TVS परिवार में विरासत को लेकर विवाद गहरा गया है. मामला इस बात पर अटका है कि परिवार की संपत्ति का बंटवारा पहले ही हो चुका है या नहीं. टीवीएस मोटर के प्रमुख वेणु श्रीनिवासन और उनकी पत्नी मल्लिका श्रीनिवासन के बेटे सुदर्शन वेणु का मानना है कि कारोबार के साथ संपत्ति का बंटवारा भी तय हो चुका है. वहीं, वेणु श्रीनिवासन की बेटी लक्ष्मी वेणु इस बात से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि कंपनियों को चलाने की जिम्मेदारी मिलने का मतलब उनकी मालिकाना हिस्सेदारी तय हो जाना नहीं है.
2024 के समझौते पर क्यों आमने-सामने हैं परिवार के सदस्य?
इस पूरे विवाद के केंद्र में 21 मार्च 2024 को परिवार के चार सदस्यों के बीच हुआ एक समझौता है. वेणु श्रीनिवासन और सुदर्शन के पक्ष का मानना है कि इस समझौते के जरिए परिवार की संपत्ति का बंटवारा तय हुआ था. इसके तहत लक्ष्मी को सुंदरम क्लेटन और सुदर्शन को टीवीएस मोटर से जुड़ा कारोबार मिलना था.
दूसरी तरफ, मल्लिका और लक्ष्मी के करीबी लोगों का कहना है कि इस समझौते का मकसद संपत्ति बांटना नहीं था. उनके मुताबिक, इसमें मुख्य रूप से टीवीएस ब्रांड के इस्तेमाल और कॉम्टिशन से जुड़े नियम तय किए गए थे. परिवार की संपत्ति का आर्थिक बंटवारा नहीं हुआ था. एक पक्ष समझौते को संपत्ति के बंटवारे का आधार मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कारोबार से जुड़े कुछ नियमों तक सीमित बता रहा है.
यह विवाद करीब 18 महीने से चल रहा है.
दोनों कारोबार के मार्केट कैप में कितना अंतर?
इस विवाद को समझने के लिए दोनों कंपनियों की बाजार कीमत पर नजर डालना जरूरी है. 8 अक्टूबर 2026 को कारोबार बंद होने तक टीवीएस मोटर कंपनी का मार्केट कैप करीब 1.83 लाख करोड़ रुपये था. वहीं, सुंदरम क्लेटन की बाजार कीमत करीब 24,000 करोड़ रुपये थी.
यानी दोनों कंपनियों की वैल्यू में काफी बड़ा अंतर है. पिछले तीन साल में टीवीएस मोटर की बाजार कीमत करीब चार गुना बढ़ गई है. इस बदलाव ने संपत्ति के बंटवारे को लेकर सवाल और तेज कर दिए हैं. अगर कारोबार संभालने की जिम्मेदारी को ही संपत्ति का बंटवारा माना जाए, तो दोनों बच्चों को मिलने वाले कारोबारी हितों की कीमत बराबर नहीं दिखती. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच असली मतभेद इसी बात पर है कि क्या कारोबार की जिम्मेदारी के आधार पर मालिकाना हक भी तय हो गया था.
मौजूदा विवाद 2024 के समझौते और बच्चों के बीच संपत्ति के अधिकारों को लेकर है.
कंपनी चलाना अलग, मालिकाना हक अलग?
वहीं, सुदर्शन के पक्ष का कहना है कि परिवार में कारोबार के बंटवारे को लेकर पहले ही सहमति बन चुकी थी. उनके मुताबिक, यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही ये प्रक्रिया का हिस्सा है.
अब कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ रहा मामला?
यह विवाद करीब 18 महीने से चल रहा है. परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत और मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक सहमति नहीं बन पाई है. मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने कानूनी सलाहकारों से संपर्क किया है. इससे विवाद के कानूनी रास्ते पर जाने की आशंका बढ़ गई है.
इस मामले में टीवीएस ग्रुप के पुराने पारिवारिक समझौतों का भी महत्व है. दिसंबर 2020 में टीवीएस परिवार की अलग-अलग ब्रांच के बीच कारोबार और हिस्सेदारी के रिस्ट्रक्चरिंग को लेकर समझौता हुआ था. वेणु श्रीनिवासन के पक्ष का कहना है कि उस व्यवस्था के तहत कारोबार का बंटवारा तय प्रोसेस से हुआ था. हालांकि, मौजूदा विवाद 2024 के समझौते और बच्चों के बीच संपत्ति के अधिकारों को लेकर है.
टीवीएस परिवार का विवाद सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि कौन-सी कंपनी कौन चला रहा है. असली सवाल यह है कि क्या कंपनी चलाने की जिम्मेदारी के साथ संपत्ति का मालिकाना हक भी तय हो गया था. जब तक दोनों पक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होते, तब तक अरबों रुपये की संपत्ति से जुड़ा यह विवाद और बढ़ सकता है.