मिर्जापुर : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में भैरो प्रसाद हॉस्पिटल में मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है. 50 बेड के अस्पताल को लेकर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा इंतजाम किए गए थे, यहां पर डॉक्टरों की नियुक्ति होनी थी, लेकिन अभी तक पूरी तरीके से अस्पताल का संचालन नहीं हो रहा है. अस्पताल के नाम पर सिर्फ एक डॉक्टर आ रहे हैं. वह भी हाजिरी लगाकर वापस चले जा रहे हैं. भैरो प्रसाद हॉस्पिटल का मेडिकल कॉलेज संचालन कर रहा था, जिसे बंद कर कर स्वास्थ्य विभाग में स्वयं ले लिया. स्वास्थ्य विभाग के अधीन आने के बाद हॉस्पिटल फिर से बंद हो चुका है.
सिविल लाइन में स्थित भैरो प्रसाद हॉस्पिटल का निर्माण 17 करोड़ से हुआ था. अस्पताल बनने के बाद इसे मेडिकल कॉलेज को हैंडओवर कर दिया गया, जिसके बाद आंख, नाक, कान और मानसिक रोग की ओपीडी यहां पर संचालित की जा रही थी. काफी संख्या में मरी उपचार करा रहे थे. शासन के द्वारा भैरो प्रसाद हॉस्पिटल के संचालन को लेकर छह करोड़ रुपए जारी किए गए, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से हॉस्पिटल को अपने अधीन ले लिया गया. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधीन आने के बाद फिर से आया हॉस्पिटल अभी बंद पड़ा हुआ है.
हुआ घोटाला
दिलीप सिंह गहरवार ने बताया कि अस्पताल के संचालन के नाम पर जो पैसे आए हुए थे, उसमें जबरदस्त घोटाला हुआ है. ऐसे में इसकी जांच होनी चाहिए और अस्पताल के संचालक को दोबारा शुरू करना चाहिए. ताकि, मरीजों को इसका लाभ मिल सके. बेसकीमती जमीन दान में देकर अस्पताल के निर्माण का सपना भैरो प्रसाद जायसवाल ने देखा था, जिसके बाद अस्पताल बना. अब मरीजों का उपचार नहीं हो रहा है. यह बेहद ही दुखद है, यहां पर जो 6 करोड रुपए खर्च हुए हैं, उसकी जांच होनी चाहिए और अनियमितता मिलने पर कार्रवाई होनी चाहिए.
पैसे में खेल
गुलाब शंकर मिश्रा ने बताया कि भैरव प्रसाद हॉस्पिटल का संचालन बेहतरीन हो रहा था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पैसा आने के बाद खेल शुरू किया गया, जिसके बाद अस्पताल में संचालन बंद हो गया. हॉस्पिटल का संचालन बंद होने के बाद अभी तक इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है. व्यवस्थाओं के नाम पर जो पैसे आए हुए थे, उनका भी अता-पता नहीं है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर हॉस्पिटल का संचालन बंद है तो कोई अधिकारी इस पर सवाल क्यों नहीं खड़ा कर रहा है.
शुरू हो संचालन
उमाकांत सिंह ने बताया कि अस्पताल का संचालन शुरू होना चाहिए, ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सके. हॉस्पिटल का संचालन नहीं होने की वजह से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में मरीजों को मेडिकल कॉलेज जाना पड़ा है, यहां पर कई विभाग चलते थे. ऐसे में यही पर उपचार हो जाया करता था. परेशान भी नहीं होना पड़ता था.