मऊ जनपद में एक खास तरह का पेड़ा बनाया जाता है, जो इन दिनों हर किसी की पहली पसंद बन रहा है. इस पेड़े को सिर्फ खोवा से बनाया जाता है. यही वजह है कि लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं. इस पेड़े की खासियत यह है कि इसे व्रत में भी खाया जा सकता है. इसी वजह से इसकी मांग बढ़ती जा रही है. पिछले 25 वर्षों से यह पेड़ा अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. आइए जानते हैं, क्या है इस पेड़े की खासियत.
शुद्ध पेड़े के लिए 25 वर्षों से है पहचान
लोकल 18 से बात करते हुए संतोष बताते हैं कि उनकी दुकान रेलवे स्टेशन के बगल में है. यहां खास तौर पर खोवा का पेड़ा बनाया जाता है. इसे सुबह 9 बजे से बनाना शुरू किया जाता है और शाम 4 बजे तक तैयार किया जाता है. इस पेड़े की खासियत यह है कि इसे लोगों को ताजा परोसा जाता है और यह शुद्ध खोवा से बनाया जाता है. हालांकि, इसे बनाने में काफी लंबा समय लगता है और तैयार होने के कुछ ही देर बाद पेड़ा खत्म हो जाता है.
स्टेशन के बगल में दुकान होने की वजह से लोग इस पेड़े को कई जनपदों में लेकर जाते हैं. खास बात यह है कि इस पेड़े को इस तरह बनाया जाता है कि इसे व्रत में भी आसानी से खाया जा सकता है. इस वजह से व्रत रखने वाले लोग यहां अक्सर आते हैं और इस पेड़े को खरीदकर घर ले जाते हैं.
सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक पकाया जाता है खोवा
इस पेड़े को बनाने के लिए सिर्फ दूध, चीनी और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है. इन तीनों सामग्रियों से ही यह पेड़ा तैयार होता है. इसे बनाने के लिए शुद्ध दूध का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि बिना मिलावट वाले दूध से खोवा बनाने पर उसकी मात्रा अधिक निकलती है.
इस पेड़े को बनाने में सबसे ज्यादा समय और मेहनत लगती है. इसके लिए कोयले की आग पर सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक दूध को पकाया जाता है. इसमें काफी समय लगता है, तब जाकर पेड़ा तैयार होता है. इसे बनाने में दो लोग लगते हैं, क्योंकि दूध पकने के दौरान उसे लगातार चलाते रहना पड़ता है. एक व्यक्ति लगातार चलाते-चलाते थक जाता है, इसलिए दो लोगों की जरूरत पड़ती है.
सिर्फ तीन सामग्रियों से बनाया जाता है यह पेड़ा
जब दूध पूरी तरह पककर खोवा का रूप ले लेता है, तो उससे पेड़े बनाए जाते हैं. इसके लिए खोवा की पहले छोटी-छोटी लोइयां बनाई जाती हैं. इसके बाद लोइयों को पेड़े के सांचे से दबाकर आकार दिया जाता है.
यह पेड़ा 320 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाता है. रेलवे स्टेशन के बगल में दुकान होने की वजह से अगर कोई व्यक्ति एक बार इस पेड़े का स्वाद चख लेता है, तो वह सफर के दौरान बार-बार यहां से इसे खरीदना पसंद करता है. इस पेड़े की एक खासियत यह भी है कि इसे व्रत में आसानी से खाया जा सकता है, क्योंकि इसे बनाने में सिर्फ दूध, चीनी और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है.