‘मैं तुमको पैसे नहीं दे पाऊंगा’, इस कल्ट मूवी के लिए रेखा ने नहीं ली थी फीस, मगर झटक लिया था नेशनल अवॉर्ड


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रेखा के करियर में 45 साल पहले आई एक फिल्म ने उन्हें भारतीय सिनेमा के शिखर पर पहुंचा दिया. फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही जब निर्देशक ने सीधे शब्दों में कह दिया था कि वह फीस नहीं दे पाएंगे, तब एक्ट्रेस ने पीछे हटने के बजाय बिना एक रुपये की फीस लिए इस प्रोजेक्ट को चुना. पर्दे पर दर्द और नजाकत से पिरोया गया उनका अभिनय इतना असरदार साबित हुआ कि बिना फीस काम करने के बावजूद उन्हें इस किरदार के लिए सीधे नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया.

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45 साल पुरानी मूवी के लिए रेखा ने नहीं ली थी फीस, मगर झटक लिया था नेशनल अवॉर्डZoom

रेखा ने बिना फीस लिए फिल्म में किया था काम. (फोटो साभार: IMDb)

नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्ट्रेस रेखा के करियर में 1981 में आई फिल्म ‘उमराव जान’ एक ऐसा मील का पत्थर साबित हुई, जिसने उन्हें भारतीय सिनेमा की टॉप हीरोइनों में शुमार कर दिया. दर्द, मोहब्बत और तन्हाई के रंगों में डूबे इस किरदार को रेखा ने पर्दे पर इस कदर जीवंत किया कि ‘उमराव जान’ का नाम आते ही उनका चेहरा आंखों के सामने तैर जाता है. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इस कल्ट फिल्म के लिए रेखा ने निर्देशक मुजफ्फर अली से एक रुपये की फीस भी नहीं ली थी. आज रेखा अपना जन्मदिन मना रही हैं और इस मौके हम आपको बताते हैं कि ‘उमराव जान’ के लिए उन्होंने क्यों हामी भरी.

जून 2025 में फिल्म ‘उमराव जान’ की री-रिलीज के मौके पर निर्देशक मुजफ्फर अली ने एक इंटरव्यू दिया था. इस बातचीत में रेखा की फीस से जुड़ा सवाल भी पूछा गया. निर्देशक ने कहा कि ये दिल के मामले हैं. रेखा का दिल इस किरदार पर आ गया था और वह इसके लिए कोई कीमत तय नहीं करना चाहती थीं. मुजफ्फर अली ने बताया, ‘उमराव जान के किरदार के लिए रेखा मेरी पहली पसंद थीं. मेरे मन में इस किरदार की एक तस्वीर थी, जो रेखा ही पर्दे पर सही तरीके से उतार सकती थी. उनकी आंखों में एक खास तरह की गहराई थी. वह एक ही पल में टूटने और फिर संभलने वाले भावों को अपने चेहरे पर दिखा सकती है. इसी वजह से इस किरदार के लिए उन्हें चुना गया.’

रेखा ने ‘उमराव जान’ के लिए जीता नेशनल अवॉर्ड

बताया जाता है कि फिल्म में रेखा को कास्ट करने के लिए मुजफ्फर अली पत्नी सुभाषिनी के साथ रेखा की मां के पास पहुंचे थे और उन्‍हें बताया कि वह ‘उमराव जान’ फ‍िल्‍म बनाना चाहते हैं लेकिन फीस नहीं दे पाएंगे. रेखा जब घर आईं तो मां ने उनके सामने ये बात रख दी. इसके बाद रेखा कहानी पर बात करने के लिए उनसे मिलीं और कहानी में खो गईं. निर्देशक ने रेखा से कहा कि मैं तुम्‍हें फीस तो नहीं दे पाऊंगा, लेकिन इस फ‍िल्‍म से आपको अमर कर दूंगा. इस फिल्म के लिए रेखा को बेस्ट एक्ट्रेस का राष्ट्रीय फ‍िल्‍म पुरस्‍कार मिला.

किरदार में ढलने के लिए रेखा ने की खूब मेहनत

इंटरव्यू में मुजफ्फर अली ने बताया, ‘रेखा ने उमराव जान के किरदार में ढलने के लिए शायरी पर खास ध्यान दिया. फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले शायरी पर काम करीब एक साल पहले ही शुरू हो गया था. शायरी इस फिल्म की कहानी को समझने का अहम जरिया थी. रेखा ने कविता और शायरी के जरिए किरदार की भावनाओं को समझा. फिल्म में उनकी अदायगी, बोलने का अंदाज और चेहरे के भाव इसी तैयारी का हिस्सा थे.’

1981 में रिलीज हुई थी ‘उमराव जान’ फिल्म

गौरतलब है कि फिल्म में रेखा ने अमीरन का किरदार निभाया था, जो हालात के कारण उमराव जान बन जाती है. उसकी जिंदगी में कई मुश्किलें आती हैं, लेकिन वह अपनी कला, शायरी और अदायगी के जरिए अपनी पहचान बनाती है. ‘उमराव जान’ मिर्जा हादी रुसवा के 1899 में प्रकाशित उर्दू उपन्यास ‘उमराव जान अदा’ पर आधारित थी. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, फारूक शेख और राज बब्बर जैसे सितारे भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. संगीत खय्याम ने दिया था और गानों में आवाज आशा भोसले ने दी थी. यह मूवी साल 1981 में रिलीज हुई थी.



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