अंग्रेजों के फंडे से पाकिस्तान के शहंशाह बनेंगे आसिम मुनीर? टुकड़े करके नक्शा बदलने की सनक, राज क्या

अंग्रेजों के फंडे से पाकिस्तान के शहंशाह बनेंगे आसिम मुनीर? टुकड़े करके नक्शा बदलने की सनक, राज क्या


Asim Munir Plan for Pakistan: आपने अंग्रेजों की गुलामी वाले भारत में बांटो और राज करो का फंडा सुना होगा. इतिहास की किताब में कुछ और पीछे जाने पर इस मुहावरे की हकीकत नजर आती है. ग्रीक इतिहास के प्रसिद्ध मैकडोनिया साम्राज्य के राजा फिलीप ने इस डिवाइड और रूल यानी कि फूट डालो और राज करो का मुहावरा गढ़ा था. उस समय से लेकर आज तक तानाशाह अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए इसी रणनीति का इस्तेमाल करते आए हैं. पाकिस्तान के रहनुमा बनने की फिराक में लगे आर्मी चीफ आसिम मुनीर अब इस बात को अमली जामा पहनाने की कोशिश में हैं. वह देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और संसद को बाईपास करते हुए खुद ही देश के बड़े फैसले ले रहे हैं. अब उनकी तैयारी पाकिस्तान के अंदर कई टुकड़े करने की है.

पाकिस्तान में वैसे तो पद के लिहाज से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ही देश के टॉप लीडर हैं. लेकिन अब आर्मी चीफ मुनीर के राज में इनका होना केवल नाममात्र के लिए ही रह गया है. ये दोनों बस पद में ही सीनियर हैं लेकिन असल फैसले पर्दे के पीछे से आसिम मुनीर ही ले रहे हैं. मतलब कि पाकिस्तान पर असल राज सेना प्रमुख ही कर रहे हैं.

पाकिस्तान के सैन्य बलों के प्रमुख और डोनाल्ड ट्रम्प की चापलूसी करने वाले फील्ड मार्शल असीम मुनीर अपने देश के उन चारों प्रांतों को समाप्त करना चाहते हैं जो 1947 में पाकिस्तान के गठन के समय से अस्तित्व में हैं. उन्हें 12 या फिर 15 नए राज्यों में डिवाइड किया जा सकता है. इससे भी आगे बढ़कर 160 बहुत छोटे और कम शक्तिशाली यूनिटों में भी बांटा जा सकता है.

किसको होगा असल फायदा?
इन नई छोटी प्रशासनिक यूनिट्स पर चुने हुए प्रमुख हों या फिर प्रांतीय, जिला विधानसभा या फिर सरकार के नामित इंसान यानी फील्ड मार्शल मुनीर की तरफ से शासन किया जा सकता है. हालांकि अभी इसके डिटेल सामने आना बाकी हैं. लेकिन यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि इससे किसको फायदा होगा. इसको पाकिस्तान में सत्ता हथियाने की एक विवादित और नई कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

वैसे मुनीर की इस प्लानिंग को देखा जाए तो फंडामेंटल तौर पर इसके पीछे कुछ तर्क भी हैं. मौजूदा चारों राज्यों की स्थिति अलग-अलग है. सबसे अधिक आबादी वाले पंजाब राज्य में 12.8 करोड़ निवासी हैं, जो देश की कुल आबादी का आधे से थोड़ा ही अधिक हैं. सबसे कम आबादी वाले बलूचिस्तान प्रांत में केवल 1.5 करोड़ लोग हैं, जो कुल आबादी का लगभग 6 फीसदी हैं.

पंजाब में शासन व्यवस्था की स्थिति उम्मीद से भी कम और खराब है. यहां मतलब केवल करप्शन से ही नहीं है. ग्रामीण इलाकों के लोगों को सरकारी कामकाज के लिए कई-कई घंटे यात्रा करनी पड़ती है और वे बुनियादी सेवाओं से वंचित हैं. पंजाबियों के एक चौथाई से भी कम लोगों के पास घर पर पीने के सुरक्षित पानी की सप्लाई उपलब्ध है.

फील्ड मार्शल मुनीर का ऐसा कहना है कि यह प्रांत कायदे से चलाने के लिए बहुत बड़े हैं. देश की इस दयनीय स्थिति के पीछे यह एक मुख्य कारण है. वह इस बात में सही हैं कि पाकिस्तान की हालत खराब है, जहां विकास की दर पड़ोसी देश भारत की आधी से भी कम है. महंगाई दो अंकों में है और कर्ज चुकाने की लागत असहनीय है. लेकिन इसकी वजहें काफी कठिन हैं.

