CJP Protest, IPS Nupur Prasad: दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से पुलिस के इनकार के बाद ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद चर्चा में हैं. दिल्ली पुलिस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है. नूपुर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके पीछे दो वजहें बताईं. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन काफी देर से मिला था और पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया था.
इस फैसले के बाद नूपुर प्रसाद के बारे में भी जानने की दिलचस्पी बढ़ी है. आखिर वह कौन हैं, कहां की रहने वाली हैं, उन्होंने कहां तक पढ़ाई की है और कब भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में आईं? अपने करियर में उन्होंने किन-किन जगहों पर काम किया और सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच से उनका क्या संबंध रहा है? आइए समझते हैं…
बिहार की रहने वाली हैं नूपुर प्रसाद
नूपुर प्रसाद 2007 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं. वह अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्रशासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर से आती हैं. उनका गृह राज्य बिहार है. उनका जन्म 5 जनवरी 1983 को हुआ था और उन्होंने 18 अगस्त 2007 को आईपीएस सेवा ज्वाइन की थी. नूपुर प्रसाद ने अपने करियर में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में भी जिम्मेदारियां निभाई हैं.
पटना यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन, JNU से MA और एमफिल
नूपुर प्रसाद की पढ़ाई बिहार से शुरू हुई. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से इतिहास विषय में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद वह दिल्ली आईं और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में दाखिला लिया. यहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंध यानी इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर्स और एमफिल की पढ़ाई पूरी की. नूपुर प्रसाद ने एक इंटरव्यू में अपने करियर का श्रेय परिवार को दिया था. उन्होंने बताया था कि उनके पिता रक्षा लेखा विभाग में काम करते थे, जबकि उनके दोनों भाई इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के क्षेत्र में कार्यरत थे. परिवार ने उन्हें अपनी पसंद के मुताबिक पढ़ाई करने और करियर चुनने की आजादी दी. जब उन्होंने आईपीएस में जाने का फैसला किया, तब भी परिवार ने उनका साथ दिया.
ट्रेनिंग के बाद पश्चिम बंगाल में पहली पोस्टिंग
आईपीएस में सेलेक्शन के बाद नूपुर प्रसाद ने मसूरी और हैदराबाद में प्रशिक्षण लिया. इसके बाद उनकी शुरुआती पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के हावड़ा में सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के रूप में हुई. उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर को चुनौतीपूर्ण बताया था, क्योंकि हावड़ा में अपराध से जुड़े मामले अधिक थे. इसके बाद वह दक्षिण 24 परगना में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडिशनल डीसीपी) के पद पर तैनात रहीं.
अरुणाचल प्रदेश में दो जिलों की एसपी रहीं
पश्चिम बंगाल में तैनाती के बाद नूपुर प्रसाद की पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश में हुई. उन्होंने बोमडिला और तवांग में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के तौर पर काम किया. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों जिलों में उन्होंने करीब 18-18 महीने तक जिम्मेदारी संभाली. अरुणाचल प्रदेश में पुलिसिंग का तरीका दिल्ली जैसे बड़े शहरी इलाके से अलग था. नूपुर प्रसाद ने बताया था कि बोमडिला में एक इंजीनियर के अपहरण का मामला सामने आया था. पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से मामले को सुलझाया और अपहृत व्यक्ति को सुरक्षित बचाया. उन्होंने यह भी बताया था कि स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर गांजे की खेती के खिलाफ कार्रवाई की गई.
दिल्ली पुलिस में संभालीं कई अहम जिम्मेदारियां
अरुणाचल प्रदेश में तैनाती के बाद नूपुर प्रसाद दिल्ली पुलिस में लौटीं. यहां उन्होंने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली और दक्षिण जिले में अतिरिक्त डीसीपी के तौर पर काम किया. दक्षिण-पश्चिम जिले में द्वारका जैसे शहरी इलाकों के साथ नजफगढ़ और छावला जैसे ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी भी शामिल थी. उनके मुताबिक इस क्षेत्र में गैंगवार जैसी चुनौतियां भी थीं. दक्षिण जिले में तैनाती के दौरान उन्हें कई हाई-प्रोफाइल मामलों और संवेदनशील परिस्थितियों से निपटना पड़ा. इनमें अफ्रीकी नागरिकों और स्थानीय लोगों से जुड़ा एक संवेदनशील मामला भी शामिल था, जिसे पुलिस ने पेशेवर तरीके से संभाला.
