Last Updated:
पूर्णिया के सुशील सिंह 10 सालों से घुटनों के दर्द के कारण झुककर छड़ी के सहारे चलते थे. पटना के एआईओआर (AIOR) अस्पताल में डॉ. आशीष सिंह ने रोबोटिक तकनीक से उनके घुटनों की सफल सर्जरी की. इसके बाद सुशील बिना किसी सहारे के सीधे खड़े हो गए और सीढ़ियां चढ़ने लगे.
पटना: दस साल तक घुटनों के दर्द और झुककर चलने की मजबूरी झेलना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता. जब चलने के लिए छड़ी का सहारा लेना पड़े और रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हो जाए, तो सामान्य तरीके से चल पाना किसी सपने से कम नहीं लगता. लेकिन पूर्णिया के सुशील कुमार सिंह के लिए अब यही सपना हकीकत में बदलता नजर आ रहा है. दोनों घुटनों की गंभीर समस्या से परेशान सुशील कुमार सिंह ने पटना में इलाज कराया. रोबोटिक तकनीक से घुटनों की सर्जरी के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ है. दस सालों के बाद बिना किसी सहारे के जब सीधा खड़े हुए तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल आए. सर्जरी करने वाले डॉ. आशीष सिंह के गले से लिपट कर वो रोने लगे.
10 साल की परेशानी ने बदल दी थी चलने की जिंदगी
पूर्णिया के रहने वाले सुशील कुमार सिंह पिछले करीब दस वर्षों से घुटनों की समस्या से परेशान थे. स्थिति ऐसी हो गई थी कि उन्हें झुककर चलना पड़ता था और सहारे के लिए छड़ी का इस्तेमाल करना पड़ता था. दर्द की वजह से चलने-फिरने में होने वाली परेशानी ने उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर दिया था. परिवार के लोग लंबे समय से उन्हें बेहतर इलाज कराने की सलाह दे रहे थे. आखिरकार दर्द और परेशानी असहनीय हुई तो वे पटना के कंकड़बाग स्थित AIOR सुपर स्पेशियलिटी यूनिट पहुंचे और डॉ. आशीष सिंह से संपर्क किया.
दोनों घुटनों की स्थिति थी गंभीर, डॉक्टर ने अपनाई विशेष उपचार प्रक्रिया
डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि सुशील कुमार सिंह के दोनों घुटने काफी खराब तरीके से मुड़े हुए थे. उनकी स्थिति को देखते हुए मांसपेशियों में खिंचाव लाने के लिए दो दिनों तक ट्रैक्शन देने की सलाह दी गई, ताकि आगे की इलाज प्रक्रिया में मदद मिल सके. इसके बाद रोबोटिक तकनीक से घुटने का प्रत्यारोपण किया गया.
डॉक्टर ने बताया कि उपचार के दो दिनों के भीतर ही मरीज सीढ़ियां भी चढ़ने लगे. जबकि, सर्जरी के 12 घंटे बाद ही बहुत दिनों बाद सीधा खड़ा हुए वो भी बिना किसी सहारे के. उन्होंने कहा कि सर्जरी के बाद एक्सरसाइज़ और रिकवरी महत्वपूर्ण होती है.
रोबोटिक तकनीक से सर्जरी, रिकवरी पर भी जोर
डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि रोबोटिक तकनीक की मदद से घुटनों की सर्जरी करने पर कई मामलों में चीरा छोटा रखने, दर्द कम करने और मरीज को जल्द चलने-फिरने में मदद मिल सकती है. पारंपारिक सर्जरी के मुकाबले रोबोटिक तकनीक की वजह से रिकवरी बहुत तेज होती है. अस्पताल में लंबे समय तक रुके रहने का खर्च भी बचता है और मरीज जल्द ही अपनी दैनिक गतिविधियों में शामिल हो जाता है.
10वर्षों बाद सीधा खड़ा होकर खुशी से फूले नहीं समा रहे मरीज
इलाज के बाद जब सुशील कुमार सिंह से उनके अनुभव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बहुत अच्छा लग रहा है. उन्होंने बताया कि पहले घुटनों की वजह से चलने में काफी दिक्कत होती थी. झुककर चलना पड़ता था और छड़ी का सहारा लेना पड़ता था. लेकिन अब उन्हें अपने पैरों में सीधापन महसूस हो रहा है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है. दस वर्षों के बाद सीधा खड़ा हुआ हूं.
करीब दस वर्षों से चली आ रही परेशानी के बारे में उन्होंने कहा, “डॉक्टर साहब की मेहनत से तो एक दिन में मेरी परेशानी खत्म हो गई.”