कैद से बचने के लिए दुश्मन की सेना ही सही… आखिर रूस की तरफ से क्यों लड़ रहे यूक्रेन के सैनिक?


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कैद से बचने के लिए दुश्मन की सेना सही…रूस की तरफ से क्यों लड़ रहे यूक्रेनी?

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रूस-यूक्रेन के बीच रहे युद्ध में रूस की ओर से ऐसे सैनिक भी लड़ रहे हैं जो असल में यूक्रेन के युद्धबंदी हैं. इन्हें यूक्रेनी वॉलंटियर नाम दिया गया है. इन्हीं से सजी बटालियन मैक्सिम क्रिवोनोस सबसे ज्यादा चर्चा में है. आरोप है कि युद्धबंदियों को प्रताड़ित कर इसमें शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है.

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कैद से बचने के लिए दुश्मन की सेना सही...रूस की तरफ से क्यों लड़ रहे यूक्रेनी?Zoom

यूक्रेन पर रूस लगातार हमले कर रहा है. (सांकेतिक फोटो/Reuters)

रूस और यूक्रेन में हो रहे युद्ध के बीच एक ऐसी जानकारी सामने आई है जिसने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. सामने आया है कि रूस ने यूक्रेनी नागरिकों और पूर्व सैनिकों को शामिल करके एक नई बटालियन बनाई है. इन्हें यूक्रेनी वॉलंटियर्स कहा जा रहा है. आरोप ये है कि इस बटालियन में शामिल सैनिकों ने रूस की कैद से बचने के लिए अपने ही देश से लड़ाई का फैसला किया है.

जर्मनी मीडिया आउटलेट DW ने खुद इसकी पड़ताल करने का दावा किया है. एक रिपोर्ट में यूक्रेन के पूर्व सैनिक पावलो ओलिनिक की कहानी बताई गई है. इसमें दावा किया गया है कि संबंधित सैनिक ने रूस की सेना में शामिल होना इसलिए चुना था, क्योंकि वह रूस की कैद से भागना चाहता था. रिपोर्ट में ओलिनिक की ओर से ये भी दावा किया गया है कि रूस की कैद में उन्हें बिजली के झटके दिए गए थे, पीटा गया था और मानसिक तौर प्रताड़ित किया गया था.

क्या है पावलो ओलिनिक की कहानी?

पावलो ओलिनिक यूक्रेन के वोलिन में रहने वाले हैं. वह रूसी सेना के हाथों में पकड़े जाने जाने से पहले वरिष्ठ लेफ्टिनेंट थे. वह यूक्रेनी सेना की 101 वीं ब्रिगेड में तैनात थे. डोनबास इलाके में एक अक्टूबर 2024 को रूस की सेना से लड़ाई के दौरान वह गिरफ्तार कर लिए गए थे. ओलिनिक के हवाले से DW ने लिखा है कि रूस ने कैद में उनके साथ गलत व्यवहार किया गया.

उनके मुताबिक इसके बाद उन्हें मैक्सिम क्रिवोनोस बटालियन में शामिल होने का प्रस्ताव मिला. ओलिनिक के मुताबिक तीन बार इसे ठुकराने के बाद इसे स्वीकार कर लिया. ओलिनिक के मुताबिक उनका मकसद यूक्रेन से लड़ना नहीं बल्कि रूस की कैद से भागना था. उन्होंने रूसी रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों के बजाय सैन्य सेवा देने वाले व्यक्ति के साथ निजी अनुबंध साइन किए.

रूस ने यूक्रेनी सैनिकों को अलग-अलग बटालियन में क्यों रखा?

रूस ने 2022 में पहली बार यूक्रेनी सैनिकों की बटालियन बनाई थी. इनमें यूक्रेनी युद्धबंदियों और यूक्रेन के सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों को शामिल करने की बात कही गई है. इनमें सबसे ज्यादा ध्यान मैक्सिम क्रिवोनोस बटालियन ने खींचा था. यह नाम 17 वीं सदी के कौसेक कमांडर मैक्सिम क्रिवोनोस के नाम पर रखा गया था. बटालियन में कितने सैनिक हैं इस बात का खुलासा नहीं किया गया है.

यूक्रेन की तरफ से भी लड़ रहे रूस के सैनिक

रूसी विदेश नीति के एक्सपर्ट और रक्षा विशेषज्ञ पावेल लुज़िन के हवाले से DW ने लिखा है कि ये टुकड़ियां असल में सैन्य रणनीति का हिस्सा हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि पहले ये सामने आया था कि यूक्रेन की ओर से भी रूस के कई नागरिक लड़ाई लड़ रहे हैं. ऐसे में रूस की कोशिश हो सकती है कि वह यूक्रेन के प्रभाव को कम करे. लेखक येवगेन शिवालोव के हवाले से DW ने लिखा है कि रूस के लिए ये बड़ी समस्या थी कि यूक्रेन की ओर से रूस के नागरिक लड़ रहे हैं, जबकि यूक्रेन के नागरिक रूस की तरफ से ऐसा नहीं कर रहे. इसीलिए रूस की ओर से इस तरह की बटालियनों का गठन किया गया.

आखिर क्यों रूस को चुन रहे यूक्रेन के सैनिक?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय OHCHR की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में इंटरव्यू में शामिल 95 प्रतिशत से ज्यादा युद्धबंदियों ने रूसी हिरासत के दौरान प्रताड़ित किए जाने की जानकारी दी थी. इसमें बिजली के झटके देने तक के आरोप लगाए गए थे. अंतरराष्ट्रीय न्याय और जवाबदेही आयोग के कार्यकारी निदेशक बिल वाइली ने रूस से लौटे सैनिकों से बातचीत के आधार पर सवाल उठाए थे कि यूक्रेन के सैनिकों को रूस की सेना में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

यूक्रेन के सैनिकों पर कैसे भरोसा करता है रूस

ओलिनिक के मुताबिक मैक्सिम क्रवोनोस बटालियन में शामिल यूक्रेन के सैनिकों पर रूस एक निजी सैन्य कंपनी के आधार पर नजर रखता है. इन्हें लिफाफे में मासिक वेतन भी दिया जाता है. इन लोगों को फोन भी दिया गया है, लेकिन निगरानी इतनी सख्त है कि वे यूक्रेन में किसी को फोन करने से भी घबराते हैं. ओलिनिक के मुताबिक वह किसी तरह माच्र 2025 में भाग निकले थे. रूस की सेना में शामिल होने का उनका मकसद भी वही था.



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