अतिरिक्त कमाई करते हैं.
अचार से लेकर नमकीन बनाने तक में काम आते हैं नींबू
श्रीकांत के बगीचे की खासियत यहां मिलने वाली नींबू की अलग-अलग किस्में हैं. इनमें खटुआ, जमीरी, पातू, काजरी, बनारसी काजरी और हजारा सहित करीब 17 प्रकार के नींबू शामिल हैं. इनका इस्तेमाल अचार, चटनी और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने में किया जाता है. कुछ किस्मों की मांग सालभर रहती है, जबकि कुछ की बिक्री खासकर पर्व-त्योहारों के दौरान बढ़ जाती है.
वह बताते हैं कि खटुआ नींबू का इस्तेमाल मिर्च के अचार और ओल की चटनी बनाने में किया जाता है. इसकी बाजार में आसानी से उपलब्धता नहीं होने के कारण खास मौकों पर इसकी मांग बढ़ जाती है. जमीरी नींबू का इस्तेमाल नमकीन बनाने में किया जाता है. इसकी खरीदारी लोग बड़ी मात्रा में भी करते हैं.
5 रुपये से लेकर 20 रुपये तक बिकता है एक नींबू
श्रीकांत ने बतलाया कि उनके बगीचे में उगने वाली अलग-अलग किस्मों के नींबू की कीमत भी अलग-अलग है. जमीरी नींबू करीब 5 रुपये प्रति पीस बिकता है. खटुआ नींबू पर्व-त्योहारों के दौरान व्यापारियों को लगभग 10 रुपये प्रति पीस तक बेचा जाता है. कुछ खास किस्मों के नींबू की कीमत 15 से 20 रुपये प्रति पीस तक पहुंच जाती है.
श्रीकांत कुशवाहा का कहना है कि नींबू की खेती से होने वाली कमाई के साथ कलमबद्ध पौधों की बिक्री भी उनके लिए आमदनी का जरिया है. वह ‘कुशवाहा हर्बल गार्डन’ के नाम से भी पहचाने जाते हैं. इसके अलावा जादू का शो करने के कारण क्षेत्र में लोग उन्हें ‘जादूगर जी’ के नाम से भी जानते हैं. दो पौधों से शुरू हुआ उनका यह सफर अब छोटे स्तर पर नींबू की विभिन्न किस्मों की खेती और नर्सरी तैयार करने की मिसाल बन गया है.