Donald Trump Nobel Anger : नोबेल पीस प्राइज नहीं मिला तो पैर पटकने लगे ट्रंप, नावी पिल्लई को सुनाया और ICC पर थोप दिए प्रतिबंध!

Donald Trump Nobel Anger : नोबेल पीस प्राइज नहीं मिला तो पैर पटकने लगे ट्रंप, नावी पिल्लई को सुनाया और ICC पर थोप दिए प्रतिबंध!


भारतीय मूल की नावी पिल्लई को नोबेल पीस प्राइज मिलते ही अमेरिका में रोना-धोना चालू हो गया है. 9 अक्टूबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में नोबेल कमेटी ने दक्षिण अफ्रीका की दिग्गज न्यायविद नावी पिल्लई को साल 2026 के ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ से नवाजने का ऐलान किया. इस खबर पर जहां एक तरफ दुनिया तालियां बजा ही रही है, दूसरी तरफ वाशिंगटन से व्हाइट हाउस के ‘सुपर बॉस’ ट्रंप ने पैर पटकने शुरू कर दिए हैं. ट्रंप ने नावी को तो बुरा-भला सुनाया ही लेकिन उस इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC को भी नहीं छोड़ा जहां वो जज रह चुकी हैं. ट्रंप का नया ‘डिप्लोमैटिक ड्रामा’ देखकर दुनिया ने अपना सिर पकड़कर लिया है.

ट्रंप के 8 युद्ध वाले दावे फेल!

दरअसल, ट्रंप जब से राष्ट्रपति बने हैं, तब से एक नोबेल हासिल करने का सपना देख रहे हैं. वो 8 युद्ध खत्म करने के दावो करते हैं, बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश करते हैं और अपनी तारीफें भी करते हैं, फिर नोबेल मांगते हैं. हालांकि, वो बड़ी चालाकी से भूल जाते हैं कि वो खुद ईरान के साथ जंग लड़ रहे हैं, जहां उन पर वॉर क्राइम के आरोप भी हैं.

पिछले साल जब नोबेल नहीं मिला तो ट्रंप ने खूब गुस्सा दिखाया. झुंझलाहट में यूरोपीय देशों को सजा तक दे डाली. उन्हें लगा दुनिया को डराएंगे तो सब इस साल का नोबेल प्राइज वैसे ही थमा देंगे, जैसे किसी बिगड़ैल बच्चे को खिलौना दिया जाता है. हालांकि, इस बार भी ट्रंप के मन की नहीं हुई. जाहिर है कि इस बार ड्रामा भी डबल होने वाला है.

ट्रंप का गुस्सा और नावी पिल्लई पर धावा

डोनाल्ड ट्रंप का बस चले तो वो दुनिया का हर मेडल और हर शांति पुरस्कार अपने ड्रॉर में बंद करके रख लें. जब 85 साल की नावी पिल्लई को शांति पुरस्कार मिला, तो ट्रंप साहब का ईगो एकदम से हर्ट हो गया.

घोषणा के तुरंत बाद ट्रंप ने अपने पसंदीदा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दूसरों की भड़ास को रीपोस्ट (Repost) करना शुरू कर दिया. एक पोस्ट में तो नावी पिल्लई को सीधे-सीधे ‘अमेरिका और इजरायल से नफरत करने वाली महिला’ करार दे दिया गया. इतना ही नहीं, उस पोस्ट में नोबेल कमेटी पर तंज कसते हुए लिखा गया कि उन्होंने पिल्लई को ये इनाम देकर अपना चेहरा हमेशा के लिए शर्मसार कर लिया है.

ट्रंप का गुस्सा इस बात पर भी था कि नावी पिल्लई ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के जांच आयोग की अध्यक्ष रहते हुए इजरायल-हमास संघर्ष में गाजा के मानवाधिकारों और नरसंहार जैसे सेंसेटिव मुद्दों पर न्यूट्रल रिपोर्ट तैयार की थी. अब ट्रंप साहब के लॉजिक के हिसाब से, जो भी इजरायल या अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाए, वो सीधा ‘ट्रंप की हिट लिस्ट’ में आ जाता है!

‘वरना हम ICC को मिटा देंगे’, विदेश मंत्री मार्को रुबियो का ड्रामा

ट्रंप के मन की बात को अमलीजामा पहनाने के लिए उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो मैदान में उतरे. उन्होंने एक ऐसा बयान जारी किया, जिसे सुनकर लगता है मानो कोई हॉलीवुड फिल्म का विलेन पूरी दुनिया को धमकी दे रहा हो.

रुबियो ने कहा ‘राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को किसी अमेरिकी नागरिक पर केस चलाने की इजाजत नहीं देंगे. इसलिए आज अमेरिका इस ‘भगोड़े कोर्ट’ पर प्रतिबंध लगा रहा है. हम इस कोर्ट के सारे वित्तीय संसाधन काट देंगे और इसे अपाहिज बना देंगे’!

