Kota Temple: किताबों में नहीं, अब दीवारों पर पढ़िए सुंदरकांड, कोटा के इस धाम में तैयार हुआ अनूठा मानस मंदिर

Kota Temple: किताबों में नहीं, अब दीवारों पर पढ़िए सुंदरकांड, कोटा के इस धाम में तैयार हुआ अनूठा मानस मंदिर


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अब दीवारों पर पढ़िए सुंदरकांड, कोटा के धाम में तैयार हुआ अनूठा मानस मंदिर

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Kota Godavari Dham Hanuman Temple: कोटा के प्रसिद्ध गोदावरी धाम हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए अनूठा मानस मंदिर तैयार किया गया है. यहां सुंदरकांड किताब के पन्नों पर नहीं, बल्कि मंदिर की दीवारों पर अंकित है. श्रद्धालु दीवारों पर लिखी चौपाइयों को पढ़कर सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं. मानस मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास और महर्षि वेदव्यास की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं. गोदावरी धाम के व्यवस्थापक शैलेंद्र भार्गव के अनुसार, पहले अखंड रामायण का पाठ एक छोटे कक्ष में होता था, लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसका विस्तार किया गया. बनारस और अहमदाबाद के धार्मिक स्थलों से प्रेरणा लेकर दीवारों पर सुंदरकांड अंकित करने का विचार आया. मंदिर का उद्देश्य श्रद्धालुओं को रामचरितमानस से जोड़ना और उसके संदेशों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना है. यहां श्रद्धालु रामायण और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ अखंड रामायण का श्रवण भी कर सकते हैं.

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कोटा. आमतौर पर सुंदरकांड पढ़ने के लिए श्रद्धालु किताब का सहारा लेते हैं, लेकिन कोटा में अब सुंदरकांड किताब के पन्नों पर नहीं, बल्कि मंदिर की दीवारों पर पढ़ने को मिलेगा. शहर के प्रसिद्ध गोदावरी धाम हनुमान मंदिर में तैयार किए गए मानस मंदिर की दीवारों पर संपूर्ण सुंदरकांड अंकित किया गया है. मानस मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास जी और महर्षि वेदव्यास की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई है. यहां श्रद्धालु दीवारों पर अंकित सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं. मंदिर में लंबे समय से अखंड रामायण का पाठ भी किया जा रहा है.

गोदावरी धाम के व्यवस्थापक शैलेंद्र भार्गव ने बताया कि हनुमान जी महाराज की स्थापना के बाद से यहां अखंड रामायण का आयोजन किया जा रहा था. पहले यह आयोजन नवरात्र और सावन के दौरान होता था. समय के साथ आरती और रामायण पाठ में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी और पाठ के लिए बनाया गया कक्ष छोटा पड़ गया. इसके बाद इसी कक्ष का विस्तार कर इसे मानस मंदिर का रूप दिया गया. यहां तुलसीदास जी और महर्षि वेदव्यास की प्रतिमाएं स्थापित करने के साथ ही दीवारों पर संपूर्ण सुंदरकांड अंकित किया गया.

बनारस और अहमदाबाद के मंदिरों से ली गई प्ररेणा

शैलेंद्र भार्गव के अनुसार, मानस मंदिर बनाने की प्रेरणा बनारस और अहमदाबाद के धार्मिक स्थलों से मिली. बनारस में मानस मंदिर की दीवारों पर रामायण अंकित है, जबकि अहमदाबाद में भागवत कथा को दीवारों पर अंकित किया गया है. इसी से प्रेरणा लेकर गोदावरी धाम में सुंदरकांड को दीवारों पर उतारा गया. उन्होंने बताया कि रामचरितमानस का संदेश है कि…

“एहिं कलिकाल न साधन दूजा। जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा॥”

“रामहि सुमिरिअ गाइअ रामहि। संतत सुनिअ राम गुन ग्रामहि॥”

“जासु पतित पावन बड़ बाना। गावहि कबि सुसंत पुराना॥”

“ताहि भजै मन तजी कुटिलआई। राम भजै गति केहि न भाई॥”

गोदावरी धाम आकर श्रद्धालु अखंड रामायण का श्रवण कर सकते हैं

शैलेंद्र भार्गव ने बताया कि कलियुग में भगवान राम का स्मरण, गुणगान और श्रवण भी कल्याण का मार्ग है. ऐसे लोग जो घर पर रामायण का पाठ नहीं कर पाते या किसी कारण से पढ़ नहीं सकते, वे यहां आकर कुछ समय अखंड रामायण का श्रवण कर सकते हैं. मानस मंदिर बनाने का उद्देश्य भी यही है कि श्रद्धालु रामचरितमानस को केवल किताब तक ही नहीं इसके संदेश को स्वयं जीवन में उतारें. सुंदरकांड की कुछ चौपाइयां भी यदि श्रद्धालु मन से पढ़ें और उनके अर्थ को समझें, तो उनका जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकता है. इस गोदावरी धाम में तैयार किया गया यह मानस मंदिर अब हर रोज हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और रामायण का पाठ करने के लिए आते हैं और शांति की अनुभूति प्राप्त करते हैं.



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