Last Updated:
Cancer Medicine Price On Public Opinion: कैंसर की दवाइयों पर 20 से 70 प्रतिशत तक छूट देने के प्रस्ताव को लेकर आम लोगों में राहत की उम्मीद है. भीलवाड़ा के आजाद नगर निवासी हिमांशु शर्मा का कहना है कि कैंसर मरीजों को शारीरिक और मानसिक परेशानी के साथ इलाज के भारी खर्च का भी सामना करना पड़ता है. दवाइयां सस्ती होने से मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है.
भीलवाड़ा: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ना किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं होता. जहां एक तरफ कैंसर जैसी महंगी बीमारी मरीज को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ कर रख देती हैं तो वहीँ दूसरी तरफ महंगी दवाओं का खर्च कई बार उनके परिवार की आर्थिक कमर भी तोड़ देता है. लेकिन अब कैंसर के मरीजों को दवाओं के खर्च में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है. केंद्र सरकार ने कैंसर की कुछ दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसका सीधा फायदा मरीजों की जेब पर पड़ सकता है. इस कदम से कई कैंसर दवाओं की कीमतें 20 से 70 प्रतिशत तक कम हो सकती हैं.
अगर ऐसा होता है, तो मरीजों को महंगे इलाज के बीच दवाओं के लिए पहले की तुलना में काफी कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे. वही इसको लेकर LOCAL 18 की टीम ने जब भीलवाड़ा के स्थानीय व्यापारियों और लोगों से बात की तो उन्होंने इस पहल को शहर आते हुए इस कदम को अच्छा बताया है और परिवार का आर्थिक बोझ भी काम होगा.
फाइनेंशियल बोर्ड कैंसर पीड़ित के परिवार पर काम होगा
भीलवाड़ा के आजाद नगर निवासी हिमांशु शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कैंसर की दवाइयों पर 20 से 70% की छूट का प्रस्ताव लाया गया है. इसमें आम नागरिक को बहुत बड़ा फायदा होगा. शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से जो कैंसर से पीड़ित होते हैं उससे तो परेशान होते ही हैं. लेकिन उनके परिजन भी फाइनेंशियल रूप से अधिक परेशान हो जाते हैं क्योंकि कैंसर की दवाई खरीदने में काफी हद तक पैसा खर्च हो जाता है. कैंसर की दवाइयों को खरीदने में उनको बहुत बड़ी परेशानी होती है. बहुत महंगी दवाइयां आती हैं. सरकार का यह फैसला आम आदमी के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि दवाइयां में छूट मिलने से फाइनेंशियल बोर्ड कैंसर पीड़ित के परिवार पर काम होगा.
इन चीज़ों की दवाइयों की रेटें भी कम करनी चाहिए
मेडिकल व्यापारी नवल सिंह सुराणा ने लॉकल 18 से खास बात करते हुए बताया कि सरकार ने यह जो कदम उठाया है. 70% तक कैंसर की दवाइयों की रेटें कम करने निर्णय लिया है औऱ यह काफी सराहनीय प्रयास है क्योंकि कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो न तो गरीब को देखती है, न अमीर को देखती है. लेकिन जिस परिवार में ये जाती है, उस परिवार वाले को कैसे भी करके अपने पैसों का इंतज़ाम करना पड़ता है. चाहे वो अपना ज़मीन गिरवी रखे, चाहे पैसा ब्याज पर लेवे या अपना घर-बार बेचे, फिर भी उसको राहत नहीं मिलती है. लेकिन 70% तक रेट कम होना काफी हद तक जो गरीब लोग हैं उनके लिए काफी मायने रखेगा यह ताकि वो अपने जो परिवारजन हैं, उनका सही ढंग से इलाज करा सकेंगे. प्रयास काफी सराहनीय है लेकिन सरकार को इसके साथ में ही कैंसर के अलावा भी जो रेगुलर बीमारियां चलती हैं, जैसे बीपी , हार्ट , शुगर है. इन दवाओं की रेटें भी कम करनी चाहिए. क्योंकि यह भी ज़िंदगी के साथ चलती हैं न तो बीपी की कभी दवाई ख़त्म होती है, न शुगर की दवाई कभी ख़त्म होती है. तो सरकार को कैंसर के साथ में ही इन चीज़ों की दवाइयों की रेटें भी कम करनी चाहिए.
दवाइयों पर 20 से लेकर 70% तक की छूट दी जा रही
स्थानीय निवासी गौरव औऱ जोधपुर निवासी नरेंद्र ने लॉकल 18 से बात करते हुए बताया कि केंद्र सरकार का ये जो फैसला हैं जिसमें दवाइयों पर 20 से लेकर 70% तक की छूट दी जा रही हैं यह मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बहुत सुकून है. क्योंकि कैंसर जो रोग है, वह केवल मानसिक रूप से ही प्रताड़ित नहीं करता, शारीरिक रूप से भी नहीं करता, आर्थिक रूप से भी मध्यमवर्गीय परिवार की कमर तोड़ देता है. इसमें इस तरह की छूट आम आदमी को संबल प्रदान करेगी इसके अंदर लोगों बहुत राहत मिलेगी. इसलिए यह केंद्र का बहुत बढ़िया और सराहनीय कदम है. आने वाले समय में और भी अधिक छूट की और अन्य जांच जो होती है कैंसर की महंगी-महंगी, उनमें भी रियायत मिले, इस तरह की हम आशा करते हैं.