शाहदरा जिले की पहली DCP बनीं
नूपुर प्रसाद के करियर की अहम जिम्मेदारियों में शाहदरा जिले की पहली पुलिस उपायुक्त (DCP) बनना भी शामिल है. उस समय इस जिले की पुलिस व्यवस्था को स्थापित करने की चुनौती थी. उन्हें एक ओर जिले की पुलिसिंग संभालनी थी तो दूसरी ओर व्यवस्था को खड़ा भी करना था. शाहदरा की भौगोलिक स्थिति के कारण पुलिस के सामने अलग तरह की चुनौतियां थीं. जिले के छह पुलिस थानों की सीमाएं उत्तर प्रदेश से लगती हैं.
सुशांत सिंह राजपूत केस की CBI जांच से कैसे जुड़ा नाम?
नूपुर प्रसाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब मिली जब उन्हें अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले की जांच करने वाली सीबीआई टीम में अहम जिम्मेदारी मिली. सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे.मामले ने उस समय देशभर में काफी चर्चा बटोरी थी. अभिनेता के परिवार की शिकायत के बाद जांच को लेकर अलग-अलग सवाल उठे और अगस्त 2020 में सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ली. सीबीआई की टीम ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक साक्ष्यों समेत कई पहलुओं की जांच की.नूपुर प्रसाद ने सीबीआई में एसपी के तौर पर इस जांच से जुड़े कामों की निगरानी की. यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा और जांच के दौरान कई तरह के दावे किए गए हालांकि मार्च 2025 में सीबीआई ने अदालतों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि जांच में हत्या, आत्महत्या के लिए उकसाने या आपराधिक साजिश का सबूत नहीं मिला. क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के अधिकार क्षेत्र में रहती है.
CBI में काम करने के बाद दिल्ली पुलिस में वापसी
सीबीआई में अपनी तैनाती के दौरान नूपुर प्रसाद ने सुशांत सिंह राजपूत मामले जैसे चर्चित प्रकरण के अलावा अन्य जांच और पुलिसिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभाईं. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी करने के बाद वह दिल्ली पुलिस में वापस लौटीं. अगस्त 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें उनकी सेवा के लिए पदक से सम्मानित किए जाने की घोषणा भी हुई.दिल्ली पुलिस में वापसी के बाद वह ज्वाइंट कमिश्नर स्तर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. उनके करियर में दिल्ली, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश और सीबीआई में काम करने का अनुभव शामिल है. अलग-अलग जगहों पर तैनाती के दौरान उन्होंने अपराध नियंत्रण, जांच और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई तरह के काम किए हैं.
पुलिस अधिकारी से हुई है शादी
नूपुर प्रसाद की शादी भी पुलिस सेवा से जुड़े एक अधिकारी से हुई है. एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि एक ही पेशे से जुड़े होने के कारण दोनों एक-दूसरे की नौकरी की चुनौतियों और जिम्मेदारियों को बेहतर समझ पाते हैं. पुलिस सेवा में लंबे समय तक काम करने के लिए परिवार का सहयोग जरूरी होता है और नूपुर प्रसाद अपने करियर में परिवार के समर्थन को खास महत्व देती रही हैं.
सीजेपी के प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित सीजेपी के प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इस प्रदर्शन का उद्देश्य एसआईआर की प्रक्रिया को रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाना बताया गया है. प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की अनुमति से जुड़े सवालों पर ज्वाइंट सीपी नूपुर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस का पक्ष रखा.
पहली वजह: अनुमति के लिए देर से मिला आवेदन
नूपुर प्रसाद के मुताबिक सीजेपी की ओर से प्रदर्शन के संबंध में दिया गया पत्र दिल्ली पुलिस को 7 अक्टूबर को मिला था जबकि प्रदर्शन 10 अक्टूबर को प्रस्तावित था. उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले अनुमति लेने की जरूरत होती है. पुलिस का कहना है कि आवेदन मिलने और प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच बहुत कम समय बचा था. ऐसे में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था करने और जरूरी इंतजाम पूरे करने में परेशानी हो सकती थी. इसी वजह से अनुमति नहीं दी गई.
दूसरी वजह: पिछले प्रदर्शन का रिकॉर्ड
नूपुर प्रसाद ने अनुमति नहीं देने की दूसरी वजह सीजेपी के पिछले प्रदर्शन से जुड़े रिकॉर्ड को बताया. उनके अनुसार पिछले प्रदर्शन के दौरान संगठन की ओर से नियमों का पालन नहीं किया गया था. पुलिस को आशंका थी कि इस बार भी ऐसी स्थिति बन सकती है इसलिए देर से आवेदन मिलने के साथ-साथ पिछले अनुभव को भी फैसला लेने का आधार बनाया गया. यह दिल्ली पुलिस की ओर से बताई गई वजहें हैं.