400 साल पुराना माता का अनोखा मंदिर, दीवार के पीछे जाकर मांगी जाती है मन्नत
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में स्थित करीब 400 साल पुराने माता मंदिर में दीवार के पीछे जाकर मन्नत मांगने की अनोखी परंपरा है। दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.दिर के पुजारी योगेश तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि रेणुका माता का प्राचीन मंदिर हैं. इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं. यहां दीवार के पीछे जाकर मन्नत मांगने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है.
मध्यप्रदेश में माता का एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां मन्नत मांगने की परंपरा श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखती है. इस मंदिर में माता के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं. मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां दीवार के पीछे जाकर मन्नत मांगने की परंपरा निभाई जाती है. करीब 400 साल पुराने इस मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है.
दीवार के पीछे मन्नत मांगने की अनोखी परंपरा
लोकल 18 की टीम को मंदिर के पुजारी योगेश तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि रेणुका माता का प्राचीन मंदिर हैं. इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं. यहां दीवार के पीछे जाकर मन्नत मांगने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन और श्रद्धा से माता से प्रार्थना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी मान्यता के चलते मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.
संतान से लेकर विवाह और व्यापार तक की मन्नत
मंदिर में आने वाले भक्त अलग-अलग इच्छाओं के साथ माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं. कोई संतान प्राप्ति की कामना करता है. तो कोई विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने की प्रार्थना करता है. वहीं कई श्रद्धालु अपने व्यापार में तरक्की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता से आशीर्वाद मांगते हैं.भक्त मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की उम्मीद के साथ माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं.
400 साल पुरानी मान्यता आज भी कायम
करीब चार शताब्दियों पुराने इस मंदिर की विशेष परंपरा आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. समय बदलने के साथ लोगों की जीवनशैली में कई बदलाव आए हैं लेकिन मंदिर से जुड़ी आस्था और मन्नत मांगने की परंपरा आज भी कायम है. दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि विश्वास और उम्मीद का केंद्र भी है.माता के प्रति अटूट श्रद्धा, दीवार के पीछे मन्नत मांगने की अनोखी परंपरा और मंदिर से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यता इसे खास बनाती है. यह मंदिर भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.