नवरात्रि में कलश स्थापना के हैं दो मुहूर्त, ज्योतिषाचार्य ने बताया कौन है शुभ
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पूजा-पाठ सहित तमाम धार्मिक कार्यों में शुभ मुहूर्त का बड़ा महत्व होता है. 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. नवरात्रि में लोग कलश स्थापना करते हैं. कलश स्थापना में शुभ मुहूर्त का बड़ा महत्व होता है. इस बार नवरात्रि में दो शुभ मुहूर्त हैं. इसलिए देवघर के ज्योतिषाचार्य ने कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, जरूरी सामग्री और पूजा विधि की पूरी जानकारी दी है.
देवघर: 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है. सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. भक्त अपने घरों में विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं और मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में सही विधि से कलश स्थापना करने के बाद ही नवरात्रि की पूजा शुरू करनी चाहिए. ऐसे में अगर आप भी इस बार अपने घर में कलश स्थापना करने की तैयारी कर रहे हैं, तो शुभ मुहूर्त के साथ पूजा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री के बारे में जान लेना बेहद जरूरी है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस साल की शारदीय नवरात्रि कई मायनों में खास रहने वाली है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस बार मां भगवती हाथी पर सवार होकर आएंगी, जिसे शुभ फल देने वाला माना जाता है. नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है.इसी दिन कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक चलने वाले पूजा-पाठ की शुरुआत होती है. ऐसे में श्रद्धालुओं को कलश स्थापना करते समय दिशा, मुहूर्त और जरूरी सामग्री का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि पूजा विधि-विधान के साथ संपन्न हो सके.
कलश स्थापन के सटीक शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, इस साल कलश स्थापना के लिए दो मुहूर्त बताए गए हैं. पहला मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. वहीं, दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त है, जो सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इन मुहूर्तों में कलश स्थापना कर सकते हैं. कलश स्थापना के लिए घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को शुभ माना जाता है. इसलिए पूजा की जगह तय करते समय इस दिशा का ध्यान रखना चाहिए.
इन सामग्रियों के बिना अधूरी मानी जाती है कलश स्थापना
कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को साफ कर लें. इसके बाद वहां बालू बिछाकर उसमें जौ या सप्तधान्य रखें.अब इसके ऊपर कलश स्थापित करें.मिट्टी का कलश भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन ज्योतिषाचार्य के अनुसार कलश में किसी तरह का काला धब्बा नहीं होना चाहिए. इसके बाद कलश में गंगाजल डालें.फिर उसमें एक सिक्का, एक सुपारी, पंचरत्न, सर्वौषधि और कमलगट्टा डालें.इसके बाद पांच तरह के पत्तों से तैयार पंचपल्लव रखें.इसमें पीपल, पाकड़, बरगद, डुमर और आम के पत्ते शामिल बताए गए हैं.फिर कलश के ऊपर पूर्ण पात्र रखें और उसके ऊपर छोटा नारियल स्थापित करें. नारियल का मुख अपनी तरफ रखने का ध्यान रखें.इसके बाद नारियल को चुनरी से ढककर माला से सजा दें.
विधि-विधान से पूजा करने की है मान्यता
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि कलश स्थापना के दौरान साफ-सफाई और पूजा की सामग्री का ध्यान रखना चाहिए. सभी जरूरी सामग्री जुटाने के बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करें और मां दुर्गा की पूजा शुरू करें. नवरात्रि के नौ दिनों तक श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं.धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान और सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.इसलिए नवरात्रि शुरू होने से पहले ही पूजा की सामग्री तैयार कर लें, ताकि पहले दिन कलश स्थापना के समय किसी तरह की परेशानी न हो.