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Shifa Mathews: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गरबा त्योहार से पहले एक रील वायरल हो गई, जिस पर जमकर बवाल मचा है. रील में गरबा ड्रेस पहने लड़कियों के सिगरेट पीने और गन कल्चर को दिखाया गया है. इस पर हिंदू संगठनों ने नाराजगी जताई है. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है.
शिफा मैथ्यू (इमेज सोर्स- ikonicmakeupby_shifa इंस्टाग्राम)
Who Is Shifa Mathews: गरबा त्योहार की तैयारियां जोरों से चल रही हैं. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गरबा कार्यक्रम के लिए एक रील बनाई गई, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई. यह रील शिफा मैथ्यू के इंस्टाग्राम हैंडल से शेयर किया गया था. लेकिन देखते ही देखते इसने विवाद का रूप ले लिया. शिफा के द्वारा शेयर किए गए वीडियो में कई लड़कियां दिखाई देती हैं, जिन्होंने पारंपरिक गरबा पोशाक (घाघरा-चोली) पहनी हुई है. इसमें लड़कियों को पारंपरिक पहनावे में खुलेआम सिगरेट के कश लगाते, पिस्टल लहराते हुए दिखाया गया. इस पर जमकर विवाद हुआ. रील को गन कल्चर को बढ़ावा देने वाली माना गया. आइए जानते हैं कि जिसने यह वीडियो पोस्ट किया था. वह शिफा मैथ्यू कौन हैं?
कौन हैं शिफा मैथ्यू?
शिफा मैथ्यू की पहचान छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली एक ब्राइडल मेकअप आर्टिस्ट, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर के तौर है. वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और लोग उनकी रील को काफी पसंद करते हैं. उनके सोशल मीडिया पर 12K फॉलोवर्स हैं. वह हाल ही में हुए गरबा विवाद के बाद काफी चर्चा में रही हैं.
शिफा मैथ्यू (इमेज सोर्स- ikonicmakeupby_shifa इंस्टाग्राम)
धार्मिक भावनाओं और संस्कृति पर सवाल
बस इस वीडियो के सामने आते ही स्थानीय नागरिकों और बजरंग दल जैसे हिंदू संगठनों ने इसका तीखा विरोध शुरू कर दिया. विरोध कर रहे संगठनों का कहना था कि नवरात्रि और गरबा सनातन संस्कृति के पवित्र प्रतीक हैं. गरबा कपड़े पहनकर सिगरेट और हथियारों का इस तरह प्रदर्शन करना न केवल हमारी धार्मिक संस्कृति का अपमान है, बल्कि इससे आम लोगों की आस्था और भावनाएं भी आहत हुई हैं.
पुलिस ने 9 आरोपियों के खिलाफ की कार्रवाई
शिकायत मिलने पर पुलिस ने वीडियो सबूत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है. इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की गई है. इसके अलावा आरोपियों से मुचलका भी भरवाया जा रहा है. बिलासपुर पुलिस की ओर से सख्त चेतावनी जारी की गई है कि धार्मिक आस्था, परंपरा, सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल प्रचार-प्रसार अथवा मनोरंजन के नाम पर इस प्रकार न किया जाए, जिससे किसी वर्ग की भावनाएं आहत हों.