20 दिनों में 7 मौत, यूपी पुलिस-होमगार्ड भर्ती की दौड़ में क्यों हो रही अभ्यर्थियों की मौत?

20 दिनों में 7 मौत, यूपी पुलिस-होमगार्ड भर्ती की दौड़ में क्यों हो रही अभ्यर्थियों की मौत?


UP Police and Home Guard Recruitment: सरकारी नौकरी पाने के लिए देश के युवा दिन-रात मेहनत करते हैं. लिखित परीक्षा पास करने के बाद फिजिकल टेस्ट की तैयारी में भी अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश में पुलिस और होमगार्ड भर्ती की दौड़ के दौरान या उसके बाद 7 अभ्यर्थियों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच मेरठ, लखनऊ, मुरादाबाद और गाजियाबाद से ये मामले सामने आए हैं. शुरुआती जानकारी में कुछ मौतों की वजह हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट बताई गई, जबकि एक मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दम घुटने की बात सामने आई. ऐसे में सवाल है कि दौड़ के दौरान अचानक तबीयत क्यों बिगड़ सकती है और अभ्यर्थियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

सवाल 1: दौड़ते समय अचानक मौत क्यों हो सकती है?

दौनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, दौड़ते समय शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है. दिल तेजी से धड़कता है और मांसपेशियों तक ज्यादा खून पहुंचाना पड़ता है. अगर इस दौरान दिल की धड़कन बिगड़ जाए या पहले से मौजूद कोई बीमारी सामने आ जाए, तो गंभीर स्थिति बन सकती है.

ध्यान दें कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही चीज नहीं हैं. हार्ट अटैक में दिल तक खून पहुंचने में रुकावट आती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक खून पंप करना बंद कर देता है. हार्ट अटैक भी कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकता है.

मेरठ में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के एथलेटिक्स कोच गौरव त्यागी के अनुसार, बिना पर्याप्त अभ्यास के अचानक तेज दौड़ना शरीर पर ज्यादा दबाव डाल सकता है. इसके अलावा, कुछ लोगों को दिल की बीमारी पहले से होती है, लेकिन उन्हें इसका पता नहीं चलता. हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM) जैसी बीमारी में दिल की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं. कुछ मामलों में ज्यादा मेहनत के दौरान गंभीर परेशानी हो सकती है.

सवाल 2: गर्मी और उमस से कैसे बढ़ सकता है खतरा?

गर्मी और उमस में दौड़ने से शरीर का तापमान बढ़ता है और पसीने के जरिए पानी व जरूरी लवण निकलते हैं. अगर इनकी भरपाई न हो, तो डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है. इससे चक्कर, कमजोरी और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बहुत ज्यादा गर्मी में हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है.

कुछ युवा स्टैमिना बढ़ाने के लिए एनर्जी ड्रिंक्स, कैफीन की गोलियां या सप्लीमेंट्स लेते हैं. लेकिन कुछ उत्पाद दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के इनका इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है. हालांकि, गर्मी, पानी की कमी या किसी दवा को इन मौतों की निश्चित वजह नहीं माना जा सकता. इसके लिए हर मामले की मेडिकल जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जरूरी है.

सवाल 3: क्या भर्ती के इंतजामों पर भी उठे सवाल?

मेरठ में 15 सितंबर को होमगार्ड भर्ती की दौड़ के बाद कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई थी. कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि मैदान में पानी, ग्लूकोज, डॉक्टर और एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. अभ्यर्थियों के मुताबिक, दौड़ सुबह करीब 9:40 बजे शुरू हुई, जब गर्मी और उमस परेशानी बढ़ा सकती थी.

हालांकि, भर्ती बोर्ड ने इन आरोपों को लेकर जांच की बात कही थी. मेरठ में परीक्षा के नोडल अधिकारी और एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने अभ्यर्थियों की मौत के कारणों और फिजिकल टेस्ट के दौरान किए गए इंतजामों की रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी दी थी.

किसी भी फिजिकल टेस्ट में पर्याप्त पानी, मेडिकल टीम, एंबुलेंस और आपातकालीन इलाज की व्यवस्था जरूरी है. अगर कोई उम्मीदवार अचानक गिर जाए या सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो तुरंत मेडिकल सहायता मिलनी चाहिए.

सवाल 4: दौड़ के नियमों में क्या बदलाव हुआ?