इस नाकामी का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर खुद पाकिस्तानी सेना पर ही जाता है. यह सेना देश के टैक्सपेयर्स के पैसों पर ऐशो-आराम करती है. देश की सबसे कीमती जमीन के बड़े हिस्सों की मालिक है और ऐसे बिजनस को कंट्रोल करती है जो अपने कॉम्पटीशन में लगे प्रतिस्पर्धियों को डराते-धमकाते हैं.

सेना की जागीर है पाकिस्तान!
पाकिस्तान के इतिहास पर गौर करें तो इसने अपने अस्तित्व का करीब 20 फीसदी हिस्सा तो सीधे तौर पर सेना के शासन के तहत बिताया है, जबकि बाकी के समय का भी अधिकांश हिस्सा उन सरकारों के अधीन ही गुजारा है जो फौज को नाराज करने से डरती थीं. सेना की इस बात में भी रुचि है कि भारत के साथ संबंधों में खटास और दुश्मनी बनी रहे. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके खजाने में पैसे के साथ ही महत्व भी बना रहे. हालांकि यह सेना के बजट के लिए तो अच्छा है लेकिन पाकिस्तान के लिए भयानक है.

फ्रायड का फंडा
अब इसको अगर बीसवीं सदी के सबसे महान विचारक और न्यूरोलॉजिस्ट सिगमंड फ्रायड के शब्दों में कहा जाए तो पाकिस्तान की फौज वही समस्या हैं, जिसका समाधान होने का दिखावा वे लोग करते हैं. इसको फ्रायड के मनोविश्लेषण यानी कि Freudian Psychoanalysis कहा जाता है. पाकिस्तान में आज की प्रांतीय सिस्टम में सुधार की जरूरत है लेकिन फील्ड मार्शल की योजनाओं से सावधान रहने के दो कारण हैं. पहला यह कि बहुत कम डायवर्सिटी या बहुलतावाद वाले इस देश में बड़े राज्य दरअसल केंद्र के खिलाफ काउंटरवेट यानी कि जरूरी संतुलन का काम करते हैं.

भुट्टो और शरीफ परिवार
पंजाब और इसके साथ ही कराची वाले सिंध प्रांत की कंडीशन पर गौर करें तो ये दोनों ही लंबे समय से चली आ रहे दलों PML(N) और PPP की जागीरें हैं. सैन्य तानाशाहों के तहत भी उन्होंने एक हद तक सत्ता के ऑप्शनल सेंटर को सुरक्षित रखा है. इसमें कोई शक नहीं है कि यही कारण है कि फील्ड मार्शल के निशाने पर ये दोनों हैं. भुट्टो और शरीफ परिवार की सियासत को कंट्रोल करने की तैयारी है.

इन योजनाओं से सावधान रहने का दूसरा कारण यह है कि इन्हें फील्ड मार्शल मुनीर की तरफ से खुद तैयार किया गया है. उन्होंने सत्ता को अपनी मुट्ठी में ही समेटे रहने में पूरी निर्ममता दिखाई है. उन्होंने पीएमएल (एन) और पीपीपी को भी अपने कंट्रोल में लेने की भरसक तैयारी की है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके असली नेता कमजोर साबित हुए हैं. ये देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के तौर पर सेवा दे रहे हैं.

इमरान खान वाला फैक्टर
उन्होंने देश की तीसरी सबसे बड़ी शक्ति पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के मेन लीडर और पूर्व पीएम इमरान खान को जेल में डाल दिया है. इमरान की पहचान देश के पूर्व क्रिकेट सुपरस्टार से लेकर देश के सबसे लोकप्रिय नेता तक के तौर पर है. खान के समर्थन में होने वाले प्रदर्शनों को प्रतिबंध और बैरिकेड्स से रोका जाता है. देश की मीडिया और टीवी चैनल्स की यह हिम्मत नहीं होती कि वे उनका नाम भी ले सकें.

इसलिए फौरी तौर पर यह बात असंभव सी लगती है कि पाकिस्तान को छोटे टुकड़ों में बांटने की ये प्लानिंग इसलिए है कि प्रांत की सरकारों को आम पाकिस्तानियों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया जा सके. इसकी जगह यह इसे किसी एक इंसान की इच्छा और खुद के लिए आज्ञाकारी बनाने के बारे में है. और वो इंसान है पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर.



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