लखीमपुरः घर की छत में दरार पड़ना और बारिश के दौरान पानी टपकना एक आम समस्या है. कई बार छत से पानी रिसने के कारण कमरों की दीवारों पर सीलन आ जाती है, पेंट उखड़ने लगता है और प्लास्टर भी खराब होने लगता है अगर आपके घर की छत में भी दरारें पड़ गई हैं और आप सीलन से परेशान हैं, तो समय रहते इसकी मरम्मत कराना जरूरी है छत की सही तरीके से वॉटरप्रूफिंग कराने से पानी के रिसाव को रोकने और घर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.
छत में दरार पड़ने के क्या हैं कारण
छत में दरार आने के कई कारण हो सकते हैं. मौसम में बदलाव, गर्मी और सर्दी के कारण कंक्रीट का फैलना और सिकुड़ना, निर्माण के दौरान उचित सामग्री का इस्तेमाल न होना, छत पर पानी जमा रहना और समय के साथ निर्माण सामग्री का कमजोर होना इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं. कई बार छत पर पानी की निकासी सही नहीं होने से भी समस्या बढ़ जाती है गर्मियों में तेज धूप के कारण छत का तापमान बढ़ता है, जबकि बारिश में छत ठंडी हो जाती है. तापमान में बार-बार होने वाले बदलाव से कंक्रीट में बारीक दरारें विकसित हो सकती हैं. शुरुआत में ये दरारें छोटी दिखाई देती हैं, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं होने पर इनके जरिए पानी अंदर पहुंचने लगता है.
छत पर सीलन आने से क्या होता है नुकसान
छत से पानी रिसने की समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है पानी के लगातार संपर्क में रहने से दीवारों पर नमी बढ़ सकती है इससे पेंट खराब होने, प्लास्टर उखड़ने और घर के अंदर फफूंद विकसित होने की आशंका रहती है लगातार नमी रहने से कमरे में बदबू भी आने लगती है
अगर छत के आसपास बिजली की वायरिंग या विद्युत उपकरण हैं, तो पानी के रिसाव से बिजली के झटके और शॉर्ट सर्किट का खतरा भी पैदा हो सकता है इसलिए छत में दरार दिखाई देने पर केवल ऊपर से रंग-रोगन कराना पर्याप्त नहीं है समस्या की असली वजह का पता लगाकर मरम्मत कराना जरूरी है
क्या है छत की वॉटरप्रूफिंग
वॉटरप्रूफिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें छत पर पानी के प्रवेश को रोकने के लिए विशेष सामग्री या सुरक्षात्मक परत लगाई जाती है इसका उद्देश्य बारिश के पानी को कंक्रीट के अंदर जाने से रोकना और छत से होने वाले रिसाव को कम करना है छत की स्थिति, दरारों के प्रकार और पानी जमा होने की समस्या के अनुसार अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. बाजार में सीमेंट आधारित वॉटरप्रूफिंग, लिक्विड वॉटरप्रूफिंग मेम्ब्रेन और अन्य सुरक्षात्मक कोटिंग उपलब्ध हैं हालांकि, हर छत के लिए एक ही तरीका उपयुक्त नहीं होता सही सामग्री का चुनाव छत की बनावट और उसकी मौजूदा स्थिति को देखकर करना चाहिए.
वॉटरप्रूफिंग कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
छत की सफाई कराएं सबसे पहले छत से धूल, मिट्टी, काई और अन्य गंदगी को अच्छी तरह साफ कराएं सतह पर गंदगी रहने से वॉटरप्रूफिंग सामग्री ठीक से चिपक नहीं पाती है. छत में आई दरारें कितनी गहरी हैं और उनका कारण क्या है, इसकी जांच कराना जरूरी है। सामान्य बारीक दरारों और संरचनात्मक दरारों की मरम्मत का तरीका अलग होता है.छत पर बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है, तो रिसाव की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए नालियों और पानी निकलने वाले रास्तों की सफाई कराएं वॉटरप्रूफिंग सामग्री को निर्माता के निर्देशों के अनुसार लगाना चाहिए। सतह की तैयारी, परतों की संख्या और सूखने का समय सही होना जरूरी है
वॉटरप्रूफिंग कराने में कितना आता है खर्च
छत की वॉटरप्रूफिंग का खर्च कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें छत का कुल क्षेत्रफल, दरारों की स्थिति, इस्तेमाल होने वाली सामग्री, मजदूरी और मरम्मत की जरूरत शामिल है। सामान्य कोटिंग की लागत और व्यापक मरम्मत के साथ कराई जाने वाली वॉटरप्रूफिंग की लागत अलग-अलग होती है
बातचीत करते हुए अंशुल शुक्ला बताते हैं कि कई बार लोग अपना मकान बनाते हैं परंतु कुछ दिन बाद अचानक छतों पर दरारें दिखाई देने लगते हैं वही धीरे-धीरे सीलन की समस्या बढ़ जाती है ऐसे में भीषण गर्मी के प्रकोप में भी छत का टेंपरेचर बढ़ जाता है. इन सभी समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप छत पर वॉटरप्रूफिंग का कार्य कर सकते हैं वाटर प्रूफिंग के माध्यम से सीलन, भीषण गर्मी के मौसम में गर्मी से राहत जैसी कई समस्याओं से आपको छुटकारा मिल सकता है वॉटरप्रूफिग करने के लिए अधिक खर्चों की आवश्यकता भी नहीं होती है. छतों की साफ सफाई कराकर आप वॉटरप्रूफिग कर सकते हैं.