होमगार्ड भर्ती में पुरुष उम्मीदवारों को 4.8 किलोमीटर की दौड़ 28 मिनट में और महिला उम्मीदवारों को 2.4 किलोमीटर की दौड़ 16 मिनट में पूरी करनी होती है. यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में पुरुषों के लिए 4.8 किलोमीटर की दौड़ 25 मिनट में और महिलाओं के लिए 2.4 किलोमीटर की दौड़ 14 मिनट में पूरी करने का नियम है.

मेरठ में मौतों के बाद दौड़ का समय बदलकर सुबह ही प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश की गई थी. उम्मीदवारों को निर्धारित समय से पहले बुलाने और दोपहर से पहले दौड़ कराने पर जोर दिया गया. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह स्थानीय स्तर पर किया गया बदलाव था. दौड़ की दूरी और समय में बदलाव की कोई नई आधिकारिक गाइडलाइन सामने नहीं आई थी.

सवाल 5: फिजिकल टेस्ट से पहले अभ्यर्थी क्या सावधानी बरतें?

सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट ने फिजिकल टेस्ट से पहले स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार, ब्लड प्रेशर, ईसीजी और हीमोग्लोबिन जैसी जांच कराई जा सकती हैं. जिन उम्मीदवारों को सीने में दर्द, चक्कर या दौड़ते समय असामान्य सांस फूलने की परेशानी होती है, उन्हें डॉक्टर से सलाह लिए बिना तेज दौड़ नहीं लगानी चाहिए.

दौड़ की तैयारी धीरे-धीरे करें. लंबे समय तक अभ्यास न करने के बाद अचानक पूरी दूरी तेज गति से दौड़ने से बचें. पर्याप्त पानी पिएं और गर्मी में शरीर में पानी की कमी न होने दें. दौड़ से पहले केला, दलिया जैसे हल्के खाद्य पदार्थ लिए जा सकते हैं. पर्याप्त नींद लें और स्टैमिना बढ़ाने के लिए बिना सलाह के दवाओं या सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल न करें.

अगर दौड़ के दौरान कोई अभ्यर्थी बेहोश हो जाए, तो उसे केवल पानी पिलाकर होश में लाने की कोशिश न करें. साथ ही तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाएं.

सवाल 6: किन 7 अभ्यर्थियों की मौत हुई?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन सात अभ्यर्थियों की मौत के मामले सामने आए हैं.

1. अंकुज मलिक: पूर्व सैनिक थे और करीब 17 साल सेना में सेवा दे चुके थे. मेरठ में दौड़ पूरी करने के बाद वह बेहोश हुए और इलाज के दौरान मौत हो गई. उपलब्ध जानकारी में हार्ट अटैक बताया गया.

2. तरुण कुमार: मेरठ में 15 सितंबर को दौड़ के बाद तबीयत बिगड़ी. अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई.

3. सचिन कुमार: मेरठ में दौड़ के दौरान बेहोश हुए. कई दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद 20 सितंबर को मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, मल्टी-ऑर्गन फेलियर की बात सामने आई.

4. योगेंद्र सिंह: लखनऊ में दौड़ के दौरान गिर पड़े. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दम घुटने की वजह बताई गई. रिपोर्ट के मुताबिक, उनके गले में प्लास्टिक की बोतल फंसी थी.

5. शिवम यादव: मुरादाबाद में 18 सितंबर को फिनिश लाइन से करीब 50 मीटर पहले बेहोश हुए. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पोस्टमॉर्टम में हार्ट अटैक बताया गया.

6. अतुल कुमार: 5 अक्टूबर को गाजियाबाद में यूपी पुलिस भर्ती की दौड़ के दौरान मौत हुई. शुरुआती जानकारी में ब्लड शुगर कम होने की बात कही गई थी.

7. विवेक कुमार राणा: 6 अक्टूबर को गाजियाबाद में दौड़ के नौवें चक्कर के दौरान गिर पड़े. शुरुआती जानकारी में कार्डियक अरेस्ट और गंभीर डिहाइड्रेशन की आशंका जताई गई.

इन मामलों में मौत की परिस्थितियां अलग-अलग थीं. इसलिए हर घटना की सही वजह जानने के लिए संबंधित मेडिकल रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है.

युवाओं की सुरक्षा सबसे जरूरी

पुलिस और होमगार्ड भर्ती की दौड़ में सफलता के लिए अभ्यास और मेहनत जरूरी हैं, लेकिन सेहत की अनदेखी करना भारी पड़ सकता है. उम्मीदवारों को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार तैयारी करनी चाहिए. वहीं, भर्ती कराने वाली एजेंसियों को मौसम के अनुकूल समय, पानी, मेडिकल टीम और आपातकालीन इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए. फिजिकल टेस्ट में सिर्फ समय पर दौड़ पूरी करना ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है.



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