Last Updated:
सहारनपुर में RSETI और इनेबल इंडिया ने एक पहल शुरू की है. जिसमें दिव्यांग महिला व पुरुषों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाकर उनको सशक्त करने का काम किया जा रहा है. जिसमें दीपावली से पहले महिलाओं के द्वारा सैकड़ो प्रकार के डिजाइन में खूबसूरत स्कैंडल तैयार किये जा रहे हैं. अक्सर लोग सोचते हैं की मोमबत्ती एक बहुत छोटा बिजनेस है और केवल मोमबत्ती एक या दो प्रकार की ही ज्यादातर लोगों को मार्केट में मिलती है. लेकिन यह दिव्यांग महिलाएं एक नहीं, दो नहीं बल्कि सैकड़ो प्रकार के डिजाइन में इन खूबसूरत कैंडल्स को तैयार कर रही हैं.
सहारनपुर: दिव्यांग लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए RSETI और इनेबल इंडिया ने एक पहल शुरू की है. जिसमें दिव्यांग महिला व पुरुषों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाकर उनको सशक्त करने का काम किया जा रहा है. जिसमें दीपावली से पहले महिलाओं के द्वारा सैकड़ो प्रकार के डिजाइन में खूबसूरत स्कैंडल तैयार किये जा रहे हैं. अक्सर लोग सोचते हैं की मोमबत्ती एक बहुत छोटा बिजनेस है और केवल मोमबत्ती एक या दो प्रकार की ही ज्यादातर लोगों को मार्केट में मिलती है. लेकिन यह दिव्यांग महिलाएं एक नहीं, दो नहीं बल्कि सैकड़ो प्रकार के डिजाइन में इन खूबसूरत कैंडल्स को तैयार कर रही हैं.
दीपावली का पर्व भी नजदीक है जिसमें सबसे ज्यादा कैंडल्स और दीपक की आवश्यकता पड़ती है उसी के दृष्टिगत इन दिव्यांग लोगों को आत्मनिर्भर बनने का एक सुनहरा अवसर मिला है. प्रशिक्षण के दौरान इन्हें कपल्स, फ्लावर्स, बॉल्स सहित ऐसे नए डिजाइंस की कैंडल्स तैयार करना सिखाया गया है जो कि ऑफलाइन सेल होने के साथ-साथ ऑनलाइन काफी महंगे दाम पर जाती है. मोमबत्ती को अलग-अलग डिजाइन में तैयार करने की इस कला से दिव्यांग लोग अब अपने आप को मजबूत बना सकेंगे और इस समाज के अंदर एक मजबूर पिलर के रूप में खड़े हो सकेंगे.
अब दिव्यांग भी समाज में मजबूती के साथ हो सकेंगे खड़े
रहमानी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि अभी हम लोग मोमबत्ती बनाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं और हमें पहले लगता था की मोमबत्ती केवल एक तरह की होती है, लेकिन मोमबत्ती को हम बहुत सारे डिजाइन में यहां पर बनते हुए और खुद अपने हाथों से बना कर देख रहे हैं. हमें पहले लगता था की मोमबत्ती बहुत सस्ती है लेकिन अब हमें लग रहा है की मोमबत्ती में भी बहुत सारी बचत की जा सकती है. ट्रेनर कुसुम कश्यप ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि अलग-अलग तरह के मॉम और जेल से अलग-अलग तरह के डिजाइंस हम लोग तैयार करके इन दिव्यांग लोगों को सीख रहे हैं. इन मोमबत्ती को बनाकर के अपना एक अच्छा बिजनेस शुरू किया जा सकता है यह फैंसी मोमबत्ती गिरजाघर, होटल, रेस्टोरेंट इन सभी में महंगे दामों पर जाती है. और इसमें किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता और ना ही यह रखी हुई खराब होती है.
दिव्यांग जनों को आत्मनिर्भर बनाना है काम
अमित कुमार चौबे ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि गांव शेखपुरा कदीम में दिव्यांग महिलाओं व पुरुषों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया है. इनेबल इंडिया के सहयोग से पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा यह प्रशिक्षण इन लोगों को दिया जा रहा है. इस प्रशिक्षण का मकसद यही है कि इनको स्वरोजगार से जोड़ा जाए, यह अपने आप को बेसहारा ना समझे और इस प्रशिक्षण के माध्यम से क्योंकि मोमबत्ती एक छोटा व्यवसाय नहीं है आप इसको एक बड़े स्तर पर ले जा सकते हैं दीपावली का सीजन नजदीक है और हमारा देश एक धार्मिक और आध्यात्मिक देश है जिसमें मोमबत्ती और दीपको की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है जो हमारे दिव्यांग भाई बहन यहां पर आए हुए हैं यह घर पर बैठकर ही इन चीजों को बना सकते हैं और ऑनलाइन इनको कैसे सेल किया जा सकता है उस चीज की ट्रेनिंग भी इनको दी जा रही है.