रुबियो यहीं नहीं रुके, उन्होंने यूरोपीय देशों और अमेरिकी सहयोगियों को आंखें दिखाते हुए यहां तक कह दिया, ’या तो ICC अपनी हरकतों से बाज आए और अपनी धमकियां बंद करे, वरना हम ICC को ही खत्म कर देंगे. हमारे जो सहयोगी अपनी रक्षा के लिए अमेरिकी सैनिकों पर निर्भर हैं, उन्हें चइस कोर्ट को लगाम लगाकर रखना पड़ेगा’.

ICC का ‘मास्टरप्लान’: सॉफ्टवोयर बदलने लगे जज!

ट्रंप प्रशासन का ये नया प्रतिबंध बेहद खतरनाक है. इस बार केवल जजों या वकीलों के पर्सनल अकाउंट बैन नहीं किए गए हैं, बल्कि उन कंपनियों पर भी पेनल्टी लगाने की बात कही गई है जो इस कोर्ट को बैंकिंग, इंश्योरेंस या सॉफ्टवोयर जैसी सर्विसेज देंगी. यानी बैंक खाते सील, सॉफ्टवोयर बंद और बीमा भी खत्म!

हालांकि, ICC के अधिकारी भी कोई कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं. वो जानते थे कि ट्रंप जैसे ही 2025 में दोबारा व्हाइट हाउस में कदम रखेंगे, वो ऐसा ही कुछ बच्चों जैसा बचकाना कदम उठाएंगे. इसलिए ICC ने महीनों पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी. उन्होंने अपने सारे कंप्यूटरों से माइक्रोसॉफ्ट का सॉफ्टवोयर हटाकर ओपन-सोर्स सॉफ्टवोयर डालना शुरू कर दिया, ताकि अमेरिका उनका सिस्टम ब्लॉक न कर सके.

उन्होंने अपनी बैंकिंग और हेल्थ इंश्योरेंस व्यवस्था के लिए भी यूरोपीय देशों के साथ अलग ‘बैकअप’ तैयार कर लिया. यानी ट्रंप अमेरिका में बैठकर चाबुक चला रहे थे और उधर नीदरलैंड में बैठी कोर्ट पहले ही अपने सिस्टम का ‘देसी जुगाड़’ निकाल चुकी थी!

‘आपकी धमकियों से हमारी अदालत नहीं रुकेगी’, ICC की झिड़की

ट्रंप के इन कड़े प्रतिबंधों पर ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने तगड़ा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के इन प्रतिबंधों की दुनिया भर में निंदा होनी चाहिए. इसका मकसद सिर्फ अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था और एक स्वतंत्र अदालत के काम को रोकना है. लेकिन अमेरिका चाहे जितने प्रतिबंध लगा ले, ICC अपने केसों की जांच, मुकदमों और युद्ध अपराधों की सुनवाई को एक इंच भी पीछे नहीं हटाएगी.

मजेदार बात ये है कि बैन लगाने के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी खजाने को खुद पीछे हटना पड़ा और उन्होंने टेलीकॉम, पेंशन पेमेंट और कैदियों की देखभाल जैसी चीजों के लिए 4 ‘स्पेशल लाइसेंस’ जारी कर दिए. यानी खुद ही बैन लगाया और खुद ही उसमें सुराख भी कर दिया!

नोबेल कमेटी का करारा तमाचा: ‘इंटरनेशनल लॉ पर हमले बंद करो’

ट्रंप भले ही नावी पिल्लई को ‘अमेरिका का विरोधी’ बताकर खारिज करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार कमेटी ने पिल्लई को चुने जाने के पीछे जो वजह बताई, वो सीधे तौर पर ट्रंप जैसे नेताओं के मुंह पर करारा तमाचा है.

कमेटी ने कहा कि आज जब दुनिया के कुछ शक्तिशाली राजनेता और देश अंतरराष्ट्रीय अदालतों और जजों पर पॉलिटिकल हमले कर रहे हैं, ऐसे समय में नावी पिल्लई को ये पुरस्कार देना दुनिया को एक बड़ा संदेश है. शांतिपूर्ण दुनिया के लिए जरूरी है कि युद्ध अपराधियों को सजा मिले और पीड़ितों को न्याय मिले.

क्या सच में ढह जाएगी दुनिया की सबसे बड़ी अदालत?

ट्रंप का ये फैसला ये साफ दिखाता है कि जब-जब कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था अमेरिका या उसके करीबियों से सवाल पूछने की हिम्मत करती है, तब-तब वाशिंगटन उस संस्था का गला घोंटने निकल पड़ता है. लेकिन 125 देशों के समर्थन वाली इस अदालत को अपनी सनक से बंद करा पाना ट्रंप के लिए इतना आसान नहीं होने वाला है. यूरोपीय देश पहले से ही अमेरिका के इस ‘आक्रामक रवैये’ से तंग आ चुके हैं. अब देखना ये होगा कि ट्रंप की ये ‘दबंगई’ अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को झुका पाती है या फिर दुनिया भर के देश एक साथ खड़े होकर ट्रंप को ये समझाते हैं कि ‘दुनिया आपकी जागीर नहीं है!’



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