अनंत सिंह समेत NDA के बागियों पर होगी कार्रवाई? बांकीपुर के बाद विधान परिषद की 8 सीटों पर NDA की अग्निपरीक्षा


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Opinion: बिहार विधान परिषद (MLC) का चुनाव एनडीए के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है. बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार की हार से एनडीए की खूब किरकिरी हुई थी. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार को हरा कर विधानसभा में अपनी पार्टी का खाता खोला. अगर एमएलसी चुनाव में भी एनडीए उम्मीदवारों के साथ ऐसा होता है तो इससे सबसे अधिक सम्राट चौधरी की छवि खराब होगी. पटना स्नातक सीट पर तो सम्राट के साथ नीतीश, निशांत, चिराग समेत तमाम लोगों की प्रतिष्ठा जुड़ गई है. जेडीयू से बागी हुए अनंत सिंह की ताकत की भी इस बार अगिनपरीक्षा है.

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NDA के बागियों पर होगी कार्रवाई? विधान परिषद की 8 सीटों पर NDA की अग्निपरीक्षाZoom

जदयू विधायक अनंत सिंह MLC चुनाव में जन सुराज प्रत्याशी की मदद कर रहे हैं.(फाइल फोटो)

बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव हो रहा है. नामांकन पत्र दाखिल हो चुके हैं. 23 अक्टूबर को मतदान होगा. 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे. चुनाव की यह सामान्य प्रक्रिया एनडीए की पार्टियों के कुछ नेताओं के बागी तेवर के कारण रोचक रूप ले चुकी है. पटना स्नातक सीट पर जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में जेडीयू विधायक अनंत सिंह खुल कर आ गए हैं. वे पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार को हराने के संकल्प के साथ जन सुराज के कैंडिडेट के लिए प्रचार भी कर रहे हैं. मान-मनौवल की अब तक की तमाम कोशिशें बेकार साबित हुई हैं. जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने अनंत सिंह को समझाने का जिम्मा पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और अभी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को सौंपा था. पर, वे भी नाकाम रहे हैं.

NDA में बागी उम्मीदवारों ने बढ़ाई टेंशन
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में भी बागी उम्मीदवारों ने अड़ियल रुख अपनाया है. उसके भी कुछ बागी उम्मीदवारों ने नामांकन किया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें अल्टीमेटम दिया है कि वे अपनी उम्मीदवारी वापस लें, वर्ना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. 8 सीटों के लिए करीब 150 लोगों ने नामांकन दाखिल किया है. नाम वापसी के बाद पता चलेगा कि सम्राट की चेतावनी का क्या असर होता है. यह भी कि एनडीए के बागी उम्मीदवारों के साथ क्या सलूक उनकी पार्टियां करती हैं. अंदरखाने की खबर है कि एनडीए में शामिल पार्टियां परिणाम आने तक इंतजार करेंगी. उसके बाद बागी उम्मीदवारों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई हो सकती है. इनमें सबके निशाने पर अनंत सिंह हैं, जिन्होंने जेडीयू नेतृत्व के आग्रह को ठुकरा कर जन सुराज उम्मीदवार का समर्थन किया है. सीएम सम्राट चौधरी की सलाह भी उन्होंने मानने से मना कर दिया है.

नीतीश के निर्णय को अनंत ने नहीं माना
नीरज कुमार को पटना स्नातक सीट से उम्मीदवार बनाने का निर्णय जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार का है. उन्होंने खुद अपने हाथों नीरज कुमार को पार्टी उम्मीदवारी का पत्र दिया था. नीतीश ने अनंत के विरोध पर भले कुछ नहीं कहा, लेकिन खुद पत्र सौंप कर यह स्पष्ट कर दिया है कि नीरज ही अधिकृत उम्मीदवार हैं. उनके खिलाफ अनंत सिंह का प्रचार पार्टी के निर्णय की अवहेलना है. संजय झा को उम्मीद थी कि ललन सिंह के मनाने पर अनंत सिंह मान जाएंगे. ललन सिंह ने इसकी कोशिश की या नहीं, यह तो वे ही जानें, लेकिन अनंत सिंह अब भी अनुज सिंह के प्रचार में घूम रहे हैं.

चिराग पासवान भी करेंगे नीरज का प्रचार
एनडीए में स्नातक और शिक्षक कोटे की 8 सीटें 2 दलों में बांटी गई हैं. जेडीयू और भाजपा ने बराबर-बराबर सीटें ली हैं. दोनों बिहार में एनडीए के बड़े दल हैं. इसलिए सभी सीटों पर जीत एनडीए की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. सभी आधिकारिक उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की बैठक भी हो चुकी है. आठों सीटों में सर्वाधिक चर्चा पटना स्नातक सीट को लेकर हो रही है. इसलिए कि जेडीयू के अधिकृत उम्मीदवार का विरोध पार्टी के ही एक विधायक कर रहे हैं. जेडीयू उम्मीदवार के लिए नीतीश कुमार के बेटे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी-आर के सांसद अरुण पासवान प्रचार में निकलने वाले हैं. उसके बाद चिराग पासवान भी पटना स्नातक सीट के मतदाताओं को रिझाने निकलेंगे.

नीतीश से प्रेम, पर उनका फैसला ऩामंजूर
नीतीश कुमार के प्रति अनंत सिंह अपना प्रेम तो जताते हैं, पर वे उनका फैसला भी नहीं मान रहे. कहते हैं कि नीतीश कुमार के कारण वे भले लंबे समय तक जेल में रहे, लेकिन उनके कामकाज और व्यवहार से वे प्रभावित हैं. अनंत का नीतीश प्रेम ऐसा रहा है कि उन्होंने निशांत को उनकी जगह बिठाने की मांग की थी. इसके बावजूद नीतीश द्वारा नामित एमएलसी उम्मीदवार नीरज कुमार को वे स्वीकार नहीं करते. उनका कहना है कि नीरज ने उन्हें हराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी. इसलिए वे भी ऐसा करने में पीछे नहीं रहेंगे. एनडीए की बैठक में बागियों के खिलाफ सख्त चेतावनी पर उनकी सामान्य प्रतिक्रया है कि बैठकें तो होती ही रहती हैं. इससे इतना तो साफ ही हो गया है कि जेडीयू में अब नीतीश का निर्णय पूर्व की तरह अकाट्य नहीं रह गया है.

बांकीपुर उपचुनाव के बाद महत्वपूर्ण चुनाव
बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार की हार से एनडीए की खूब किरकिरी हुई थी. यह सीट पारंपरिक रूप से भाजपा की थी. खास बात यह थी कि भाजप के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इस सीट से आखिरी बार विधायक बने थे. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार को हरा कर विधानसभा में अपनी पार्टी का खाता खोला. नीतीश कुमार ने भी भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में आडियो-वीडियो प्रचार किया था. सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद बिहार में यह पहला चुनाव था. अगर एमएलसी चुनाव में भी एनडीए उम्मीदवारों के साथ ऐसा होता है तो इससे सबसे अधिक सम्राट चौधरी की छवि खराब होगी. यही वजह है कि इस बार एनडीए सभी सीटें जीतने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता है. पटना स्नातक सीट पर तो सम्राट के साथ नीतीश, निशांत, चिराग समेत तमाम लोगों की प्रतिष्ठा जुड़ गई है. जेडीयू से बागी हुए अनंत सिंह की ताकत की भी इस बार अग्निपरीक्षा होगी.



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